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PMI और RBI Policy पर टिकी बाजार की नजर, पिछले सप्ताह की तेजी के बाद निवेशक रहेंगे सतर्क

Apurva Choudhary 2026-08-02 09:48:30
PMI और RBI Policy पर टिकी बाजार की नजर, पिछले सप्ताह की तेजी के बाद निवेशक रहेंगे सतर्क
पिछले सप्ताह घरेलू शेयर बाजार में जोरदार तेजी दर्ज की गई, लेकिन अब बाजार की अगली दिशा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के PMI आंकड़ों तथा वैश्विक आर्थिक संकेतों से तय होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ये घटनाक्रम निवेशकों की रणनीति और बाजार की चाल दोनों पर असर डाल सकते हैं।
📍 Location: मुंबई, भारत
📰 Date: 2 अगस्त 2026
✍️ Byline: Apurva Choudhary 

RBI की मौद्रिक नीति पर टिकी बाजार की उम्मीदें
पिछले सप्ताह शानदार बढ़त दर्ज करने के बाद भारतीय शेयर बाजार एक नए कारोबारी सप्ताह में प्रवेश कर रहा है, जहां निवेशकों की सबसे बड़ी नजर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक पर रहेगी। तीन दिनों तक चलने वाली इस बैठक के बाद बुधवार को रेपो रेट, अन्य नीतिगत दरों, महंगाई और आर्थिक वृद्धि के ताजा अनुमान जारी किए जाएंगे। इन फैसलों का असर बैंकिंग, ऑटो, रियल एस्टेट और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों पर देखने को मिल सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि RBI ब्याज दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं करता और अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत देता है, तो निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सकता है। वहीं, महंगाई या वैश्विक जोखिमों को लेकर सख्त रुख अपनाए जाने की स्थिति में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

PMI आंकड़े बताएंगे अर्थव्यवस्था की वास्तविक रफ्तार
आने वाले सप्ताह में सोमवार को विनिर्माण (Manufacturing) PMI और बुधवार को सेवा (Services) PMI के आंकड़े भी जारी होंगे। ये दोनों सूचकांक देश की आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण संकेत माने जाते हैं और बताते हैं कि उद्योग तथा सेवा क्षेत्र किस गति से आगे बढ़ रहे हैं।
यदि PMI का स्तर 50 से ऊपर रहता है, तो इसे आर्थिक विस्तार का संकेत माना जाता है। वहीं, कमजोर आंकड़े आने पर बाजार की धारणा प्रभावित हो सकती है। इसलिए निवेशकों की नजर केवल RBI के फैसले पर ही नहीं, बल्कि इन आर्थिक संकेतकों पर भी रहेगी।

वैश्विक घटनाक्रम भी करेंगे बाजार को प्रभावित
घरेलू कारकों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम भी इस सप्ताह बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, डॉलर की चाल और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियों पर भी बाजार की पैनी नजर रहेगी।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक माहौल स्थिर रहता है और विदेशी निवेश का प्रवाह जारी रहता है, तो भारतीय बाजार अपनी सकारात्मक गति बनाए रख सकता है। हालांकि किसी भी बड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम का असर निवेशकों की धारणा पर तुरंत देखने को मिल सकता है।

पिछले सप्ताह बाजार में लौटी जोरदार तेजी
बीते सप्ताह घरेलू शेयर बाजार ने मजबूत वापसी करते हुए निवेशकों का भरोसा फिर से हासिल किया। बीएसई सेंसेक्स 2,034.87 अंक यानी 2.68 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त के साथ 78,094.64 अंक पर बंद हुआ। इससे पहले के सप्ताह में आई बड़ी गिरावट की लगभग पूरी भरपाई हो गई। वहीं, एनएसई का निफ्टी-50 भी 616.15 अंक यानी 2.59 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,383.60 के स्तर पर पहुंच गया।
सिर्फ लार्जकैप शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप-50 में 2.24 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 में 2.46 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों का भरोसा व्यापक बाजार में भी मजबूत बना हुआ है।

इन कंपनियों ने दिखाई सबसे अधिक मजबूती
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 25 के शेयर सप्ताह के दौरान बढ़त के साथ बंद हुए। बेहतर तिमाही नतीजों के बाद बजाज फाइनेंस सबसे बड़ा गेनर रहा, जिसके शेयर में 12.74 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। बजाज फिनसर्व, इंफोसिस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, मारुति सुजुकी, टेक महिंद्रा और टीसीएस जैसे दिग्गज शेयरों में भी उल्लेखनीय बढ़त देखने को मिली।
इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल, टाटा स्टील, टाइटन, एलएंडटी, सन फार्मा, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई और आईसीआईसीआई बैंक सहित कई प्रमुख कंपनियों ने भी बाजार की तेजी को समर्थन दिया। दूसरी ओर, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), अडानी पोर्ट्स, हिंदुस्तान यूनिलीवर, पावर ग्रिड और आईटीसी जैसे कुछ शेयरों में मुनाफावसूली के कारण गिरावट दर्ज की गई।

बाजार के लिए क्या रहेगा सबसे अहम?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताह में निवेशकों को किसी भी एक संकेतक पर निर्भर रहने के बजाय RBI की मौद्रिक नीति, PMI आंकड़ों और वैश्विक घटनाक्रमों को एक साथ देखकर निवेश संबंधी निर्णय लेने चाहिए। यदि आर्थिक संकेतक उम्मीद के अनुरूप रहते हैं और वैश्विक परिस्थितियां स्थिर बनी रहती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार अपनी सकारात्मक गति बनाए रख सकता है।
हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी या वैश्विक बाजारों में अचानक आई कमजोरी घरेलू बाजार पर भी असर डाल सकती है। ऐसे में विशेषज्ञ संतुलित निवेश रणनीति अपनाने और गुणवत्ता वाले शेयरों पर ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं।

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Apurva Choudhary

Apurva Choudhary

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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