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जल्द ही जेब में होंगे प्लास्टिक (पॉलिमर) के नोट, RBI ने शुरू की बड़ी तैयारी

Shahana 2026-07-17 15:40:55
जल्द ही जेब में होंगे प्लास्टिक (पॉलिमर) के नोट, RBI ने शुरू की बड़ी तैयारी

प्लास्टिक (पॉलिमर) के नोट, RBI की नई योजना से क्या बदलेगा?
क्या बदलने वाली है भारतीय करेंसी? RBI ने शुरू किया प्लास्टिक (पॉलिमर) नोट ट्रायल


Location:-  Mumbai, India

Date:-  17 July 2026

Byline:-  Shahana


RBI का बड़ा फैसला, जल्द आएंगे 10 और 20 के प्लास्टिक (पॉलिमर) नोट
भारतीय रिजर्व बैंक ने प्लास्टिक (पॉलिमर) बैंक नोटों की दिशा में अगला कदम बढ़ाते हुए 10 और 20 रुपये के नोटों के ट्रायल की तैयारी शुरू कर दी है। मकसद नोटों की उम्र बढ़ाना, नकली नोटों पर रोक मजबूत करना और मुद्रण लागत कम करना है। सफल परीक्षण के बाद योजना का दायरा बढ़ाया जा सकता है।

प्लास्टिक (पॉलिमर)  नोटों की दिशा में RBI का बड़ा कदम

भारतीय रिजर्व बैंक ने देश की मुद्रा व्यवस्था को अधिक टिकाऊ और सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। केंद्रीय बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने सिक्योरिटी-ग्रेड प्लास्टिक (पॉलिमरसब्सट्रेट के निर्माण के लिए वैश्विक एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जारी किया है। शुरुआत 10 और 20 रुपये के नोटों के सीमित फील्ड ट्रायल से होने की संभावना है।

प्लास्टिक (पॉलिमर)  नोट क्या होते हैं

पॉलिमर नोट सामान्य कागज पर नहीं बल्कि विशेष प्लास्टिक आधारित पॉलिमर सामग्री पर तैयार किए जाते हैं। ये नोट नमी, धूल, गंदगी और रोजमर्रा के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान को अधिक समय तक झेल सकते हैं। इनमें पारदर्शी विंडो, आधुनिक सिक्योरिटी फीचर और बेहतर प्रिंटिंग तकनीक शामिल की जा सकती है, जिससे नकली नोट बनाना कठिन हो जाता है।

अभी केवल ट्रायल, पूरे देश में लागू नहीं

फिलहाल यह राष्ट्रीय स्तर पर बदलाव नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार आरबीआई पहले सीमित संख्या में 10 और 20 रुपये के नोट जारी करेगा। इनका इस्तेमाल विभिन्न क्षेत्रों में किया जाएगा ताकि मौसम, उपयोग और मशीनों के साथ उनकी कार्यक्षमता का आकलन किया जा सके। ट्रायल सफल होने के बाद ही बड़े पैमाने पर उत्पादन पर निर्णय लिया जाएगा। मौजूदा कागजी नोट भी समानांतर रूप से चलते रहेंगे।

RBI ऐसा क्यों करना चाहता है

भारत में सबसे अधिक इस्तेमाल छोटे मूल्यवर्ग के नोटों का होता है। ये जल्दी फटते हैं, गंदे होते हैं और बार-बार बदलने पड़ते हैं। इससे हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये की छपाई और प्रतिस्थापन लागत आती है। रिपोर्टों के अनुसार प्लास्टिक (पॉलिमरनोट पारंपरिक नोटों की तुलना में लगभग ढाई गुना अधिक समय तक चल सकते हैं। इससे लंबे समय में सरकारी खर्च कम होने की उम्मीद है।

नकली नोटों पर कितना असर पड़ेगा

प्लास्टिक (पॉलिमरनोटों में आधुनिक सुरक्षा विशेषताएं जोड़ना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है। पारदर्शी विंडो, माइक्रो प्रिंटिंग और उन्नत सुरक्षा डिज़ाइन नकली नोट तैयार करना अधिक कठिन बना सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि कोई भी सुरक्षा प्रणाली पूरी तरह अभेद्य नहीं होती। समय के साथ जालसाज नई तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए मुद्रा सुरक्षा लगातार विकसित होती रहने वाली प्रक्रिया है।

दुनिया का अनुभव क्या कहता है

ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में सबसे पहले पॉलिमर नोट शुरू किए थे। इसके बाद कनाडा, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, सिंगापुर सहित 60 से अधिक देशों ने इस तकनीक को अपनाया। इन देशों के अनुभव बताते हैं कि प्लास्टिक (पॉलिमर) नोट अधिक टिकाऊ होते हैं और लंबे समय में उनकी लागत कम पड़ सकती है।

भारत पहले भी कर चुका है कोशिश

यह पहली बार नहीं है जब भारत प्लास्टिक (पॉलिमर) नोटों पर विचार कर रहा है। वर्ष 2012 में सरकार ने पांच शहरों में 10 रुपये के पॉलिमर नोटों का फील्ड ट्रायल शुरू करने की योजना बनाई थी। उस समय तकनीकी और परिचालन संबंधी चुनौतियों के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब नई तकनीक और बेहतर उत्पादन क्षमता के साथ इस योजना को फिर आगे बढ़ाया जा रहा है।

क्या पुराने नोट बंद हो जाएंगे

इस समय ऐसा कोई निर्णय नहीं है। उपलब्ध आधिकारिक और विश्वसनीय जानकारी के अनुसार प्लास्टिक (पॉलिमर) नोट आने का अर्थ पुराने कागजी नोटों का तत्काल बंद होना नहीं है। दोनों प्रकार के नोट एक साथ प्रचलन में रह सकते हैं। सोशल मीडिया पर पहले वायरल हुए ऐसे दावों को भी गलत बताया जा चुका है कि सभी कागजी नोट एक निश्चित तारीख से बंद हो जाएंगे।

आगे क्या होगा

वैश्विक निविदा के बाद तकनीकी साझेदारों और निर्माण प्रक्रिया का चयन होगा। इसके बाद सीमित फील्ड ट्रायल शुरू किए जाएंगे। यदि परिणाम संतोषजनक रहे तो 2027 से चरणबद्ध विस्तार की संभावना जताई जा रही है, हालांकि अंतिम निर्णय ट्रायल के नतीजों पर निर्भर करेगा।

 

प्लास्टिक (पॉलिमर) नोटों की पहल भारत की मुद्रा व्यवस्था में संभावित तकनीकी बदलाव का संकेत है। इसका उद्देश्य केवल नया स्वरूप देना नहीं, बल्कि नोटों की आयु बढ़ाना, परिचालन लागत कम करना और सुरक्षा मजबूत करना है। फिर भी अंतिम सफलता ट्रायल, उत्पादन क्षमता, बैंकिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और जनता की स्वीकार्यता पर निर्भर करेगी। इसलिए फिलहाल इसे एक महत्वपूर्ण शुरुआत माना जाना चाहिए, न कि तत्काल राष्ट्रीय परिवर्तन।

 

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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