सिक्किम के रिम्बी में बारिश और भूस्खलन से 28 घरों के 128 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। कर्नाटक में सूखाग्रस्त तालुकों की संख्या 124 हुई।
📍 सिक्किम और कर्नाटक
🗓️ 18 सितंबर 2026
✍️ Wasi siddiqui
देश के अलग-अलग हिस्सों में मानसून की अलग तस्वीर सामने आ रही है। सिक्किम के ग्यालशिंग जिले में लगातार बारिश के बाद रिम्बी क्षेत्र में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने 28 घरों में रहने वाले 128 लोगों को एहतियातन सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया है।
दूसरी तरफ कर्नाटक में बारिश की कमी और सूखे जैसे हालात ने प्रशासन की चिंता बढ़ाई है। राज्य सरकार ने 23 और तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इसके साथ ही खरीफ 2026 के लिए आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त घोषित तालुकों की संख्या 124 हो गई है।
सिक्किम में रिम्बी पर बढ़ा खतरा
पश्चिम सिक्किम के ग्यालशिंग जिले में रिम्बी और आसपास के इलाकों में लगातार बारिश के बाद भूस्खलन की स्थिति गंभीर हुई है। सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक 14 सितंबर की भारी बारिश और बाढ़ के बाद रिम्बी में स्थिति का दोबारा जायजा लिया गया। इसके बाद 28 घरों से 128 लोगों को रिम्बी ग्राम पंचायत केंद्र में स्थानांतरित किया गया।
प्रशासन ने मंडिर प्वाइंट के आसपास के क्षेत्र को खास तौर पर संवेदनशील बताया है। यहां भूस्खलन की गतिविधि सामने आई है। निचले हिस्से में बसे इलाकों को भी आगे भूस्खलन का खतरा बताया गया है। अधिकारियों ने लोगों से बारिश के दौरान सक्रिय भूस्खलन क्षेत्र, नदी और नालों के करीब जाने से बचने की अपील की है।
मलबे ने जलधारा का रास्ता बदला
प्रशासन के मुताबिक भूस्खलन का मलबा निक खोलसा जलधारा के आसपास जमा हो गया है। बारिश के दौरान पानी के साथ मलबा रिम्बी गांव की तरफ बह रहा है। इससे जलधारा के किनारे बने घरों के लिए जोखिम बढ़ गया है।
मलबे के जमा होने से पानी के प्राकृतिक बहाव में भी असर पड़ा है। प्रशासन ने आशंका जताई है कि जमा पानी और मलबा अचानक नीचे की ओर बह सकता है। इसी वजह से संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है।
रिम्बी का आरसीसी पुल भी तेज पानी और मलबे के बहाव में बह गया। मुख्य रिम्बी नदी के बहाव में भी बदलाव देखा गया है और सड़क के किनारे का हिस्सा प्रभावित हुआ है। राज्य सरकार ऊंचाई वाले स्थान पर बेली ब्रिज बनाने की दिशा में काम कर रही है, ताकि संपर्क बहाल किया जा सके।
सड़क संपर्क बहाल करने की कोशिश
रिम्बी में सड़क और पुल विभाग मलबा हटाने तथा संपर्क मार्गों की बहाली का काम कर रहा है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में लोगों की आवाजाही के लिए अस्थायी बांस का पुल बनाने की योजना भी बनाई है।
रिम्बी में मुख्य सड़क पहले भी बुरी तरह प्रभावित हुई थी। सरकारी जानकारी के अनुसार 14 मई 2026 की रात सड़क पूरी तरह बह गई थी। अब ऊंचे स्थान पर बेली ब्रिज के जरिए संपर्क बहाल करने की तैयारी की जा रही है।
सिंगलीताम में भी परिवार सुरक्षित स्थान पर
रिम्बी के साथ सिंगलीताम में भी प्रशासन ने संवेदनशील परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया है। वहां 7 प्रभावित परिवारों के 33 से अधिक लोगों को राहत केंद्र में रखा गया है। इनमें बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं। प्रशासन की ओर से भोजन और जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
सिक्किम प्रशासन ने लोगों को भारी बारिश के दौरान रात में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। जमीन में नई दरार, मिट्टी की हलचल, असामान्य आवाज या पानी के बहाव में अचानक बदलाव दिखने पर स्थानीय प्रशासन को सूचना देने को कहा गया है।
सितंबर में सिक्किम के लिए बारिश की सक्रियता
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने सितंबर के मध्य में उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना दर्ज की थी। 17 सितंबर को जारी विभागीय जानकारी में 19 सितंबर के आसपास अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र में निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना भी बताई गई थी।
इस मौसम व्यवस्था के बीच सिक्किम जैसे पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश का असर जमीन की स्थिरता, सड़क संपर्क और नदी-नालों के बहाव पर पड़ता है। रिम्बी की मौजूदा स्थिति में प्रशासन का मुख्य फोकस लोगों को संवेदनशील इलाकों से हटाने और संपर्क बहाल करने पर है।
कर्नाटक में सूखे का दायरा बढ़ा
सिक्किम की स्थिति से अलग कर्नाटक में बारिश की कमी एक बड़ी चुनौती बन रही है। राज्य सरकार ने 17 सितंबर को 23 और तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया। इससे खरीफ 2026 के दौरान सूखाग्रस्त घोषित तालुकों की कुल संख्या 124 हो गई।
पहले चरण में 27 अगस्त को 101 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया था। इसके बाद कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र ने बाकी क्षेत्रों का वैज्ञानिक आकलन किया। जमीन पर सत्यापन और विस्तृत आकलन के बाद 23 और तालुकों को सूची में शामिल किया गया।
नए घोषित 23 तालुकों में 21 को गंभीर और 2 को मध्यम सूखाग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। पोन्नमपेट और विराजपेट को मध्यम सूखाग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। बाकी 21 तालुक गंभीर श्रेणी में हैं।
फसल नुकसान का सर्वे होगा
कर्नाटक सरकार ने सूखाग्रस्त क्षेत्रों में राहत और प्रतिक्रिया उपायों के लिए संबंधित जिला प्रशासन को अधिकार दिए हैं। कृषि और बागवानी विभागों को फसल नुकसान का सर्वे कराने और राहत आकलन रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार के मुताबिक सूखे की स्थिति का साप्ताहिक आधार पर जायजा लिया जाएगा। सितंबर में सामान्य से कम बारिश का अनुमान रहने की स्थिति में और तालुकों को भी सूखाग्रस्त सूची में शामिल किया जा सकता है, यदि वे निर्धारित मानकों पर खरे उतरते हैं।
अगला आकलन भी जारी
कर्नाटक में सूखे का आकलन अभी पूरा नहीं हुआ है। 17 जिलों के 53 और तालुकों में जमीन पर सत्यापन की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया गया है। इन क्षेत्रों का चयन बारिश, मिट्टी की नमी, फसल की स्थिति और दूसरे सूखा संकेतकों के आधार पर किया गया है।
इससे साफ है कि राज्य की सूखा स्थिति को एक स्थिर आंकड़े के रूप में नहीं देखा जा रहा। नए आकलन के बाद प्रभावित तालुकों की संख्या में बदलाव संभव है। अंतिम राहत भी फसल नुकसान और आधिकारिक आकलन के आधार पर तय होगी।
एक देश, मौसम की दो तस्वीरें
सिक्किम और कर्नाटक की स्थिति मानसून की क्षेत्रीय असमानता को सामने लाती है। एक क्षेत्र में अत्यधिक बारिश से भूस्खलन, बाढ़ और सड़क संपर्क का संकट पैदा हुआ है। दूसरे क्षेत्र में बारिश की कमी ने खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है।
ऐसे हालात में केवल बारिश की कुल मात्रा देखना पर्याप्त नहीं होता। बारिश कब हुई, कितनी देर हुई, किस इलाके में हुई और उसके बाद जमीन तथा जलस्रोतों पर क्या असर पड़ा, ये सभी पहलू अहम होते हैं।
रिम्बी में तत्काल प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा और संपर्क बहाली है। कर्नाटक में प्राथमिकता फसल नुकसान का सही आकलन, प्रभावित किसानों तक राहत पहुंचाना और आगे की बारिश की निगरानी है।
आगे क्या होगा
सिक्किम में प्रशासन संवेदनशील इलाकों की निगरानी जारी रखेगा। बारिश के दौरान लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और नदी-नालों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। बेली ब्रिज और अस्थायी संपर्क व्यवस्था के जरिए प्रभावित इलाके में आवाजाही सुधारने की कोशिश जारी है।
कर्नाटक में सूखे की समीक्षा जारी रहेगी। 53 अतिरिक्त तालुकों का जमीनी सत्यापन और फसल नुकसान का आकलन आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगा। बारिश की स्थिति में सुधार होने या कमी जारी रहने के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय होगी।
मौजूदा तस्वीर में सबसे अहम बात यह है कि मौसम का असर पूरे देश में एक जैसा नहीं है। सिक्किम में अतिरिक्त बारिश जोखिम बढ़ा रही है, जबकि कर्नाटक में बारिश की कमी राहत और कृषि नुकसान के आकलन को प्राथमिकता दे रही है। दोनों स्थितियों में समय पर प्रशासनिक कार्रवाई और स्थानीय स्तर पर सतर्कता अहम बनी हुई है
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।