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संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी: अल नीनो होगा बेहद ताकतवर, 2027 तक बढ़ सकता है मौसम का खतरा

Harish Qureshi 2026-09-03 15:51:55
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी: अल नीनो होगा बेहद ताकतवर, 2027 तक बढ़ सकता है मौसम का खतरा

संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी WMO ने अल नीनो के तेजी से मजबूत होने की चेतावनी दी है। इससे 2026 के अंत और 2027 तक गर्मी, सूखा, बाढ़ और बारिश के पैटर्न बदलने का खतरा बढ़ सकता है।


जिनेवा | 3 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स

By Mohd Haris


अल नीनो को लेकर WMO की बड़ी चेतावनी


विश्व मौसम विज्ञान संगठन यानी WMO ने अल नीनो को लेकर नई और गंभीर चेतावनी जारी की है। संगठन के मुताबिक उष्णकटिबंधीय प्रशांत 

महासागर में अल नीनो मजबूती से स्थापित हो चुका है और आने वाले महीनों में इसकी तीव्रता और बढ़ने की उम्मीद है।


WMO के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक फरवरी 2027 तक अल नीनो के बने रहने की संभावना करीब 100 प्रतिशत है। संगठन ने कहा है कि यह 

घटना इस साल के अंत तक बहुत मजबूत स्तर पर पहुंच सकती है और इसके मौसम संबंधी असर 2027 तक जारी रह सकते हैं।


समुद्र का तापमान बढ़ा, खतरा क्यों बढ़ा


अल नीनो की बुनियाद भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह के असामान्य रूप से गर्म होने से जुड़ी है। WMO के 

मुताबिक 2026 के मध्य से इस क्षेत्र में समुद्री सतह का तापमान लगातार सामान्य से ऊपर रहा है।


मई से जुलाई के दौरान नीनो 3.4 क्षेत्र में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से औसतन 1.5 डिग्री सेल्सियस ऊपर था। जुलाई में यह अंतर करीब 2 

डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। जुलाई के अंत और अगस्त के मध्य के बीच साप्ताहिक आंकड़ों में यह विसंगति करीब 2.2 से 2.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंची।


समुद्र के नीचे भी असामान्य गर्मी दर्ज की गई। WMO के मुताबिक जुलाई और अगस्त की शुरुआत में कुछ हिस्सों में समुद्र के नीचे का तापमान 

सामान्य से 8 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा ऊपर था।


ये संकेत बताते हैं कि मौजूदा अल नीनो केवल सतही स्तर की अस्थायी गर्मी नहीं है। समुद्र और वातावरण दोनों में इसके मजबूत होने के संकेत मौजूद 

हैं।


दुनिया के हर देश पर एक जैसा असर नहीं


WMO ने एक अहम सावधानी भी बताई है। बहुत मजबूत अल नीनो का अर्थ यह नहीं है कि हर देश में एक जैसी आपदा आएगी।


अल नीनो का असर भौगोलिक स्थिति, मौसम और दूसरे जलवायु कारकों पर निर्भर करता है। किसी क्षेत्र में सूखा बढ़ सकता है, जबकि दूसरे इलाके में 

सामान्य से ज्यादा बारिश और बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।


भारतीय महासागर और अटलांटिक महासागर की परिस्थितियां भी अल नीनो के पारंपरिक असर को बदल सकती हैं। इसलिए किसी एक वैश्विक पैटर्न 


को हर देश पर सीधे लागू करना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा।


भारत और दक्षिण एशिया के लिए क्या संकेत


WMO के सितंबर से नवंबर 2026 के पूर्वानुमान में दुनिया के बड़े हिस्से में सामान्य से ज्यादा तापमान की संभावना दिखाई गई है। दक्षिण एशिया के 

कुछ हिस्सों में अल नीनो के कारण बारिश के पैटर्न में बदलाव का जोखिम भी बढ़ता है।


भारत के लिए यह मुद्दा खास महत्व रखता है क्योंकि मानसून, कृषि, जल उपलब्धता और खाद्य उत्पादन एक-दूसरे से जुड़े हैं।


31 अगस्त की Reuters रिपोर्ट के मुताबिक भारत मौसम विज्ञान विभाग ने सितंबर में सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया था। अगस्त में भारत 

में बारिश सामान्य से 16 प्रतिशत कम रही थी। रिपोर्ट में इस स्थिति के पीछे मजबूत होते अल नीनो को भी एक कारक बताया गया।


हालांकि अल नीनो अकेले भारत के पूरे मानसूनी प्रदर्शन की व्याख्या नहीं करता। समुद्री परिस्थितियां, भारतीय महासागर की स्थिति और दूसरे मौसमी 

सिस्टम भी भूमिका निभाते हैं।


कई क्षेत्रों में सूखे का खतरा


WMO के आकलन के अनुसार मजबूत अल नीनो से मध्य अमेरिका, कैरेबियन, दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों, दक्षिण एशिया, इंडोनेशिया और 

दक्षिण-पूर्व एशिया में सामान्य से कम बारिश की परिस्थितियां बनने का खतरा बढ़ सकता है।


इसका सीधा असर कृषि और जल संसाधनों पर पड़ सकता है। बारिश में कमी लंबे समय तक रहती है तो सिंचाई की मांग बढ़ सकती है और मिट्टी की 

नमी घट सकती है।


कृषि के साथ ऊर्जा क्षेत्र भी प्रभावित हो सकता है। जलविद्युत उत्पादन पर बारिश और जलाशयों की स्थिति का असर पड़ता है। इसी तरह शहरी 

इलाकों में पानी की मांग बढ़ने से स्थानीय जल प्रबंधन पर दबाव बढ़ सकता है।


कहीं सूखा, कहीं बाढ़


अल नीनो की सबसे अहम विशेषता इसका असमान असर है।


पूर्वी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इसके उलट सामान्य से ज्यादा बारिश की परिस्थितियां बन सकती हैं। WMO ने सितंबर से दिसंबर की बारिश के मौसम के दौरान पूर्वी अफ्रीका में ज्यादा बारिश और बाढ़ के जोखिम की ओर भी संकेत किया है।


भारतीय महासागर में संभावित पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल यानी IOD भी कुछ क्षेत्रों में अल नीनो के प्रभाव को मजबूत या बदल सकता है। 


WMO के अनुसार सितंबर-अक्टूबर-नवंबर 2026 के लिए पॉजिटिव IOD का मौसमी औसत करीब 0.9 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।


इसलिए आने वाले महीनों में वैश्विक मौसम का परिदृश्य एकसमान नहीं रहेगा।


तापमान पर भी पड़ेगा बड़ा असर


अल नीनो का एक व्यापक असर वैश्विक तापमान पर पड़ता है। WMO के मुताबिक मजबूत अल नीनो आम तौर पर वैश्विक तापमान को और ऊपर ले 

जाता है।


मौजूदा घटना ऐसे समय में मजबूत हो रही है जब दीर्घकालिक जलवायु परिवर्तन पहले से ही दुनिया के तापमान और चरम मौसम की स्थितियों को 

प्रभावित कर रहा है।


WMO ने चेताया है कि अल नीनो और जलवायु परिवर्तन का संयुक्त प्रभाव कुछ क्षेत्रों में गर्मी, सूखे और अत्यधिक बारिश के जोखिम को और जटिल 

बना सकता है।


सरकारों के लिए तैयारी का समय


WMO ने कहा है कि राष्ट्रीय मौसम और जल विज्ञान सेवाओं के साथ मिलकर शुरुआती चेतावनी और तैयारी को तेज किया जा रहा है।


संगठन का जोर इस बात पर है कि मौसम की जानकारी का इस्तेमाल आपदा आने के बाद राहत पहुंचाने के बजाय पहले से तैयारी करने में किया 

जाए।


कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, जल प्रबंधन और मानवीय सहायता जैसे क्षेत्रों में पहले से योजना बनाने से जोखिम कम किया जा सकता है। WMO ने इसे एक 

असाधारण घटना के लिए असाधारण तैयारी की जरूरत के रूप में रेखांकित किया है।


दक्षिण एशिया में तैयारी क्यों जरूरी


दक्षिण एशिया की बड़ी आबादी मौसम आधारित कृषि और मानसूनी बारिश पर निर्भर है। ऐसे में बारिश के पैटर्न में बदलाव का असर खेती से लेकर 

ग्रामीण आय और खाद्य आपूर्ति तक पहुंच सकता है।


भारत में सितंबर की बारिश रबी फसलों के लिए मिट्टी की नमी और खरीफ फसलों के अंतिम विकास चरण के लिहाज से महत्वपूर्ण होती है। कम 

बारिश की स्थिति में कुछ इलाकों में जल संकट और कृषि दबाव बढ़ सकता है।


लेकिन यह कहना जल्दबाजी होगी कि मजबूत अल नीनो सीधे तौर पर भारत में व्यापक सूखा पैदा करेगा। क्षेत्रीय पूर्वानुमान में दूसरे जलवायु कारकों 

को भी शामिल करना जरूरी है।


क्या यह अब तक का सबसे ताकतवर अल नीनो है


कुछ रिपोर्टों में मौजूदा घटना को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने की संभावना के रूप में पेश किया गया है। Reuters ने 3 सितंबर को WMO के हवाले से 

लिखा कि यह घटना आगे और मजबूत हो सकती है और संभावित रूप से अब तक की सबसे शक्तिशाली घटनाओं में शामिल हो सकती है।


लेकिन WMO की आधिकारिक 3 सितंबर की अपडेट का मुख्य निष्कर्ष यह है कि अल नीनो बहुत मजबूत होने की दिशा में बढ़ रहा है। इसलिए इसे 

अभी निश्चित रूप से “इतिहास का सबसे ताकतवर अल नीनो” घोषित करना उचित नहीं होगा।


यही अंतर वैज्ञानिक रिपोर्टिंग में महत्वपूर्ण है। पूर्वानुमान और स्थापित तथ्य एक ही चीज नहीं हैं।


2027 तक क्यों बना रहेगा असर


WMO के मॉडल बताते हैं कि अल नीनो के सितंबर-नवंबर 2026 और दिसंबर 2026-फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना करीब 100 

प्रतिशत है।


इसका अर्थ यह नहीं है कि हर देश में पूरे समय असामान्य मौसम रहेगा। इसका अर्थ यह है कि वैश्विक जलवायु प्रणाली पर अल नीनो का प्रभाव आने 

वाले महीनों में महत्वपूर्ण बना रहने की मजबूत संभावना है।


क्षेत्रीय प्रभाव अलग-अलग समय पर सामने आ सकते हैं। कुछ जगहों पर 2026 के अंतिम महीनों में असर ज्यादा दिख सकता है, जबकि कुछ क्षेत्रों में 

इसके प्रभाव 2027 तक जारी रह सकते हैं।


असली चुनौती मौसम से ज्यादा तैयारी की


अल नीनो अपने आप में कोई आपदा नहीं है। खतरा तब बढ़ता है जब इसका असर कमजोर बुनियादी ढांचे, जल संकट, कृषि निर्भरता और पहले से 

मौजूद मौसम संबंधी जोखिमों के साथ जुड़ जाता है।


इसी वजह से WMO की चेतावनी का मुख्य संदेश केवल मौसम का पूर्वानुमान नहीं, बल्कि तैयारी है।


सरकारों के लिए चुनौती यह है कि मौसम संबंधी चेतावनी को समय पर स्थानीय कार्रवाई में बदला जाए। किसानों को समय रहते सलाह मिले, जलाशयों 

और पानी की उपलब्धता की समीक्षा हो, गर्मी से बचाव की तैयारी बढ़े और बाढ़ या सूखे के जोखिम वाले क्षेत्रों में शुरुआती कदम उठाए जाएं।


आगे क्या होगा


WMO आने वाले महीनों में अल नीनो और दूसरे जलवायु संकेतकों की निगरानी जारी रखेगा। स्थानीय परिस्थितियों के लिए राष्ट्रीय मौसम एजेंसियों और क्षेत्रीय जलवायु केंद्रों के पूर्वानुमान ज्यादा उपयोगी रहेंगे।


मौजूदा वैज्ञानिक तस्वीर में सबसे स्पष्ट तथ्य यह है कि अल नीनो मजबूत हो रहा है और इसके फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना बेहद ऊंची 

है।


इसका मतलब दुनिया के लिए एक समान आपदा नहीं है। इसका मतलब बढ़ा हुआ मौसम जोखिम है, जिसमें कुछ क्षेत्रों में गर्मी और सूखा, जबकि दूसरे 


क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ की आशंका बढ़ सकती है।


अब नीति-निर्माताओं के सामने सबसे अहम सवाल यह नहीं है कि अल नीनो कितना सुर्खियां बनाएगा। सवाल यह है कि उपलब्ध पूर्वानुमान को कितनी जल्दी स्थानीय तैयारी और जन-सुरक्षा में बदला जाता है।

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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