पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर 28 जून से अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार रात केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में अपना अनशन समाप्त कर दिया। सरकार के साथ संवाद के बाद आंदोलन में अहम मोड़ आया, हालांकि सरकार की ओर से दिए गए अंतिम लिखित आश्वासन का पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।
📍 स्थान: Gurugram
📰 तारीख: 23 July 2026
✍️ Apurva Choudhary
सरकार से बातचीत के बाद खत्म हुआ अनशन
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार रात गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में अपना 25 दिनों से जारी अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर दिया। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में जूस पीकर अनशन तोड़ा।
वांगचुक 28 जून से पेपर लीक के आरोपों, परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर अनशन पर थे। बिगड़ती तबीयत के बाद उन्हें पहले सफदरजंग अस्पताल और बाद में उनकी इच्छा के अनुरूप मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
छात्रों पर कार्रवाई नहीं करने की थी प्रमुख मांग
अनशन समाप्त करने से पहले वांगचुक ने सरकार से मांग की थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई या एफआईआर नहीं की जाएगी। उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय मंत्रियों को खुला पत्र भी लिखा था।
हालांकि, सरकार की ओर से उन्हें अंतिम रूप से क्या आश्वासन दिया गया, इसका आधिकारिक और विस्तृत विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
सरकार और आंदोलन के बीच संवाद
कुछ दिन पहले जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने अस्पताल जाकर वांगचुक से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने उनसे स्वास्थ्य का ध्यान रखने और अनशन समाप्त करने की अपील की थी। सरकार का कहना था कि पेपर लीक से जुड़े मामलों में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
आंदोलन का आगे का रास्ता
अनशन समाप्त होने के बाद अब ध्यान इस बात पर रहेगा कि सरकार छात्रों से जुड़े मुद्दों और परीक्षा सुधारों पर क्या ठोस कदम उठाती है। यदि मांगों पर ठोस प्रगति होती है तो लंबे समय से चल रहा यह विवाद शांत हो सकता है, जबकि ठोस निर्णय न होने की स्थिति में छात्र संगठनों की आगे की रणनीति महत्वपूर्ण रहेगी।
सोनम वांगचुक अनशन का समाप्त होना इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण पड़ाव है। हालांकि आंदोलन की मूल मांगें अभी भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। आने वाले दिनों में सरकार के आधिकारिक फैसले और छात्रों की प्रतिक्रिया इस मामले की अगली दिशा तय करेंगे।