रविवार, 18 October 2026
GOLD ₹0 ▼ 0%
SENSEX 0 ▼ 0%
BITCOIN $0 ▼ 0%
38°C मुजफ्फरनगर
🔔 Google पर Shah Times की खबरें पाने के लिए क्लिक करें
EDITION:
BREAKING
Advertisement Advertisement
Politics

सोनम वांगचुक भूख हड़ताल: अस्पताल में दवा से इनकार, सेहत पर बढ़ी चिंता

Shahana • 2026-07-18 21:17:53
सोनम वांगचुक भूख हड़ताल: अस्पताल में दवा से इनकार, सेहत पर बढ़ी चिंता

सोनम वांगचुक भूख हड़ताल का 21वां दिन, अस्पताल में दवा लेने से इनकार

भूख हड़ताल के बीच सोनम वांगचुक अस्पताल पहुंचे, मेडिकल रिपोर्ट पर उठा विवाद


Location:-  New Delhi, India

Date:-  18 July 2026

Byline:-  Shahana


सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल और डॉक्टरों के दावों में मतभेद
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक को पुलिस सफदरजंग अस्पताल ले गई। अस्पताल ने डिहाइड्रेशन और पोटैशियम की कमी की पुष्टि की, जबकि उनके निजी डॉक्टरों ने मेडिकल प्रक्रिया पर सवाल उठाए। यह मामला अब स्वास्थ्य, विरोध प्रदर्शन और सरकारी कार्रवाई, तीनों के केंद्र में आ गया है।

सोनम वांगचुक भूख हड़ताल ने स्वास्थ्य और राजनीति दोनों पर बढ़ाई बहस

दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 दिनों से जारी सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शनिवार को नए मोड़ पर पहुंच गई। सुबह पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल लेकर गई, जहां अस्पताल प्रशासन ने बताया कि उन्हें डिहाइड्रेशन है और शरीर में पोटैशियम का स्तर सामान्य से कम पाया गया। अस्पताल के अनुसार वांगचुक ने दवा लेने से इनकार किया।

दूसरी ओर, वांगचुक के निजी डॉक्टर और परिवार ने अस्पताल की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मेडिकल टीम को मरीज तक पहुंचने नहीं दिया गया और जिन दवाओं की जरूरत थी, वे जंतर-मंतर पर भी उपलब्ध कराई जा सकती थीं। इन परस्पर विरोधी दावों ने पूरे घटनाक्रम को विवाद का विषय बना दिया है।

अस्पताल और निजी डॉक्टरों के दावे क्यों अलग हैं

सफदरजंग अस्पताल के मेडिकल बुलेटिन में कहा गया कि जांच के दौरान शरीर में पोटैशियम का स्तर कम मिला और यूरिन कीटोन का स्तर बढ़ा हुआ था। लंबे समय तक उपवास करने वाले व्यक्ति में ऐसे संकेत गंभीर माने जाते हैं क्योंकि इससे हृदय, मांसपेशियों और अन्य अंगों की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। हालांकि, वांगचुक के निजी चिकित्सक डॉ. नितिन दीघे ने दावा किया कि अस्पताल में गृह मंत्रालय के अधिकारी की मौजूदगी के कारण उनकी मेडिकल टीम को मरीज से मिलने की अनुमति नहीं मिली। उन्होंने यह भी कहा कि स्वतंत्र चिकित्सकीय मूल्यांकन के बिना अस्पताल की रिपोर्ट पर पूरी तरह भरोसा करना मुश्किल है। इन दोनों पक्षों के बीच मौजूद अंतर अभी तक आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं हुआ है।

भूख हड़ताल का उद्देश्य क्या है

सोनम वांगचुक इस समय शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर अनशन पर हैं। उनकी प्रमुख मांग पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है। समर्थकों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की जिम्मेदारी है। उनका दावा है कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि व्यापक शिक्षा सुधार के लिए किया जा रहा है।

सरकार की ओर से अब तक इस मांग पर कोई औपचारिक सहमति सामने नहीं आई है।

लगातार गिरती सेहत क्यों बनी चिंता

लंबे समय तक केवल सीमित तरल पदार्थों के सहारे रहने वाले व्यक्ति में शरीर के इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, डिहाइड्रेशन और अंगों पर दबाव बढ़ने का जोखिम रहता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार पोटैशियम का स्तर कम होना गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है।

परिवार का कहना है कि वांगचुक का वजन लगभग 9.5 किलोग्राम कम हो चुका है। यदि यह दावा सही है तो यह लंबे उपवास के दौरान शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों को दर्शाता है। हालांकि, स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड द्वारा सार्वजनिक रूप से सत्यापित विस्तृत रिपोर्ट अभी उपलब्ध नहीं है।

पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल

शनिवार सुबह पुलिस द्वारा वांगचुक को अस्पताल ले जाने की कार्रवाई भी चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रशासन का तर्क है कि किसी भी व्यक्ति की जान बचाना राज्य की जिम्मेदारी होती है और स्वास्थ्य बिगड़ने की स्थिति में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना आवश्यक है।

दूसरी ओर, समर्थकों का कहना है कि यदि मरीज उपचार के लिए वैकल्पिक व्यवस्था चाहता था, तो पहले उसकी मेडिकल टीम और परिवार से समन्वय किया जाना चाहिए था। यहीं से बहस व्यक्तिगत अधिकार और राज्य की जिम्मेदारी के बीच संतुलन पर पहुंच जाती है।

लोकतांत्रिक विरोध और स्वास्थ्य सुरक्षा का संतुलन

भारत में भूख हड़ताल विरोध प्रदर्शन का एक पुराना लोकतांत्रिक माध्यम रही है। महात्मा गांधी से लेकर कई सामाजिक आंदोलनों तक इसका इस्तेमाल नैतिक दबाव बनाने के लिए किया गया है। लेकिन आधुनिक चिकित्सा विज्ञान यह भी कहता है कि लंबे उपवास के दौरान जान का जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे में प्रशासन अक्सर हस्तक्षेप करता है ताकि किसी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। यही कारण है कि ऐसे मामलों में राजनीतिक बहस के साथ मेडिकल एथिक्स भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो जाती है।

क्या मेडिकल रिपोर्ट ही अंतिम सच है

किसी भी स्वास्थ्य विवाद में केवल एक पक्ष के बयान से निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जाता। अस्पताल का मेडिकल बुलेटिन एक आधिकारिक दस्तावेज होता है, लेकिन यदि निजी डॉक्टरों को मरीज तक पहुंच नहीं मिली हो, जैसा कि दावा किया गया है, तो पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इस पूरे मामले में सबसे उपयुक्त समाधान स्वतंत्र चिकित्सा मूल्यांकन और सभी रिपोर्टों को सार्वजनिक करने का हो सकता है। इससे भ्रम कम होगा और सार्वजनिक विश्वास मजबूत होगा।

आगे क्या हो सकता है

यदि सोनम वांगचुक उपचार स्वीकार नहीं करते और भूख हड़ताल जारी रखते हैं, तो उनकी स्वास्थ्य स्थिति और गंभीर हो सकती है।

दूसरी ओर, यदि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत शुरू होती है, तो तनाव कम होने की संभावना बन सकती है।

फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम दिखाई दे रहे हैं और पूरे घटनाक्रम पर देशभर की नजर बनी हुई है।

 

सोनम वांगचुक भूख हड़ताल अब केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं रह गई है। यह स्वास्थ्य, लोकतांत्रिक अधिकार, सरकारी जिम्मेदारी और सार्वजनिक पारदर्शिता, चारों सवालों को एक साथ सामने ला रही है। अस्पताल और निजी डॉक्टरों के अलग-अलग दावों के बीच सबसे बड़ी जरूरत तथ्यों की स्पष्टता और निष्पक्ष मेडिकल पारदर्शिता की है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि यह मामला केवल स्वास्थ्य संकट बनकर रह जाता है या शिक्षा सुधार और लोकतांत्रिक संवाद की बड़ी बहस का हिस्सा बनता है।

 

ADVERTISEMENT
Shahana

Shahana

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

BREAKING NEWS

संबंधित खबरें

अभिजीत दीपके पर स्याही फेंकी गई, बरखा त्रेहन पर आरोप से बढ़ा विवाद

2026-07-18 20:50:23

बारिश में भी जारी कॉकरोच जनता पार्टी का धरना, जंतर-मंतर पर कई दिनों से हो रहा प्रदर्शन

2026-07-10 10:38:01

INDIA ब्लॉक की दिल्ली बैठक में मतभेद के संकेत, उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस की रणनीति पर उठाए सवाल

2026-09-30 15:42:54

INDIA गठबंधन की दिल्ली बैठक में SIR पर रणनीति, CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पर मंथन

2026-09-30 12:12:35

पीएम मोदी से मुलाकात करने दिल्ली पहुंचे सीएम योगी, यूपी के अहम मुद्दों पर चर्चा की संभावना

2026-09-26 13:48:43

राहुल गांधी आज शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस, इंदिरा भवन में मीडिया से होंगे रूबरू

2026-09-24 13:21:44

कांग्रेस मुख्यालय के बाहर बिहार कांग्रेस नेताओं का प्रदर्शन, राहुल गांधी से मुलाकात और नेतृत्व बदलाव की मांग

2026-09-08 12:07:32

राहुल गांधी के धरने के बाद दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR

2026-08-21 20:05:26

TRENDING

ताज़ा ख़बरें
BREAKING NEWS
ADVERTISEMENT

Your Ad Here
TRENDING
आज का ई-पेपर
मुजफ्फरनगर (12 पेज)
बिजनौर (10 पेज)
सहारनपुर (11 पेज)
मुरादाबाद (14 पेज)
Home Video Epaper Reel Menu
Chat With Us
SHAH TIMES
ख़बरें छुपाता नहीं, छापता है
🏠 होम ⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ 📰 ताज़ा खबरें 🇮🇳 देश 🌍 दुनिया 🏛 राजनीति 🚔 क्राइम 📈 बिजनेस 🏏 स्पोर्ट्स 🎓 शिक्षा ❤️ स्वास्थ्य 📰 ई-पेपर