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सोनम वांगचुक का बड़ा दावा, "20% शरीर खत्म", NEET आंदोलन तेज

Shahana 2026-07-18 07:52:14
सोनम वांगचुक का बड़ा दावा, "20% शरीर खत्म", NEET आंदोलन तेज

सोनम वांगचुक बोले, "20% शरीर चला गया", NEET आंदोलन निर्णायक मोड़ पर

NEET अनशन के 20वें दिन बिगड़ी तबीयत, सोनम वांगचुक का भावुक संदेश


Location:-  New Delhi, India

Date:-  18 July 2026

Byline:-  Shahana


जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक की चेतावनी, "मैं जिंदा हूं, लेकिन..."

दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ जारी अनशन के दौरान सोनम वांगचुक ने कहा कि उनका लगभग 20 प्रतिशत वजन कम हो गया है। उनका वीडियो आंदोलन की गंभीरता और परीक्षा प्रणाली पर उठ रहे सवालों को फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ले आया।

अनशन के बीच भावुक संदेश ने बढ़ाई चिंता

दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा में कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ जारी आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है। शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अनशन के 20वें दिन एक वीडियो संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि वह अभी जीवित हैं, लेकिन उनके शरीर का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा यानी वजन कम हो चुका है। उनका यह बयान सोशल मीडिया और राष्ट्रीय मीडिया में तेजी से चर्चा का विषय बन गया। वीडियो में वांगचुक ने अपने समर्थकों का आभार जताया और कहा कि आंदोलन किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का सवाल है। उन्होंने अपील की कि इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से नहीं बल्कि छात्रों के भविष्य के संदर्भ में देखा जाए।

NEET परीक्षा पर विवाद क्यों बना हुआ है

NEET देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है। हर वर्ष लाखों छात्र इसमें शामिल होते हैं और इसी परीक्षा के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में दाखिला मिलता है। पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक, परीक्षा प्रबंधन, पारदर्शिता और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर कई बार सवाल उठते रहे हैं।

इस बार भी कुछ छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं। इन्हीं आरोपों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन और अनशन चल रहा है।

हालांकि, संबंधित संस्थानों की ओर से समय-समय पर इन आरोपों पर अलग-अलग स्पष्टीकरण दिए गए हैं। जहां आवश्यक हुआ, वहां जांच और कानूनी प्रक्रिया भी शुरू की गई है। इसलिए सभी आरोपों को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा और उनकी पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों या न्यायिक प्रक्रिया से ही होगी।

स्वास्थ्य पर बढ़ता असर

लगातार 20 दिन तक अनशन करना किसी भी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। वांगचुक ने अपने वीडियो में कहा कि उनके शरीर का लगभग 20 प्रतिशत वजन कम हो गया है। यह उनका स्वयं का दावा है और इसकी स्वतंत्र चिकित्सकीय पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

फिर भी लंबे उपवास के दौरान शरीर में ऊर्जा की कमी, मांसपेशियों का क्षरण, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और अन्य चिकित्सकीय जोखिम बढ़ जाते हैं। ऐसे मामलों में डॉक्टर नियमित निगरानी की सलाह देते हैं।

उनका वीडियो इस बात का संकेत भी देता है कि आंदोलन अब केवल राजनीतिक या सामाजिक बहस नहीं रहा, बल्कि स्वास्थ्य और मानवीय चिंता का विषय भी बन गया है।

आंदोलन का संदेश क्या है

सोनम वांगचुक लंबे समय से शिक्षा, पर्यावरण और नीति सुधारों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। इस बार उनका फोकस परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही पर है। उनका कहना है कि यदि लाखों छात्रों का भविष्य एक परीक्षा पर निर्भर करता है, तो उस परीक्षा की क्रेडिबिलिटी पर कोई भी सवाल पूरे शिक्षा तंत्र के लिए चुनौती बन जाता है। इसी कारण वह आंदोलन को व्यापक जनहित का विषय बता रहे हैं।

सरकार और संस्थानों का पक्ष भी महत्वपूर्ण

लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी आंदोलन का मूल्य तभी बढ़ता है जब उसके साथ तथ्यों की निष्पक्ष जांच भी हो। सरकार, परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियां और न्यायिक संस्थान लगातार इस तरह के मामलों पर अपना पक्ष रखते रहे हैं।

जहां एक ओर आंदोलनकारी निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर संस्थानों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को लगातार मजबूत बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

सोशल मीडिया की भूमिका

वांगचुक का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। बड़ी संख्या में लोगों ने उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई और आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया। दूसरी ओर कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि किसी भी बड़े आरोप का मूल्यांकन भावनाओं के बजाय दस्तावेजी साक्ष्यों और आधिकारिक जांच के आधार पर होना चाहिए। यही लोकतांत्रिक विमर्श की बुनियादी शर्त भी है।

क्या केवल अनशन से समाधान निकलेगा

भारतीय लोकतंत्र में अनशन और शांतिपूर्ण विरोध का लंबा इतिहास रहा है। कई आंदोलनों ने नीति निर्माण को प्रभावित किया है। लेकिन केवल विरोध प्रदर्शन किसी भी विवाद का अंतिम समाधान नहीं होता। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा सुधार के लिए मजबूत डिजिटल सिक्योरिटी, पारदर्शी ऑडिट, स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था, समयबद्ध जांच और जवाबदेही की स्पष्ट प्रणाली अधिक प्रभावी साबित हो सकती है।

आगे क्या

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आंदोलन कितने समय तक जारी रहेगा और संबंधित संस्थान इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। यदि स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता है तो चिकित्सकीय हस्तक्षेप की आवश्यकता भी बढ़ सकती है। साथ ही, यदि जांच एजेंसियां या सरकार कोई नया फैसला या आधिकारिक बयान जारी करती हैं तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है। फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर देशभर के छात्र, अभिभावक और शिक्षा विशेषज्ञ नजर बनाए हुए हैं।

 

सोनम वांगचुक का वीडियो केवल उनके स्वास्थ्य का संदेश नहीं है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था पर भरोसे की बहस को फिर राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाता है। हालांकि उनके द्वारा बताए गए स्वास्थ्य संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। दूसरी ओर, NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े आरोपों पर भी विभिन्न स्तरों पर जांच और आधिकारिक प्रक्रिया जारी है। इसलिए इस पूरे विवाद का अंतिम आकलन तथ्यों, पारदर्शी जांच और संस्थागत जवाबदेही के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

 

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Shahana

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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