टाटा संस में बड़ा बदलाव, चंद्रशेखरन ने पद छोड़ने का ऐलान किया
चंद्रशेखरन का फैसला, फरवरी 2027 में खत्म होगा टाटा संस नेतृत्व
टाटा संस की एजीएम से पहले चंद्रशेखरन ने किया बड़ा ऐलान
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद पद छोड़ने का ऐलान किया है। उनका कार्यकाल 20 फरवरी 2027 तक है। यह फैसला 18 अगस्त की एजीएम से पहले आया है, जहां उनके डायरेक्टर पद के पुनर्नियोजन का मुद्दा एजेंडे में था।
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने बुधवार को घोषणा की कि वह अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद कंपनी के चेयरमैन पद पर आगे जारी नहीं रहेंगे। उनका वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होना है। यह ऐलान टाटा संस की 18 अगस्त को होने वाली वार्षिक आम बैठक यानी एजीएम से कुछ दिन पहले हुआ है।
इस घटनाक्रम को टाटा समूह के लिए अहम नेतृत्व परिवर्तन माना जा रहा है। चंद्रशेखरन ने बोर्ड से अपने उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा है। अभी उनके उत्तराधिकारी के नाम की घोषणा नहीं हुई है।
यहां एक अहम तथ्य समझना जरूरी है। चंद्रशेखरन का ऐलान तत्काल प्रभाव से चेयरमैन पद छोड़ने का नहीं है।
उन्होंने कहा है कि वह अपने मौजूदा कार्यकाल के अंत तक जिम्मेदारी संभालेंगे। यानी 20 फरवरी 2027 तक वह टाटा संस के चेयरमैन बने रहेंगे, जब तक इससे पहले कोई अलग औपचारिक व्यवस्था नहीं होती। रॉयटर्स ने भी सूत्रों के हवाले से बताया है कि उन्होंने इस्तीफा सौंपा है, लेकिन मौजूदा कार्यकाल पूरा करने तक पद पर बने रहेंगे।
इसलिए इसे तत्काल चेयरमैन पद से हटना कहना सही नहीं होगा। यह मौजूदा कार्यकाल के बाद आगे कार्यकाल नहीं लेने का फैसला है।
टाटा संस की एजीएम 18 अगस्त को होनी है। बैठक के एजेंडे में चंद्रशेखरन का डायरेक्टर के रूप में पुनर्नियोजन महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल था।
कंपनी के नियमों के तहत उनका डायरेक्टर पद जारी रहना चेयरमैन के रूप में फरवरी 2027 तक बने रहने से जुड़ा हुआ था। पहले यह प्रक्रिया सामान्य कॉरपोरेट रिन्यूअल मानी जा रही थी, लेकिन पिछले कुछ महीनों में टाटा ट्रस्ट्स के भीतर गवर्नेंस से जुड़े मतभेदों के कारण मामला ज्यादा संवेदनशील हो गया था।
चंद्रशेखरन के अब आगे कार्यकाल नहीं लेने के ऐलान से एजीएम का नेतृत्व संबंधी संदर्भ बदल गया है।
चंद्रशेखरन के बयान के मुताबिक, उनके कार्यकाल को आगे बढ़ाने के प्रस्ताव को बोर्ड के सभी सदस्यों का सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने आगे कार्यकाल की मांग नहीं करने का फैसला किया और बोर्ड से उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा।
यह बिंदु इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे साफ होता है कि फैसला केवल सामान्य रिटायरमेंट टाइमलाइन का मामला नहीं था। हालांकि, किसी एक बोर्ड सदस्य की पहचान या मतभेद की पूरी वजह को लेकर सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध जानकारी सीमित है।
इसलिए इसे किसी खास व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत टकराव का नतीजा बताना अभी उचित नहीं होगा।
टाटा संस टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी है और टाटा ट्रस्ट्स इसकी सबसे बड़ी शेयरधारक हैं। विभिन्न ट्रस्ट्स के जरिए टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है।
यही वजह है कि टाटा ट्रस्ट्स की गवर्नेंस और बोर्ड स्तर के फैसलों का टाटा संस के नेतृत्व पर सीधा असर पड़ता है।
पिछले महीनों में चंद्रशेखरन के कार्यकाल को आगे बढ़ाने को लेकर अंदरूनी मतभेदों की रिपोर्ट सामने आती रही थीं। जुलाई में एजीएम की तैयारी के दौरान भी उनकी डायरेक्टर के तौर पर पुनर्नियुक्ति को लेकर असामान्य स्तर की निगरानी देखी गई थी।
एन चंद्रशेखरन ने टाटा समूह में लंबा करियर बनाया है। वह 2017 में टाटा संस के चेयरमैन बने थे। इससे पहले वह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुके थे।
उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने डिजिटल, टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एविएशन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में कई बड़े निवेश और विस्तार किए।
टाटा समूह की हालिया रणनीति में एयर इंडिया, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, टाटा डिजिटल और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स जैसे नए कारोबारों को महत्वपूर्ण स्थान मिला है।
हालांकि इन नए कारोबारों में निवेश के साथ कुछ कंपनियों के घाटे और पूंजी आवंटन को लेकर भी सवाल उठे हैं।
चंद्रशेखरन के जाने की घोषणा ऐसे समय हुई है जब टाटा समूह की कई बड़ी कंपनियां अलग-अलग कारोबारी चुनौतियों से जूझ रही हैं।
टीसीएस पर एआई के कारण आईटी सर्विसेज बिजनेस मॉडल में बदलाव का दबाव है। एयर इंडिया को भी वित्तीय और परिचालन स्तर पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट ने चंद्रशेखरन के जाने के समय टाटा समूह से जुड़े कई दबावों का उल्लेख किया है, जिनमें एयर इंडिया क्रैश के बाद की रेगुलेटरी जांच, टीसीएस पर प्राइसिंग दबाव और जगुआर लैंड रोवर पर साइबर अटैक का असर शामिल है।
इसलिए नया चेयरमैन केवल उत्तराधिकारी नहीं होगा। उसे टाटा समूह की मौजूदा स्ट्रैटेजी और नए निवेशों की दिशा को भी संभालना होगा।
चंद्रशेखरन के फैसले के बाद टाटा समूह की कई सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई।
रिपोर्ट के मुताबिक टीसीएस के शेयर करीब 4.2 फीसदी तक गिरे, जबकि टाटा मोटर्स में करीब 2.5 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। टाइटन और टाटा स्टील में भी लगभग 2 फीसदी की कमजोरी रही।
इक्विटी मार्केट की शुरुआती प्रतिक्रिया इस बात का संकेत देती है कि निवेशकों ने नेतृत्व परिवर्तन को अनिश्चितता के नजरिए से देखा है।
हालांकि शेयर बाजार की एक दिन की चाल को टाटा समूह की दीर्घकालिक कारोबारी दिशा का अंतिम संकेत मानना उचित नहीं होगा।
चंद्रशेखरन ने बोर्ड से अपने उत्तराधिकारी पर फैसला करने को कहा है। इससे अब टाटा संस के सामने सबसे अहम सवाल नए चेयरमैन का चयन है।
टाटा समूह के आकार और विविधता को देखते हुए नए चेयरमैन का चयन केवल एक व्यक्ति की नियुक्ति नहीं होगा। यह समूह की अगले कई वर्षों की स्ट्रैटेजी को प्रभावित कर सकता है।
नए नेतृत्व को एक तरफ पारंपरिक टाटा कारोबारों की मजबूती बनाए रखनी होगी, वहीं दूसरी तरफ इलेक्ट्रॉनिक्स, डिजिटल, एविएशन और नई ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में किए जा रहे बड़े निवेशों को भी दिशा देनी होगी।
18 अगस्त की एजीएम पहले चंद्रशेखरन के डायरेक्टर पद के पुनर्नियोजन के कारण महत्वपूर्ण थी। अब उनका कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाने का फैसला इस बैठक को उत्तराधिकार और कॉरपोरेट गवर्नेंस के नजरिए से और अहम बनाता है।
जुलाई में एजीएम को लेकर एक अन्य पेचीदगी भी सामने आई थी। सिर रतन टाटा ट्रस्ट से जुड़े गवर्नेंस मामलों के कारण बैठक के क्वोरम और प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठे थे।
इस वजह से टाटा संस की एजीएम इस साल सामान्य वार्षिक बैठक से अलग महत्व रखती है।
फिलहाल ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी होगा।
चंद्रशेखरन का जाना निश्चित रूप से बड़ा नेतृत्व परिवर्तन है, लेकिन उन्होंने अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करने की बात कही है। कंपनी के पास उत्तराधिकारी चुनने के लिए भी समय है।
दूसरी तरफ, बोर्ड में सर्वसम्मत समर्थन न मिलने की बात और पिछले महीनों में सामने आए गवर्नेंस मतभेद यह संकेत देते हैं कि टाटा संस के नेतृत्व को लेकर अंदरूनी स्तर पर जटिलताएं रही हैं।
इसलिए इसे केवल सामान्य रिटायरमेंट कहना भी पूरी तस्वीर नहीं देता।
ग्राउंड रियलिटी यह है कि टाटा संस में तत्काल नेतृत्व शून्य पैदा नहीं हुआ है। चंद्रशेखरन फरवरी 2027 तक अपने मौजूदा कार्यकाल में बने रहेंगे।
लेकिन रणनीतिक स्तर पर उत्तराधिकार प्रक्रिया अब शुरू हो चुकी है।
नए चेयरमैन के चयन में टाटा ट्रस्ट्स, टाटा संस बोर्ड और समूह की दीर्घकालिक कारोबारी जरूरतें अहम रहेंगी। अभी तक किसी उत्तराधिकारी का आधिकारिक नाम सामने नहीं आया है।
अब सबसे पहले टाटा संस बोर्ड की उत्तराधिकार प्रक्रिया पर नजर रहेगी।
18 अगस्त की एजीएम में कंपनी की गवर्नेंस और बोर्ड संरचना से जुड़े फैसले महत्वपूर्ण होंगे। इसके बाद नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
बाजार की नजर इस बात पर भी रहेगी कि नया नेतृत्व टाटा समूह के बड़े निवेशों, एयर इंडिया, टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य रणनीतिक कारोबारों को किस दिशा में ले जाता है।
एन चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद पर अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद आगे नहीं रहने का फैसला किया है। उनका वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होगा। यानी यह तत्काल विदाई नहीं है, बल्कि अगले चेयरमैन के लिए उत्तराधिकार प्रक्रिया शुरू करने का फैसला है।
फैसला 18 अगस्त की एजीएम से पहले आया है, जहां पहले चंद्रशेखरन के डायरेक्टर पद के पुनर्नियोजन को लेकर अहम प्रक्रिया होनी थी। उनके बयान के मुताबिक, कार्यकाल बढ़ाने के प्रस्ताव को बोर्ड में सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिला था।
अब टाटा समूह के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि चंद्रशेखरन के बाद कमान किसके हाथ जाएगी। आने वाला उत्तराधिकार फैसला टाटा समूह की कॉरपोरेट गवर्नेंस और अगले चरण की कारोबारी स्ट्रैटेजी दोनों के लिए अहम होगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।