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पीयूष गोयल का बड़ा बयान, तरजीही टैरिफ के बिना US ट्रेड डील नहीं

Harish Qureshi • 2026-09-04 14:24:31
पीयूष गोयल का बड़ा बयान, तरजीही टैरिफ के बिना US ट्रेड डील नहीं

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर पीयूष गोयल ने कहा कि अंतिम समझौते से पहले भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले तरजीही टैरिफ शर्तें मिलनी चाहिए।


नई दिल्ली | 4 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris


अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर भारत का रुख साफ


भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित Bilateral Trade Agreement यानी BTA को लेकर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत की प्राथमिकता स्पष्ट कर दी है।


गोयल ने कहा कि भारत समझौते को अंतिम रूप देने के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिका को भारतीय निर्यातकों के लिए प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में preferential tariff rate देना होगा। उन्होंने कहा कि इसी शर्त के बाद BTA के अंतिम विवरण की घोषणा की जाएगी।


प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर टैरिफ की मांग


गोयल का कहना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में केवल अमेरिका द्वारा तय टैरिफ की दर देखना पर्याप्त नहीं है। असल मुद्दा यह है कि 

अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर लगने वाला शुल्क वियतनाम, बांग्लादेश और दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले कितना होगा।


उन्होंने कहा कि भारत चाहता है कि भारतीय निर्यातकों को कम से कम वही और बेहतर टैरिफ उपचार मिले जो अमेरिका अपने दूसरे व्यापारिक 

साझेदारों को दे रहा है। कुछ उत्पादों के लिए भारत शून्य टैरिफ की दिशा में भी बेहतर शर्तें चाहता है।


BTA पर अंतिम फैसला क्यों अटका है


भारत और अमेरिका ने फरवरी 2026 में प्रस्तावित Interim Trade Agreement का फ्रेमवर्क घोषित किया था। आधिकारिक संयुक्त बयान के 

मुताबिक अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं की कई श्रेणियों के लिए 18% reciprocal tariff rate रखने और कुछ उत्पादों पर अतिरिक्त reciprocal 

tariff हटाने की दिशा में सहमति जताई थी, बशर्ते Interim Agreement सफलतापूर्वक पूरा हो।


इसके बाद अमेरिकी टैरिफ नीति में बदलावों ने बातचीत को और जटिल बनाया। भारत अब यह सुनिश्चित करना चाहता है कि अंतिम समझौते के तहत 

उसके निर्यातकों को उन देशों की तुलना में नुकसान न हो जो अमेरिका को समान उत्पाद बेचते हैं।


भारत किन देशों से प्रतिस्पर्धा कर रहा है


अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियों को वियतनाम और बांग्लादेश के अलावा इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड और कंबोडिया जैसे एशियाई निर्यातकों से भी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। इन देशों की अमेरिकी बाजार तक preferential access हासिल करने की कोशिशें भारत की वार्ता रणनीति को प्रभावित कर रही हैं।


टैरिफ में छोटा अंतर भी निर्यात कारोबार के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। अगर एक देश के उत्पाद पर कम आयात शुल्क लगता है और दूसरे देश के 

समान उत्पाद पर ज्यादा, तो अमेरिकी खरीदार के लिए कम शुल्क वाला उत्पाद कीमत के स्तर पर ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो सकता है।


इसी वजह से भारत absolute tariff rate के बजाय relative tariff advantage पर जोर दे रहा है।


भारत के लिए टैरिफ इतना अहम क्यों है


अमेरिका भारतीय वस्तुओं के लिए प्रमुख निर्यात बाजारों में शामिल है। इसलिए अमेरिकी बाजार में टैरिफ प्रतिस्पर्धा भारतीय उद्योगों की कीमत और 

मार्जिन दोनों को प्रभावित करती है।


कम टैरिफ से भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बेहतर price competitiveness मिल सकती है। इसका फायदा टेक्सटाइल, लेदर, 

फुटवियर, इंजीनियरिंग उत्पाद, केमिकल्स और दूसरे निर्यात क्षेत्रों को मिल सकता है, हालांकि वास्तविक लाभ अंतिम BTA में तय उत्पाद-वार शर्तों पर 

निर्भर करेगा।


फरवरी के फ्रेमवर्क में क्या तय हुआ था


भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी 2026 को Interim Agreement के लिए एक फ्रेमवर्क घोषित किया था।


आधिकारिक संयुक्त बयान के अनुसार भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और कई कृषि एवं खाद्य उत्पादों पर अपने टैरिफ घटाने या खत्म करने की 

दिशा में आगे बढ़ने पर सहमत हुआ था। बदले में अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं की कई श्रेणियों पर 18% reciprocal tariff rate लागू करने और 

कुछ विशेष उत्पादों पर reciprocal tariff हटाने का प्रस्ताव रखा था।


यह फ्रेमवर्क व्यापक BTA की दिशा में एक अहम पड़ाव था। लेकिन अंतिम समझौते के लिए बाकी टैरिफ और बाजार पहुंच से जुड़ी शर्तों पर सहमति 

जरूरी है।


भारत का व्यापक FTA एजेंडा


गोयल ने इसी कार्यक्रम में भारत के दूसरे Free Trade Agreements यानी FTAs पर भी जोर दिया।


रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि भारत ने अब तक नौ FTAs को अंतिम रूप दिया है और UK, New Zealand तथा European Union समेत 

कई समझौतों से जुड़े बाजार अवसरों को आगे बढ़ाया जा रहा है।


वाणिज्य मंत्रालय के उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार भारत का लक्ष्य अलग-अलग व्यापार समझौतों के जरिए भारतीय निर्यातकों के लिए बड़े वैश्विक 

बाजारों में preferential market access बढ़ाना है।


गोयल ने निर्यातकों को यह भी संकेत दिया कि केवल टैरिफ लाभ हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा। भारतीय उद्योगों को गुणवत्ता, तकनीक और 

supply chain क्षमता में भी सुधार करना होगा।


भारत के निर्यात लक्ष्य पर भी जोर


गोयल ने निर्यात विस्तार को सरकार की व्यापक व्यापार रणनीति से जोड़ा है।


रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच भारत के निर्यात को 317 अरब डॉलर बताया और 2030 तक 2 ट्रिलियन डॉलर के कुल निर्यात लक्ष्य का उल्लेख किया।


ऐसे लक्ष्य को हासिल करने के लिए अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में प्रतिस्पर्धी बाजार पहुंच महत्वपूर्ण होगी।


लेकिन यहां एक चुनौती भी है। भारत को अमेरिका से बेहतर टैरिफ हासिल करने के साथ घरेलू उत्पादन लागत, गुणवत्ता मानक, लॉजिस्टिक्स और 

supply chain efficiency में भी सुधार करना होगा।


आगे क्या होगा


अब निगाहें भारत-अमेरिका वार्ता के अगले दौर पर हैं। गोयल ने संकेत दिया है कि भारत समझौते को रोकने के बजाय ऐसी शर्त चाहता है जिससे 

भारतीय निर्यातकों को उनके प्रमुख प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले नुकसान न हो।


इसका अर्थ यह है कि बातचीत का केंद्र केवल “टैरिफ कितना होगा” नहीं है। असली सवाल यह है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय माल को दूसरे 

निर्यातक देशों की तुलना में कितना preferential treatment मिलेगा।


अगर दोनों पक्ष इस मुद्दे पर सहमति बना लेते हैं तो BTA के अंतिम विवरण की घोषणा आगे बढ़ सकती है। फिलहाल भारत का संदेश साफ है, बाजार पहुंच के साथ प्रतिस्पर्धी टैरिफ शर्तें भी जरूरी हैं।

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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