पीयूष गोयल ने लॉजिस्टिक्स में टेक्नोलॉजी की भूमिका को विकसित भारत के लिए अहम बताया। LDB ने 10 करोड़ EXIM कंटेनरों की ट्रैकिंग का माइलस्टोन हासिल किया। डिजिटल ट्रैकिंग, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और डेटा आधारित फैसलों से भारत की सप्लाई चेन दक्षता, निर्यात प्रतिस्पर्धा और कारोबारी माहौल को मजबूत करने की कोशिश जारी है।
नई दिल्ली | 14 अगस्त 2026 | Mohd Naved
भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर में डिजिटल टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल को विकसित भारत की आर्थिक रणनीति से जोड़ते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि टेक्नोलॉजी लॉजिस्टिक्स को अधिक सरल, तेज और दक्ष बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। यह बयान ऐसे समय आया है जब लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक यानी एलडीबी ने 10 करोड़ एक्सपोर्ट-इंपोर्ट कंटेनरों की ट्रैकिंग का महत्वपूर्ण माइलस्टोन हासिल किया है।
लॉजिस्टिक्स की दक्षता का सीधा असर भारत के मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपोर्ट, सप्लाई चेन और कारोबारी प्रतिस्पर्धा पर पड़ता है। सरकार पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल प्लेटफॉर्म, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और डेटा आधारित लॉजिस्टिक्स सिस्टम को एक साथ आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक भारत के EXIM कंटेनरों की आवाजाही पर डिजिटल निगरानी और विजिबिलिटी उपलब्ध कराने वाला प्रमुख सिस्टम है। सरकारी जानकारी के मुताबिक एलडीबी 2.0 को सड़क, रेल और समुद्री नेटवर्क पर रियल टाइम मल्टीमॉडल कार्गो ट्रैकिंग के लिए विकसित किया गया है। इसमें हाई-सीज कंटेनर ट्रैकिंग और लाइव कंटेनर हीटमैप जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।
सरकार के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में एलडीबी ने भारत के 100 प्रतिशत EXIM कंटेनरों को ट्रैक किया और करीब 9.5 करोड़ एक्सपोर्ट-इंपोर्ट कंटेनरों को हैंडल किया। यह आंकड़ा डिजिटल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के बढ़ते पैमाने को दर्शाता है।
10 करोड़ कंटेनरों की ट्रैकिंग का माइलस्टोन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कंटेनर मूवमेंट में देरी, पोर्ट पर भीड़, खाली कंटेनरों का प्रबंधन और अलग-अलग ट्रांसपोर्ट मोड के बीच तालमेल कारोबारी लागत को प्रभावित करते हैं।
लॉजिस्टिक्स सेक्टर में डिजिटल सिस्टम का उद्देश्य केवल कंटेनर की लोकेशन जानना नहीं है। इसका व्यापक मकसद सप्लाई चेन के अलग-अलग हिस्सों को एक-दूसरे से जोड़ना और निर्णय लेने के लिए बेहतर डेटा उपलब्ध कराना है।
यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म यानी यूएलआईपी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। सरकार ने इसे विभिन्न लॉजिस्टिक्स सेवाओं और डेटा सिस्टम को एकीकृत करने के लिए विकसित किया है। 2025 में यूएलआईपी ने 100 करोड़ एपीआई ट्रांजैक्शन का आंकड़ा पार किया था, जिसे सरकार ने डिजिटल लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम के विस्तार का संकेत बताया था।
एलडीबी और यूएलआईपी जैसे सिस्टम से कार्गो मूवमेंट की बेहतर विजिबिलिटी मिलती है। इससे पोर्ट, रेलवे, सड़क परिवहन, कंटेनर फ्रेट स्टेशन और अन्य लॉजिस्टिक्स स्टेकहोल्डर्स के बीच समन्वय बेहतर करने का आधार तैयार होता है।
भारत के लिए लॉजिस्टिक्स केवल परिवहन का मुद्दा नहीं है। यह मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट प्रतिस्पर्धा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के तहत सरकार ने टेक्नोलॉजी आधारित, एकीकृत, लागत-कुशल, टिकाऊ और भरोसेमंद लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम तैयार करने का लक्ष्य रखा है। नीति में लॉजिस्टिक्स लागत को वैश्विक बेंचमार्क के करीब लाने और भारत की लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस को बेहतर करने की दिशा तय की गई थी।
सरकार का तर्क है कि यदि किसी उत्पाद को फैक्ट्री से पोर्ट या घरेलू बाजार तक पहुंचाने में कम समय और कम लागत लगे, तो भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत होती है। इसका असर विशेष रूप से MSME, एक्सपोर्टर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ सकता है।
यहां एक अहम सवाल भी है। क्या टेक्नोलॉजी अकेले भारत की लॉजिस्टिक्स चुनौती का समाधान कर सकती है?
जवाब सीधा नहीं है। डिजिटल विजिबिलिटी तभी प्रभावी होती है जब सड़क, रेल, पोर्ट, वेयरहाउस, कस्टम्स और अंतिम मील की कनेक्टिविटी समान गति से काम करें।
2022 में राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति की शुरुआत के दौरान सरकार ने लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने और उसे वैश्विक मानकों के करीब लाने पर जोर दिया था। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की लॉजिस्टिक्स लागत को एकल अंक तक लाने की जरूरत बताई थी।
इसलिए मौजूदा डिजिटल पहल को व्यापक इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधार के साथ देखना जरूरी है। केवल रियल टाइम ट्रैकिंग से बंदरगाह की क्षमता, सड़क की गुणवत्ता, ट्रक की उपलब्धता या वेयरहाउसिंग की कमी अपने आप दूर नहीं होती।
भारत की लॉजिस्टिक्स रणनीति में पीएम गतिशक्ति ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसका उद्देश्य अलग-अलग मंत्रालयों और एजेंसियों की इन्फ्रास्ट्रक्चर योजनाओं को एक व्यापक प्लानिंग फ्रेमवर्क में जोड़ना है।
सरकार के मुताबिक पीएम गतिशक्ति का इस्तेमाल इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग, जियोस्पेशियल डेटा, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और परियोजनाओं की निगरानी के लिए किया जा रहा है। 2025 में इसके प्लेटफॉर्म पर निजी क्षेत्र के लिए क्वेरी आधारित एनालिटिक्स की सुविधा भी शुरू की गई थी।
इसका महत्व इसलिए बढ़ता है क्योंकि लॉजिस्टिक्स में सड़क, रेल, बंदरगाह और औद्योगिक क्षेत्र अलग-अलग इकाइयां नहीं हैं। एक हिस्से में देरी पूरे सप्लाई चेन नेटवर्क पर असर डाल सकती है।
भारत के विदेशी व्यापार में समुद्री परिवहन का महत्व भी बड़ा है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार 2025 में पीयूष गोयल ने कहा था कि भारत के ट्रेड वॉल्यूम का लगभग 95 प्रतिशत पोर्ट के जरिए आता है और देश की करीब 7,500 किलोमीटर लंबी तटरेखा समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण आधार है।
ऐसे में कंटेनर की डिजिटल ट्रैकिंग और पोर्ट आधारित लॉजिस्टिक्स की दक्षता सीधे एक्सपोर्ट टाइम और सप्लाई चेन की विश्वसनीयता से जुड़ती है।
गोयल ने पहले भी इस बात पर जोर दिया है कि यूएलआईपी और अन्य डिजिटल सिस्टम के जरिए लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को ज्यादा एकीकृत करने की जरूरत है। इसका लक्ष्य कारोबारी प्रक्रिया को सरल बनाना और देरी तथा अतिरिक्त लागत को कम करना है।
लॉजिस्टिक्स में अगला चरण केवल ट्रैकिंग तक सीमित नहीं रहेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल ट्रैफिक पैटर्न, डिलीवरी टाइम, इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता और संभावित बाधाओं का विश्लेषण करने में किया जा सकता है।
वाणिज्य मंत्रालय ने पहले लॉजिस्टिक्स सेक्टर में एआई और डेटा एनालिटिक्स के इस्तेमाल को समय और लागत से जुड़े ओवररन को कम करने के लिए महत्वपूर्ण बताया था। सरकार ने ग्रीन लॉजिस्टिक्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बायोफ्यूल और मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट को भी लॉजिस्टिक्स सुधार के व्यापक एजेंडा का हिस्सा बताया है।
यह बदलाव भारत के लिए इसलिए अहम है क्योंकि वैश्विक सप्लाई चेन अब केवल कम लागत पर निर्भर नहीं है। कंपनियां तेज डिलीवरी, पारदर्शिता, भरोसेमंद डेटा और सप्लाई चेन रेजिलिएंस को भी प्राथमिकता देती हैं।
डिजिटल लॉजिस्टिक्स के विस्तार के बावजूद ग्राउंड लेवल पर कई चुनौतियां बनी हुई हैं। छोटे कारोबारियों और MSME के लिए डिजिटल सिस्टम की पहुंच, डेटा इंटीग्रेशन, स्किल्ड मैनपावर और तकनीकी क्षमता महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
सरकार ने लॉजिस्टिक्स सेक्टर में स्किल डेवलपमेंट और इंडस्ट्री, सरकार तथा अकादमिक संस्थानों के बीच सहयोग की जरूरत पर भी जोर दिया है। इसका कारण साफ है। डिजिटल प्लेटफॉर्म तभी उपयोगी होंगे जब उन्हें संचालित करने और उनसे निर्णय लेने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो।
दूसरी चुनौती डेटा की गुणवत्ता और अलग-अलग सिस्टम के बीच इंटरऑपरेबिलिटी की है। यदि किसी सप्लाई चेन के एक हिस्से का डेटा अपडेटेड नहीं है, तो रियल टाइम सिस्टम की उपयोगिता प्रभावित हो सकती है।
दक्ष लॉजिस्टिक्स का सबसे बड़ा संभावित लाभ कारोबार की लागत और समय में कमी है। निर्यातकों के लिए पोर्ट तक माल पहुंचने, कस्टम्स प्रक्रिया, कंटेनर की उपलब्धता और आगे की शिपमेंट योजना में बेहतर विजिबिलिटी कारोबारी निर्णयों को आसान बनाती है।
भारत की औद्योगिक नीति में ग्लोबल वैल्यू चेन से मजबूत जुड़ाव को प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे में लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल नेटवर्क दोनों की गुणवत्ता भारत की मैन्युफैक्चरिंग महत्वाकांक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
कंटेनर ट्रैकिंग से सरकार और निजी क्षेत्र को यह समझने में मदद मिल सकती है कि देरी कहां हो रही है और किन कॉरिडोर या नोड्स पर क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। इससे भविष्य की इन्फ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग को अधिक डेटा आधारित बनाने की गुंजाइश पैदा होती है।
आने वाले चरण में एलडीबी, यूएलआईपी और पीएम गतिशक्ति जैसे प्लेटफॉर्म के बीच बेहतर डेटा इंटीग्रेशन महत्वपूर्ण रहेगा। इसके साथ पोर्ट क्षमता, रेल फ्रेट, सड़क नेटवर्क, वेयरहाउसिंग और अंतिम मील कनेक्टिविटी में समानांतर सुधार जरूरी होगा।
भारत के लिए चुनौती अब केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने की नहीं है। असली कसौटी यह होगी कि इन प्लेटफॉर्म से मिलने वाला डेटा जमीन पर कितनी तेजी से बेहतर फैसलों, कम देरी और कम लागत में बदलता है।
यदि डिजिटल विजिबिलिटी को मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर और कुशल मानव संसाधन का साथ मिलता है, तो लॉजिस्टिक्स भारत की एक्सपोर्ट प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने वाला प्रमुख आधार बन सकता है। लेकिन इसके असर का मूल्यांकन वास्तविक लागत, डिलीवरी टाइम और सप्लाई चेन प्रदर्शन के ठोस आंकड़ों से ही किया जाना चाहिए।
पीयूष गोयल का बयान भारत की लॉजिस्टिक्स रणनीति में टेक्नोलॉजी की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है। 10 करोड़ EXIM कंटेनरों की ट्रैकिंग का माइलस्टोन डिजिटल विजिबिलिटी के विस्तार को दिखाता है, जबकि सरकारी आंकड़े बताते हैं कि एलडीबी अब देश के पूरे EXIM कंटेनर नेटवर्क को ट्रैक करने की दिशा में व्यापक स्तर पर इस्तेमाल हो रहा है।
लेकिन वास्तविक काम अभी बाकी है। टेक्नोलॉजी लॉजिस्टिक्स को तेज और पारदर्शी बनाने का साधन है, अंतिम समाधान नहीं। भारत की विकसित अर्थव्यवस्था की महत्वाकांक्षा के लिए जरूरी होगा कि डिजिटल सिस्टम, इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्किल, पोर्ट क्षमता और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी एक साथ आगे बढ़ें।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।