उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर साल के एक हिस्से में करीब छह महीने तक लगातार दिन और दूसरे हिस्से में लंबी रात रहती है। इसकी वजह पृथ्वी के घूर्णन अक्ष का लगभग 23.5 डिग्री झुका होना है।
छह महीने तक सूरज क्यों नहीं डूबता?
दुनिया में ऐसी जगह की कल्पना करना भी मुश्किल है, जहां शाम होने का इंतजार करते-करते कई महीने गुजर जाएं। लेकिन धरती के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के आसपास यह एक वास्तविक प्राकृतिक घटना है। यहां साल के एक हिस्से में सूर्य लंबे समय तक क्षितिज के ऊपर दिखाई देता है, जबकि दूसरे हिस्से में लंबी ध्रुवीय रात रहती है। इसे वैज्ञानिक भाषा में ध्रुवीय दिवस या मिडनाइट सन की घटना कहा जाता है। जैसे-जैसे कोई व्यक्ति ध्रुवों के करीब जाता है, लगातार रोशनी वाले दिनों की संख्या बढ़ती जाती है। बिल्कुल ध्रुव पर यह अवधि लगभग छह महीने तक पहुंच जाती है।
आखिर कौन सी है वह जगह?
अगर सवाल हो कि दुनिया में वह कौन सी जगह है जहां करीब छह महीने तक सूरज नहीं डूबता, तो इसका सबसे सटीक जवाब उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव है। उत्तर ध्रुव पर लगभग छह महीने तक सूर्य क्षितिज के ऊपर रहता है और इसके बाद लगभग छह महीने तक सूर्य दिखाई नहीं देता। दक्षिण ध्रुव पर इसका उल्टा क्रम होता है। जब उत्तर ध्रुव पर लगातार दिन होता है, तब दक्षिण ध्रुव पर लंबी रात का दौर चलता है। कुछ समय बाद स्थिति पूरी तरह बदल जाती है।
इसके पीछे क्या है विज्ञान?
इस अनोखी घटना का सबसे बड़ा कारण पृथ्वी का अपने अक्ष पर लगभग 23.5 डिग्री झुका होना है। पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है और साथ ही अपने अक्ष पर घूमती भी है। लेकिन पृथ्वी का घूर्णन अक्ष बिल्कुल सीधा नहीं है। उसका झुकाव ही अलग-अलग मौसम और ध्रुवीय क्षेत्रों में दिन-रात की अवधि में बड़ा अंतर पैदा करता है। जब उत्तरी ध्रुव सूर्य की ओर झुका होता है, तब वहां सूर्य का प्रकाश लंबे समय तक बना रहता है। पृथ्वी के घूमने के बावजूद सूर्य क्षितिज के नीचे नहीं जाता। यही कारण है कि वहां रात के समय भी सूर्य दिखाई दे सकता है। इसके विपरीत उसी समय दक्षिण ध्रुव सूर्य से दूर की दिशा में झुका होता है और वहां लगातार अंधकार का दौर शुरू हो जाता है।
क्या सच में छह महीने तक दिन रहता है?
ध्रुवों पर यह बात लगभग सही है, लेकिन पृथ्वी के सभी ध्रुवीय इलाकों में ठीक छह महीने तक सूरज दिखाई दे, ऐसा नहीं है। आर्कटिक सर्कल यानी लगभग 66.5 डिग्री उत्तरी अक्षांश पर साल में कम से कम एक दिन ऐसा आता है जब सूर्य पूरी तरह अस्त नहीं होता। जैसे-जैसे आप उत्तर ध्रुव की ओर बढ़ते हैं, लगातार सूर्य दिखाई देने की अवधि बढ़ती जाती है। बिल्कुल उत्तर ध्रुव पर यह अवधि करीब छह महीने तक पहुंच जाती है। यही नियम दक्षिणी गोलार्ध में अंटार्कटिक सर्कल और दक्षिण ध्रुव के लिए लागू होता है।
इसे ‘मिडनाइट सन’ क्यों कहते हैं?
ध्रुवीय क्षेत्रों में गर्मियों के दौरान ऐसी स्थिति बन सकती है जब आधी रात के समय भी सूर्य क्षितिज के ऊपर दिखाई देता है। इसी वजह से इस घटना को मिडनाइट सन, यानी आधी रात का सूरज कहा जाता है। यह कोई अलग तरह का सूर्य नहीं है, बल्कि पृथ्वी की स्थिति और अक्ष के झुकाव के कारण सूर्य का लंबे समय तक दिखाई देना है।
जब सूरज नहीं डूबता तो रात कब होती है?
ध्रुवीय क्षेत्र में गर्मियों के बाद जैसे-जैसे पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है, संबंधित ध्रुव सूर्य से दूर की ओर झुकने लगता है। इसके बाद वहां सूर्य धीरे-धीरे क्षितिज के नीचे चला जाता है और लंबे अंधकार का दौर शुरू हो जाता है। दक्षिण ध्रुव पर उदाहरण के तौर पर मार्च के आसपास सूर्य अस्त होने के बाद लगभग छह महीने तक दोबारा सूर्योदय नहीं होता। NOAA के अनुसार दक्षिण ध्रुव पर मार्च के आसपास सूर्य के अस्त होने के बाद लगभग सितंबर के आसपास फिर से उसके उगने का समय आता है।
क्या उत्तर और दक्षिण ध्रुव पर एक साथ दिन होता है?
नहीं। दोनों ध्रुवों पर स्थितियां एक-दूसरे के विपरीत होती हैं।
जब उत्तरी ध्रुव पर गर्मियों का दौर होता है और वहां लंबे समय तक सूर्य दिखाई देता है, उसी समय दक्षिण ध्रुव पर सर्दियों का मौसम होता है और वहां लंबी रात रहती है। लगभग छह महीने बाद स्थिति पलट जाती है। तब दक्षिण ध्रुव पर लगातार दिन और उत्तर ध्रुव पर लंबी रात का दौर शुरू हो जाता है।
क्या भारत में भी ऐसा हो सकता है?
भारत भूमध्य रेखा और ध्रुवों के बीच मध्य अक्षांशों में स्थित है। इसलिए यहां ध्रुवों जैसी कई महीनों तक चलने वाली लगातार दिन या रात की स्थिति नहीं बनती। भारत में दिन और रात की अवधि मौसम के अनुसार बदलती जरूर है, लेकिन सूर्य का लगातार कई महीनों तक दिखाई देना यहां संभव नहीं है।
पृथ्वी का झुकाव न होता तो क्या होता?
पृथ्वी का लगभग 23.5 डिग्री अक्षीय झुकाव मौसमों और दिन-रात की अवधि में होने वाले बदलावों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि पृथ्वी का अक्षीय झुकाव न होता, तो सूर्य के प्रकाश का वितरण अलग तरह का होता और वर्तमान जैसी ऋतुओं की व्यवस्था नहीं बनती। NOAA के अनुसार पृथ्वी के अक्ष का झुकाव ही मौसमों के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाता है।
ध्रुवीय रात भी उतनी ही अनोखी
जहां लगातार सूर्य दिखाई देने की घटना आकर्षित करती है, वहीं इसका दूसरा पहलू भी उतना ही दिलचस्प है। ध्रुवीय क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान सूर्य कई महीनों तक क्षितिज के ऊपर नहीं आता। दक्षिण ध्रुव पर मार्च के आसपास सूर्य के अस्त होने के बाद लगभग छह महीने तक सूर्योदय नहीं होता। इस दौरान वहां बेहद लंबी रात रहती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि पूरे छह महीने हर पल एक जैसा पूर्ण अंधेरा रहता है। वातावरण और सूर्य की स्थिति के कारण गोधूलि जैसी रोशनी के चरण भी देखे जा सकते हैं।
क्या यह प्रकृति का चमत्कार है?
लंबे समय तक सूरज का न डूबना देखने में किसी चमत्कार से कम नहीं लगता, लेकिन इसके पीछे पूरी तरह प्राकृतिक और वैज्ञानिक प्रक्रिया है। पृथ्वी का अपने अक्ष पर झुकाव, सूर्य की परिक्रमा और पृथ्वी की गोलाकार संरचना मिलकर ध्रुवीय क्षेत्रों में दिन और रात की इतनी असाधारण अवधि पैदा करते हैं।
निष्कर्ष
दुनिया में करीब छह महीने तक सूर्य के लगातार दिखाई देने की सबसे स्पष्ट स्थिति उत्तर और दक्षिण ध्रुवों पर देखने को मिलती है। यह घटना पृथ्वी के अक्षीय झुकाव और सूर्य के चारों ओर उसकी परिक्रमा का परिणाम है। इसलिए “छह महीने तक सूरज नहीं डूबता” कहना रोचक जरूर है, लेकिन इसे किसी रहस्य या चमत्कार के बजाय पृथ्वी की खगोलीय स्थिति से जुड़ी प्राकृतिक घटना के रूप में समझना अधिक सही है।