नासा के टेलीस्कोप के साथ अंतरिक्ष जाएंगे 13.5 लाख नाम
रोमन टेलीस्कोप पर दर्ज हुए 13.5 लाख नाम, अब अंतरिक्ष की बारी
नासा का अनोखा मिशन, 13,50,144 नाम पहुंचेंगे गहरे अंतरिक्ष तक
नासा ने नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप पर 13,50,144 नामों वाला मेमोरी कार्ड लगाया है। ये नाम दुनिया भर के अंतरिक्ष प्रेमियों ने भेजे हैं। टेलीस्कोप 30 अगस्त 2026 को प्रक्षेपित होने के बाद सूर्य-पृथ्वी एल2 क्षेत्र में पहुंचेगा, जहां यह ब्रह्मांड के कई अहम रहस्यों का अध्ययन करेगा।
Location: कैनेडी स्पेस सेंटर, फ्लोरिडा, अमेरिका
Date: 6 अगस्त 2026
By Asif khan
अंतरिक्ष की दुनिया में नासा का आगामी नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप एक खास वजह से चर्चा में है। इस मिशन के साथ 13,50,144 लोगों के नाम भी अंतरिक्ष की यात्रा पर जाएंगे। नासा ने इन नामों को एक छोटे मेमोरी कार्ड में दर्ज कर टेलीस्कोप पर स्थापित किया है।
नासा के मुताबिक यह मेमोरी कार्ड रोमन स्पेस टेलीस्कोप के साथ सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंज प्वाइंट 2, यानी एल2, तक जाएगा। यह क्षेत्र पृथ्वी से करीब 15 लाख किलोमीटर दूर है।
नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर, फ्लोरिडा में तकनीशियनों ने रोमन स्पेस टेलीस्कोप पर एक स्मारक पट्टिका स्थापित की है। इसमें एक मेमोरी कार्ड लगाया गया है, जिसमें दुनिया भर से भेजे गए 13,50,144 नाम दर्ज हैं।
इन नामों को अंतरिक्ष के प्रति उत्साही लोगों ने भेजा था। नासा के अनुसार इनमें आर्टेमिस द्वितीय और आर्टेमिस तृतीय चंद्र मिशनों से जुड़े अंतरिक्ष यात्रियों के नाम भी शामिल हैं।
यह पहल नासा की उस परंपरा का हिस्सा है, जिसके तहत आम लोगों को अंतरिक्ष अभियानों से जोड़ने की कोशिश की जाती है। नामों को टेलीस्कोप के साथ भेजने का मकसद वैज्ञानिक उपकरण के काम में बदलाव करना नहीं है, बल्कि मानवता की अंतरिक्ष अन्वेषण यात्रा में लोगों की भागीदारी को दर्ज करना है।
नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप नासा का अगली पीढ़ी का प्रमुख खगोलीय मिशन है। इसका नाम नासा की पहली मुख्य खगोलविद नैन्सी ग्रेस रोमन के सम्मान में रखा गया है। उन्हें हबल स्पेस टेलीस्कोप के विकास की प्रमुख पैरोकारों में गिना जाता है।
रोमन टेलीस्कोप का वैज्ञानिक कार्यक्रम व्यापक है। इसका एक प्रमुख उद्देश्य डार्क एनर्जी और डार्क मैटर को समझना है। इसके अलावा यह एक्सोप्लैनेट और इंफ्रारेड खगोल विज्ञान से जुड़े सवालों का अध्ययन करेगा।
इस टेलीस्कोप का प्राथमिक दर्पण 2.4 मीटर व्यास का है, जो हबल स्पेस टेलीस्कोप के प्राथमिक दर्पण के आकार के बराबर है। मगर रोमन का दृश्य क्षेत्र हबल की तुलना में कम से कम 100 गुना बड़ा होगा।
नामों को मेमोरी कार्ड में दर्ज करने के बाद इसे रोमन स्पेस टेलीस्कोप पर स्थापित किया गया। नासा ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया के जरिए साझा की। यह कार्ड अब मिशन के साथ अंतरिक्ष की यात्रा करेगा।
रोमन टेलीस्कोप को सूर्य-पृथ्वी एल2 के आसपास की कक्षा में स्थापित किया जाएगा। यही क्षेत्र जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप भी अपने वैज्ञानिक अवलोकनों के लिए इस्तेमाल करता है। एल2 की स्थिति सूर्य और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण प्रभावों के कारण अंतरिक्ष वेधशालाओं के लिए उपयोगी मानी जाती है।
नासा के अनुसार रोमन टेलीस्कोप 30 अगस्त 2026 को स्पेसएक्स फाल्कन हेवी रॉकेट से प्रक्षेपित किए जाने के लिए निर्धारित है। प्रक्षेपण फ्लोरिडा स्थित नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39ए से प्रस्तावित है।
नासा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि लॉन्च से पहले रोमन स्पेस टेलीस्कोप पर एक पट्टिका स्थापित की गई है, जिसमें दस लाख से अधिक नामों वाला एसडी कार्ड रखा गया है। एजेंसी ने इसे ब्रह्मांड में मानवता की मौजूदगी और अंतरिक्ष अन्वेषण की विरासत से जोड़कर पेश किया।
नासा की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक रोमन मिशन का वैज्ञानिक फोकस डार्क एनर्जी, डार्क मैटर, एक्सोप्लैनेट और इंफ्रारेड खगोल विज्ञान पर रहेगा।
13.5 लाख नामों को अंतरिक्ष में भेजना वैज्ञानिक प्रयोग नहीं है। इसका महत्व सार्वजनिक भागीदारी और अंतरिक्ष अन्वेषण से जुड़े मानवीय पक्ष में है।
वैज्ञानिक स्तर पर रोमन मिशन का महत्व इससे कहीं व्यापक है। नासा के अनुसार टेलीस्कोप अपने बड़े दृश्य क्षेत्र के जरिए विशाल संख्या में आकाशगंगाओं का अध्ययन करेगा। मिशन डार्क एनर्जी और डार्क मैटर की प्रकृति से जुड़े सवालों पर भी महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाएगा।
रोमन मिशन एक्सोप्लैनेट अनुसंधान में भी अहम भूमिका निभाएगा। नासा के वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मिशन करीब एक लाख नई दुनिया, यानी एक्सोप्लैनेट, की पहचान कर सकता है।
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हालांकि नासा की वैज्ञानिक सामग्री से स्पष्ट है कि रोमन मिशन का दायरा व्यापक है। इसका उद्देश्य केवल दूरस्थ ग्रहों की तलाश करना नहीं, बल्कि ब्रह्मांड के विस्तार, आकाशगंगाओं और अंतरिक्ष में मौजूद अदृश्य घटकों से जुड़े बुनियादी सवालों की पड़ताल करना भी है।
अगला प्रमुख पड़ाव रोमन स्पेस टेलीस्कोप का प्रक्षेपण है। मौजूदा नासा जानकारी के अनुसार लॉन्च 30 अगस्त 2026 के लिए निर्धारित है। इसके बाद टेलीस्कोप को सूर्य-पृथ्वी एल2 क्षेत्र की ओर भेजा जाएगा।
एल2 के आसपास पहुंचने के बाद रोमन टेलीस्कोप व्यापक खगोलीय सर्वेक्षण करेगा। इसका कैमरा हबल की तुलना में करीब 100 गुना बड़ा दृश्य क्षेत्र उपलब्ध कराएगा। इससे बड़े हिस्से के आकाश का अध्ययन कम समय में करने की क्षमता मिलेगी।
मिशन से एक्सोप्लैनेट, आकाशगंगाओं, डार्क मैटर और डार्क एनर्जी से जुड़े नए आंकड़े मिलने की उम्मीद है। मिशन के वैज्ञानिक परिणाम प्रक्षेपण और बाद की कमीशनिंग प्रक्रिया के सफल होने पर निर्भर करेंगे।
रोमन स्पेस टेलीस्कोप पर दर्ज 13,50,144 नाम इस मिशन के वैज्ञानिक उद्देश्यों से अलग एक मानवीय पहल को सामने रखते हैं। अंतरिक्ष अनुसंधान अक्सर अत्याधुनिक उपकरणों और जटिल वैज्ञानिक आंकड़ों के संदर्भ में देखा जाता है, लेकिन नामों को अंतरिक्ष तक भेजने जैसी पहल आम लोगों को इस प्रक्रिया से जोड़ती है।
मिशन का असली वैज्ञानिक महत्व उसके उपकरणों और सर्वेक्षण क्षमता में है। रोमन का बड़ा दृश्य क्षेत्र खगोलविदों को व्यापक स्तर पर ब्रह्मांड का अध्ययन करने में मदद करेगा। डार्क एनर्जी, डार्क मैटर और एक्सोप्लैनेट जैसे विषय आधुनिक खगोल विज्ञान के प्रमुख अनुसंधान क्षेत्रों में शामिल हैं।
13.5 लाख नामों वाला मेमोरी कार्ड इसलिए एक प्रतीकात्मक दस्तावेज है। इसके जरिए दुनिया भर के लोगों की भागीदारी को एक ऐसे मिशन के साथ जोड़ा गया है, जिसका वैज्ञानिक लक्ष्य पृथ्वी से बहुत आगे तक फैला है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।