सोमालिया में जहाज हाईजैक, 6 भारतीयों की सुरक्षा पर सवाल
तुर्की का हथियारों वाला जहाज समुद्री डाकुओं के कब्जे में
6 भारतीयों समेत 10 क्रू, सोमालिया में जहाज पर कब्जा
सोमालिया के पुंटलैंड तट के पास एमवी लुतुफ को आठ हथियारबंद लोगों ने हाईजैक कर लिया। जहाज पर 10 सदस्यीय क्रू में छह भारतीय हैं। पोत तुर्की के हथियार और संचार उपकरण लेकर जा रहा था। क्रू और कार्गो की मौजूदा स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। घटना से समुद्री सुरक्षा पर चिंता बढ़ी।
सोमालिया के पुंटलैंड तट के पास कैमरून -फ्लैग वाले कार्गो जहाज एमवी लुतुफ को समुद्री डाकुओं ने हाईजैक कर लिया। 10 सदस्यीय क्रू में छह भारतीय नागरिक शामिल हैं। एसोसिएटेड प्रेस ने एक सोमाली अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी है। जहाज पर तुर्की के हथियारों के साथ कम्युनिकेशन और सैटेलाइट उपकरण भी लदे थे। यह घटना 17 अगस्त को सामने आई, जब आठ हथियारबंद लोगों ने जहाज पर कब्जा किया। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस की चेतावनी के मुताबिक घटना सोमालिया के तट से कुछ समुद्री मील दूर हुई थी। समुद्री सुरक्षा से जुड़ी रिपोर्टों ने भी जहाज के हाईजैक होने की पुष्टि की है।
सोमाली अधिकारी के मुताबिक एमवी लुतुफ को पुंटलैंड के ईल जिले में मर्राया के पास कब्जे में लिया गया। जहाज को बाद में नूगाल तट की दिशा में ले जाया गया। अधिकारियों के मुताबिक हाईजैकिंग में आठ हथियारबंद लोग शामिल थे। जहाज के मालिक के तौर पर पोलर मूवमेंट शिपिंग का नाम सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक पोत मोगादिशु में तुर्की की सैन्य प्रशिक्षण सुविधा के लिए हथियार ले जा रहा था। उसके कार्गो में कम्युनिकेशन और सैटेलाइट उपकरण भी बताए गए हैं।
एमवी लुतुफ के 10 सदस्यीय क्रू में छह भारतीय, एक तुर्की नागरिक, एक जॉर्जियाई नागरिक और दो सर्बियाई सिक्योरिटी गार्ड शामिल थे। फिलहाल सबसे अहम सवाल इन छह भारतीयों समेत पूरे क्रू की सुरक्षा को लेकर है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक जहाज, क्रू और कार्गो की मौजूदा स्थिति तत्काल स्पष्ट नहीं थी। तुर्की अधिकारियों की तरफ से भी घटना पर तत्काल कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया था। इसलिए अभी यह दावा करना सही नहीं होगा कि क्रू को नुकसान पहुंचा है या उन्हें किसी दूसरी जगह ले जाया गया है। उनकी मौजूदा स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
एमवी लुतुफ का कार्गो इस घटना को सामान्य समुद्री डकैती से ज्यादा संवेदनशील बनाता है। रिपोर्ट के अनुसार जहाज तुर्की के हथियारों और सैन्य इस्तेमाल से जुड़े उपकरणों को मोगादिशु ले जा रहा था। सोमालिया में तुर्की की सैन्य मौजूदगी लंबे समय से जारी है। मोगादिशु में तुर्की का सैन्य प्रशिक्षण ढांचा सोमाली सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण देने के लिए इस्तेमाल होता रहा है। ऐसे में हथियारों से लदे जहाज का समुद्री डाकुओं के कब्जे में जाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए संवेदनशील मामला बन जाता है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों से यह साबित नहीं होता कि समुद्री डाकुओं ने जहाज को उसके सैन्य कार्गो के कारण निशाना बनाया था। हाईजैकिंग की मंशा पर फिलहाल ठोस सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
सोमाली अधिकारी के मुताबिक आठ हाईजैकर उस समूह से जुड़े माने जा रहे हैं, जिस पर अप्रैल में एमवी स्वार्ड के हाईजैक में शामिल होने का संदेह था। यह एक अधिकारी का आकलन है, इसलिए इसे स्थापित तथ्य की तरह पेश करना उचित नहीं होगा। एमवी स्वार्ड समेत दूसरे जहाजों की घटनाओं ने 2026 में सोमाली तट के पास समुद्री डकैती को लेकर चिंता बढ़ाई है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने जुलाई में कहा था कि सोमाली जलक्षेत्र में तीन जहाजों पर कब्जे के बाद 44 नाविक समुद्री डाकुओं की हिरासत में थे। इससे मौजूदा हाईजैकिंग को एक व्यापक मैरिटाइम सिक्योरिटी चुनौती के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।
सोमाली अधिकारी के मुताबिक दो तुर्की स्वामित्व वाली नौकाएं बाद में हाईजैक किए गए जहाज के पास पहुंचीं। तुर्की के हेलिकॉप्टर और ड्रोन भी इलाके में निगरानी कर रहे थे। इसके बाद मंगलवार को एक छोटी नाव जहाज के पास पहुंची। अधिकारी के मुताबिक उसमें दो लोग थे और उन्होंने हाईजैकर्स को खत नामक उत्तेजक पदार्थ पहुंचाया। नाव के वापस लौटने के बाद इलाके में एक एयरस्ट्राइक हुई। अधिकारी के अनुसार इस हमले में चार लोग मारे गए और दो घायल हुए। लेकिन इस एयरस्ट्राइक को किसने अंजाम दिया और मारे गए लोग हाईजैकिंग में शामिल थे या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यही वजह है कि एयरस्ट्राइक से जुड़े दावों को फिलहाल सावधानी के साथ देखना जरूरी है।
सोमालिया की समुद्री डकैती 2000 के दशक के अंत और 2010 के शुरुआती वर्षों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बड़ा खतरा बन गई थी। अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभियानों, जहाजों की सुरक्षा व्यवस्था और क्षेत्रीय सहयोग के बाद इसमें लंबे समय तक कमी आई। लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक सोमालिया, गल्फ ऑफ एडन और पश्चिमी हिंद महासागर में समुद्री डकैती पर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय निगरानी जारी है। संगठन के अनुसार समुद्री सुरक्षा का खतरा समाप्त नहीं हुआ है, खासकर सोमालिया की अंदरूनी अस्थिरता को देखते हुए। जुलाई 2026 में आईएमओ ने कहा था कि पिछले तीन महीनों में रेड सी और गल्फ ऑफ एडन क्षेत्र में समुद्री डकैती तथा सशस्त्र लूट की 24 कोशिशें और घटनाएं दर्ज की गईं। संगठन ने सोमाली जलक्षेत्र में बंधक बनाए गए 44 नाविकों की सुरक्षित रिहाई के लिए तत्काल अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की अपील भी की थी।
सोमालिया के आसपास का समुद्री क्षेत्र एशिया, मध्य पूर्व, अफ्रीका और यूरोप के बीच व्यापारिक आवाजाही के लिए अहम है। जहाजों के हाईजैक होने से कंपनियों पर सिक्योरिटी लागत, बीमा प्रीमियम और रूट प्लानिंग का दबाव बढ़ सकता है। समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर अलग-अलग घटनाएं बढ़ती हैं, तो शिपिंग कंपनियां अधिक महंगे या लंबे वैकल्पिक रास्तों पर जाने का फैसला कर सकती हैं। इससे माल ढुलाई और सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है। ब्रिटेन की सरकार भी सोमालिया के बड़े हिस्से में यात्रा को लेकर कड़ा सुरक्षा परामर्श जारी रखती है और समुद्री क्षेत्र में समुद्री डकैती तथा किडनैपिंग के जोखिम को रेखांकित करती है।
इस मामले में भारत के लिए प्राथमिक चिंता छह भारतीय क्रू सदस्यों की सुरक्षा और लोकेशन है। अभी सार्वजनिक तौर पर ऐसी पुष्टि उपलब्ध नहीं है जिससे यह कहा जा सके कि वे सुरक्षित हैं, रिहा हो चुके हैं या किसी दूसरे स्थान पर ले जाए गए हैं। आगे की जांच में भारतीय और तुर्की अधिकारियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होगा। साथ ही जहाज के मालिक, सोमाली स्थानीय प्रशासन और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों से मिलने वाली जानकारी से स्थिति ज्यादा स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल किसी भी सोशल मीडिया दावे या अपुष्ट संदेश को भारतीय क्रू की स्थिति की पुष्टि के तौर पर इस्तेमाल करना उचित नहीं होगा।
एक जहाज के हाईजैक को पूरे क्षेत्र में समुद्री डकैती की पूर्ण वापसी का प्रमाण कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन 2026 में सोमाली तट के आसपास लगातार सामने आई घटनाएं चिंता का आधार जरूर देती हैं। आईएमओ के रिकॉर्ड और हालिया घटनाएं बताते हैं कि समुद्री सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय निगरानी और क्षेत्रीय सहयोग अभी भी जरूरी है। समुद्री डकैती पर नियंत्रण केवल नौसैनिक कार्रवाई से नहीं, बल्कि सोमालिया के तटीय इलाकों में शासन, रोजगार, कानून-व्यवस्था और आर्थिक स्थिरता से भी जुड़ा है।
सबसे पहले प्राथमिकता एमवी लुतुफ के क्रू की सुरक्षित स्थिति स्पष्ट करने की होगी। इसके बाद जहाज और कार्गो के नियंत्रण को लेकर जानकारी सामने आ सकती है। अगर हाईजैकर्स के साथ बातचीत या ऑपरेशन होता है, तो उसमें सबसे बड़ा जोखिम क्रू की सुरक्षा का रहेगा। खासकर इसलिए क्योंकि जहाज पर सैन्य कार्गो होने की रिपोर्ट सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियां भी इस घटना के बाद सोमाली तट के आसपास जहाजों के लिए जोखिम आकलन और निगरानी बढ़ा सकती हैं। आईएमओ पहले ही क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत रेखांकित कर चुका है।
सोमालिया में एमवी लुतुफ का हाईजैक एक गंभीर समुद्री सुरक्षा घटना है, लेकिन इसकी पूरी तस्वीर अभी सामने नहीं आई है। इतना स्थापित है कि कैमरून -फ्लैग वाला जहाज पुंटलैंड के पास कब्जे में लिया गया और उसके 10 सदस्यीय क्रू में छह भारतीय शामिल थे। जहाज पर तुर्की के हथियार और अन्य उपकरण होने की भी रिपोर्ट है। सबसे बड़ा अनिश्चित पहलू क्रू की मौजूदा स्थिति और हाईजैक के बाद हुए एयरस्ट्राइक की वास्तविक परिस्थितियां हैं। इन दोनों मुद्दों पर स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार करना जरूरी है। भारत के लिए यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि छह भारतीय नागरिक सीधे इस समुद्री संकट से जुड़े हैं। अब हर नई जानकारी को आधिकारिक पुष्टि के साथ देखना और अपुष्ट दावों से बचना ही सबसे जिम्मेदार एडिटोरियल रुख होगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।