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यूपीएससी पास करने के बाद भी IAS ट्रेनिंग में फेल, नौकरी जाएगी या बचेगी?

Shahana 2026-07-10 09:28:16
यूपीएससी पास करने के बाद भी IAS ट्रेनिंग में फेल, नौकरी जाएगी या बचेगी?

UPSC पास, फिर भी LBSNAA में फेल, क्या IAS की नौकरी खतरे में?

IAS ट्रेनिंग में 24 प्रोबेशनर फेल, जानिए नियम क्या कहते हैं

 

Location:- Mussoorie

Date:- 10 July 2026

Byline:- Shahana

 

LBSNAA परीक्षा में बैक लगने पर क्या नौकरी चली जाती है?

UPSC की कठिन परीक्षा पास करने के बाद भी IAS अधिकारियों की असली परीक्षा LBSNAA में जारी रहती है। RTI के अनुसार पांच वर्षों में 24 प्रोबेशनर एक या अधिक परीक्षाओं में असफल हुए। हालांकि नियम बताते हैं कि पहली असफलता पर सीधे सेवा समाप्त नहीं होती। री-एग्जाम और प्रोबेशन नियम अंतिम फैसला तय करते हैं।

यूपीएससी के बाद खत्म नहीं होती सबसे कठिन परीक्षा

देश में लाखों अभ्यर्थी हर साल UPSC Civil Services Examination देते हैं। इनमें से बेहद कम उम्मीदवार भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS तक पहुंचते हैं। आम धारणा यह रही है कि UPSC क्लियर करने के बाद अधिकारी का सफर आसान हो जाता है। लेकिन हाल में सामने आई RTI जानकारी इस धारणा पर सवाल खड़े करती है। RTI के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में मसूरी स्थित Lal Bahadur Sashtri National Academy of Administration यानी LBSNAA में कम से कम 24 IAS प्रोबेशनर एक या अधिक परीक्षाओं में असफल हुए। इनमें 2025 और 2026 के दौरान ही 14 मामले दर्ज हुए।

LBSNAA की परीक्षा इतनी अहम क्यों है

LBSNAA केवल एक ट्रेनिंग सेंटर नहीं है। यही वह संस्थान है जहां भावी जिला कलेक्टर, सचिव और नीति निर्माता प्रशासनिक जीवन की बुनियादी तैयारी करते हैं। यहां अकादमिक विषयों के साथ कानून, लोक प्रशासन, अर्थव्यवस्था, नीति निर्माण, भाषा दक्षता, फील्ड ट्रेनिंग और व्यवहारिक प्रशासन का मूल्यांकन किया जाता है। अंतिम परीक्षा केवल लिखित टेस्ट नहीं बल्कि संपूर्ण प्रशिक्षण प्रदर्शन का हिस्सा होती है।

क्या परीक्षा में फेल होने पर नौकरी चली जाती है

यही सबसे बड़ा सवाल है।

आधिकारिक IAS (Probation) Rules, 1954 और IAS Probationers Final Examination Regulations, 1955 के अनुसार यदि कोई प्रोबेशनर किसी विषय में न्यूनतम अंक प्राप्त नहीं कर पाता, तो केंद्र सरकार उसे संबंधित विषय में री-एग्जाम देने की अनुमति दे सकती है। यानी पहली बार फेल होना अपने आप सेवा समाप्ति का आधार नहीं बनता। यदि अधिकारी री-एग्जाम भी पास नहीं कर पाता, तब नियमों के अनुसार उसे सेवा से हटाने या मूल सेवा में वापस भेजने जैसी कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है। इसके अलावा जानबूझकर प्रशिक्षण की उपेक्षा, अनुशासनहीनता, अयोग्यता या अन्य गंभीर कारण भी कार्रवाई का आधार बन सकते हैं।

RTI से क्या सामने आया

RTI से यह जानकारी सामने आई कि पिछले पांच वर्षों में 24 IAS प्रोबेशनर एक या अधिक परीक्षाओं में असफल हुए। इनमें 14 मामले केवल 2025 और 2026 के रहे। हालांकि उपलब्ध जानकारी यह नहीं कहती कि इन सभी अधिकारियों की नौकरी चली गई। रिपोर्टों के अनुसार अधिकांश मामलों में अधिकारी बाद में आवश्यक परीक्षाएं पास करने में सफल रहे।

आखिर किस परीक्षा में आती है कठिनाई

पूर्व और वर्तमान अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में बताया गया है कि कई बार राज्य कैडर की स्थानीय भाषा परीक्षा या कुछ विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल चुनौतीपूर्ण साबित होते हैं। यह कठिनाई केवल अकादमिक नहीं होती। नए अधिकारियों को सीमित समय में प्रशासनिक कार्य, फील्ड अटैचमेंट, शारीरिक प्रशिक्षण और नियमित मूल्यांकन के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।

क्या यह व्यवस्था बहुत सख्त है

एक पक्ष का कहना है कि यदि IAS अधिकारी देश के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर काम करेंगे तो प्रशिक्षण भी उसी स्तर का होना चाहिए। कठोर मूल्यांकन भविष्य के प्रशासनिक निर्णयों की गुणवत्ता सुनिश्चित करता है। दूसरा पक्ष मानता है कि अत्यधिक दबाव, लगातार मूल्यांकन और बहुआयामी प्रशिक्षण के कारण कुछ अधिकारी अस्थायी रूप से पिछड़ सकते हैं। ऐसे में री-एग्जाम का प्रावधान संतुलित व्यवस्था माना जाता है।

नियम क्या संदेश देते हैं

नियमों का उद्देश्य असफल उम्मीदवारों को तुरंत बाहर करना नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर अधिकारी न्यूनतम प्रशासनिक क्षमता हासिल करे। इसी कारण नियम पहले री-एग्जाम का अवसर देते हैं। केवल लगातार असफलता या गंभीर अनुशासनहीनता की स्थिति में कठोर कार्रवाई का रास्ता खुलता है।

भविष्य के उम्मीदवारों के लिए सबक

UPSC परीक्षा सफलता का अंतिम पड़ाव नहीं है। चयन के बाद भी प्रशिक्षण, अनुशासन, भाषा दक्षता, प्रशासनिक समझ और नेतृत्व क्षमता की लगातार परीक्षा होती है। LBSNAA की व्यवस्था यह स्पष्ट करती है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा केवल लिखित परीक्षा से नहीं, बल्कि व्यवहारिक क्षमता और सार्वजनिक उत्तरदायित्व से तय होती है। यही वजह है कि प्रोबेशन अवधि को भारतीय सिविल सेवा का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है।

 

24 प्रोबेशनरों के परीक्षा में असफल होने की खबर यह जरूर बताती है कि IAS प्रशिक्षण आसान नहीं है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि एक बार फेल होते ही नौकरी समाप्त हो जाती है। आधिकारिक नियम स्पष्ट हैं। पहले री-एग्जाम का अवसर मिलता है। अंतिम कार्रवाई केवल निर्धारित नियमों और परिस्थितियों के आधार पर होती है। इसलिए UPSC के बाद भी प्रशासनिक सफर निरंतर सीखने, मूल्यांकन और जवाबदेही की प्रक्रिया बना रहता है।

 

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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