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नींद पूरी न होने पर सेहत पर क्या असर पड़ता है? जानिए शरीर से दिमाग तक होने वाले बदलाव

Neelam Saini • 2026-09-10 13:32:36
नींद पूरी न होने पर सेहत पर क्या असर पड़ता है? जानिए शरीर से दिमाग तक होने वाले बदलाव

नींद पूरी न होने पर सेहत पर क्या असर पड़ता है? जानिए शरीर से दिमाग तक होने वाले बदलाव

नई दिल्ली। भागदौड़ भरी जिंदगी, देर रात तक मोबाइल का इस्तेमाल, काम का दबाव और अनियमित दिनचर्या के कारण नींद का समय लगातार कम हो रहा है। लेकिन नींद की कमी को सिर्फ सुबह की थकान या दिनभर की सुस्ती समझना सही नहीं है। वैज्ञानिक संस्थानों के अनुसार पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद शरीर तथा मस्तिष्क के सामान्य कामकाज के लिए बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों की सहमति के अनुसार स्वस्थ वयस्कों को नियमित तौर पर रात में कम से कम सात घंटे सोने की कोशिश करनी चाहिए। हालांकि नींद की व्यक्तिगत जरूरत उम्र, स्वास्थ्य, जीवनशैली और अन्य परिस्थितियों के आधार पर अलग हो सकती है। 

नींद पूरी न होने पर सबसे पहले क्या होता है?

कम नींद का असर कई बार अगले ही दिन दिखाई देने लगता है। व्यक्ति को दिन में नींद आना, थकान, सुस्ती, चिड़चिड़ापन और सतर्कता में कमी महसूस हो सकती है। शोध आधारित स्वास्थ्य जानकारी के मुताबिक नींद की कमी से ध्यान लगाने, सीखने, याद रखने और तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। लगातार कई रातों तक नींद कम होने पर काम पूरा करने में अधिक समय लग सकता है और गलतियां बढ़ सकती हैं। वाहन चलाने या ऐसी गतिविधियां करने में भी जोखिम बढ़ सकता है, जिनमें लगातार एकाग्रता और तेज प्रतिक्रिया की जरूरत होती है। 

दिमाग और याददाश्त पर पड़ता है असर

नींद के दौरान मस्तिष्क अगले दिन के लिए खुद को तैयार करता है। यह सीखने और याददाश्त से जुड़ी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पर्याप्त नींद न मिलने पर ध्यान केंद्रित करने, समस्या का समाधान करने और निर्णय लेने में परेशानी हो सकती है। यही वजह है कि लगातार देर रात तक जागने और सुबह जल्दी उठने की आदत व्यक्ति की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है। इसका असर पढ़ाई, नौकरी और रोजमर्रा के कामों तक दिखाई दे सकता है।

मूड और मानसिक स्वास्थ्य पर असर

नींद और मानसिक स्वास्थ्य का संबंध भी महत्वपूर्ण माना जाता है। लंबे समय तक नींद की समस्या या अपर्याप्त नींद का संबंध तनाव, चिंता और अवसाद जैसे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से पाया गया है। नींद कम होने पर व्यक्ति अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने में भी कठिनाई महसूस कर सकता है। छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन, बेचैनी या भावनात्मक थकान जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

वजन बढ़ने से भी जुड़ी है कम नींद

नींद की कमी शरीर में भूख और पेट भरे होने से जुड़े हार्मोन के संतुलन को प्रभावित कर सकती है। राष्ट्रीय हृदय, फेफड़ा और रक्त संस्थान के अनुसार कम नींद में भूख बढ़ने की प्रवृत्ति हो सकती है, जिससे वजन बढ़ने का जोखिम प्रभावित हो सकता है। लंबे समय तक अपर्याप्त नींद और मोटापे के बीच संबंध भी शोध में सामने आया है। हालांकि किसी व्यक्ति के वजन पर केवल नींद का असर नहीं होता; खान-पान, शारीरिक गतिविधि, आनुवंशिक और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारक भी महत्वपूर्ण होते हैं। 

ब्लड शुगर और मधुमेह का जोखिम

नींद शरीर के इंसुलिन और रक्त शर्करा नियंत्रण से भी जुड़ी है। पर्याप्त नींद न मिलने पर शरीर की ग्लूकोज संबंधी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और लंबे समय तक कम नींद लेना टाइप-२ मधुमेह के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा पाया गया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि कम नींद लेने से हर व्यक्ति को मधुमेह हो जाएगा, लेकिन लगातार अपर्याप्त नींद स्वास्थ्य जोखिमों में योगदान देने वाला एक कारक हो सकती है।

दिल और रक्तचाप पर भी पड़ सकता है असर

नींद के दौरान शरीर और हृदय-रक्तवाहिका तंत्र को आराम और पुनर्स्थापन का समय मिलता है। लगातार नींद की समस्या उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम से जुड़ी हुई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के अनुसार लंबे समय तक नींद की कमी हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और स्ट्रोक सहित कई दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम से जुड़ी है। 

रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो सकती है

नींद शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के सामान्य कामकाज में भी भूमिका निभाती है। लगातार नींद की कमी होने पर शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए बार-बार देर रात तक जागना और लगातार कम घंटे सोना केवल अगले दिन की थकान तक सीमित समस्या नहीं माना जाना चाहिए।

कितनी नींद जरूरी है?

अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन और स्लीप रिसर्च सोसाइटी की विशेषज्ञ सहमति के अनुसार वयस्कों को नियमित रूप से कम से कम सात घंटे सोना चाहिए। विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्वस्थ नींद के लिए केवल घंटे ही नहीं, बल्कि नींद की गुणवत्ता, नियमितता और सही समय भी महत्वपूर्ण हैं। बच्चों और किशोरों की नींद की जरूरत वयस्कों से अलग होती है और उनकी उम्र के अनुसार अधिक नींद आवश्यक होती है।

अच्छी नींद के लिए क्या करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर नींद की गुणवत्ता सुधारने के लिए कुछ सामान्य आदतें अपनाई जा सकती हैं—

* रोज लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करें।
* सोने से पहले मोबाइल और अन्य कृत्रिम रोशनी वाले उपकरणों का इस्तेमाल कम करें।
* दिन में पर्याप्त शारीरिक गतिविधि रखें।
* सुबह या दिन के शुरुआती हिस्से में प्राकृतिक रोशनी लें।
* सोने का कमरा शांत, अंधेरा और आरामदायक रखें।
* रात में बहुत भारी भोजन से बचें।
* लगातार नींद की समस्या होने पर चिकित्सकीय सलाह लें। 

कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?

अगर पर्याप्त समय बिस्तर पर रहने के बावजूद लगातार नींद पूरी न हो, दिन में अत्यधिक नींद आए, बार-बार नींद टूटे या खर्राटों के साथ सांस रुकने जैसी समस्या महसूस हो, तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नींद से जुड़े विकारों की पहचान और उपचार के लिए चिकित्सकीय परामर्श जरूरी हो सकता है।

निष्कर्ष

नींद शरीर के लिए रोजाना होने वाली प्राकृतिक पुनर्स्थापन प्रक्रिया है। लगातार कम नींद लेने से तत्काल तौर पर थकान, एकाग्रता और प्रतिक्रिया क्षमता प्रभावित हो सकती है, जबकि लंबे समय तक अपर्याप्त नींद मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय संबंधी समस्याओं और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के जोखिम से जुड़ी है। इसलिए व्यस्त दिनचर्या में नींद को समय की बर्बादी नहीं, बल्कि सेहत की बुनियादी जरूरत समझना जरूरी है।

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Neelam Saini

Neelam Saini

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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