दूध में जायफल मिलाकर पीने से क्या सच में मिलते हैं कई फायदे? जानिए विज्ञान क्या कहता है
नई दिल्ली। भारतीय घरों में दूध को कई तरह के मसालों और पारंपरिक सामग्री के साथ लेने की परंपरा रही है। इन्हीं में से एक है जायफल वाला दूध। खासकर रात में दूध में थोड़ी मात्रा में जायफल मिलाकर पीने की सलाह कई घरेलू नुस्खों में दी जाती है। इसके बारे में बेहतर नींद, पाचन और शरीर को आराम मिलने जैसे कई दावे किए जाते हैं।लेकिन सवाल यह है कि इन दावों के पीछे वैज्ञानिक प्रमाण कितने मजबूत हैं?
उपलब्ध वैज्ञानिक साहित्य से पता चलता है कि जायफल यानी Myristica fragrans में मायरीस्टिसिन सहित कई जैव-सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। इन यौगिकों पर प्रयोगशाला और पशु-अध्ययनों में एंटीऑक्सीडेंट तथा सूजन-रोधी जैसी संभावित गतिविधियों का अध्ययन किया गया है। हालांकि, इन परिणामों को सीधे मनुष्यों में जायफल वाला दूध पीने से होने वाले स्वास्थ्य लाभ के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
जायफल में कौन-से यौगिक पाए जाते हैं?
जायफल एक सुगंधित मसाला है, जिसमें मायरीस्टिसिन, मैसेलिग्नन, यूजेनॉल, सफरोल और अन्य जैव-सक्रिय घटक पाए जाते हैं। वैज्ञानिक समीक्षाओं में इन घटकों की विभिन्न जैविक गतिविधियों का अध्ययन किया गया है। हालांकि इनमें से कई निष्कर्ष इन-विट्रो या पशु-अध्ययनों से आए हैं और इन्हें मानव उपचार के प्रमाण के बराबर नहीं माना जा सकता।
क्या जायफल नींद में मदद करता है?
जायफल को पारंपरिक रूप से आराम और नींद से जोड़कर देखा जाता रहा है। कुछ वैज्ञानिक साहित्य में इसके संभावित शांतकारी प्रभावों का उल्लेख मिलता है, लेकिन उपलब्ध शोध के आधार पर यह कहना सही नहीं है कि जायफल वाला दूध अनिद्रा का प्रमाणित उपचार है।इसलिए अगर किसी व्यक्ति को लगातार नींद की समस्या है, तो केवल जायफल वाले दूध पर निर्भर रहने के बजाय समस्या के कारणों पर ध्यान देना और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना अधिक उचित है।
पाचन के लिए कितना फायदेमंद?
जायफल का पारंपरिक उपयोग पेट से जुड़ी कुछ परेशानियों में भी बताया गया है। वैज्ञानिक साहित्य में इसके विभिन्न जैविक प्रभावों का अध्ययन हुआ है, लेकिन मनुष्यों में जायफल वाला दूध पीने से पाचन संबंधी समस्याएं निश्चित रूप से ठीक होती हैं, ऐसा स्थापित करने के लिए पर्याप्त उच्च गुणवत्ता वाले क्लिनिकल प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
एंटीऑक्सीडेंट और सूजन-रोधी प्रभावों की बात कितनी सही?
जायफल और उसके घटकों पर किए गए कुछ प्रयोगशाला तथा पशु-अध्ययनों में एंटीऑक्सीडेंट और सूजन-रोधी गतिविधियां देखी गई हैं। मायरीस्टिसिन पर प्रकाशित एक समीक्षा में भी ऐसी संभावित जैविक गतिविधियों का उल्लेख है। लेकिन ये शुरुआती वैज्ञानिक निष्कर्ष हैं और इन्हें मनुष्यों में बीमारी की रोकथाम या उपचार का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
सबसे जरूरी बात: मात्रा का ध्यान रखें
जायफल को मसाले के रूप में बहुत कम मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है। अधिक मात्रा में इसका सेवन सुरक्षित नहीं माना जाता। जायफल में मौजूद मायरीस्टिसिन से जुड़े विषैले प्रभावों की रिपोर्ट वैज्ञानिक साहित्य में मिलती है।अधिक मात्रा में जायफल लेने से मतली, उल्टी, तेज धड़कन, बेचैनी, चक्कर, भ्रम और अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण हो सकते हैं। कुछ रिपोर्टों में गंभीर विषाक्तता भी दर्ज की गई है।
इसलिए जायफल को अधिक मात्रा में लेकर उसके कथित स्वास्थ्य लाभ पाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। जायफल का मसाले के रूप में सीमित इस्तेमाल और अधिक मात्रा में सेवन के बीच बड़ा अंतर है।
दूध और जायफल का संयोजन क्या कोई अलग वैज्ञानिक उपचार है?
उपलब्ध शोध से यह स्थापित नहीं होता कि दूध में जायफल मिलाने से जायफल के स्वास्थ्य प्रभाव निश्चित रूप से बढ़ जाते हैं। इसलिए इसे किसी बीमारी के इलाज या दवा के विकल्प के रूप में प्रचारित करना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा।
किन लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए?
बच्चों को जायफल की अधिक मात्रा देने से बचना चाहिए। गर्भावस्था, स्तनपान, किसी गंभीर बीमारी या नियमित दवाओं के सेवन की स्थिति में किसी भी घरेलू नुस्खे को नियमित रूप से अपनाने से पहले चिकित्सक से सलाह लेना उचित है।
निष्कर्ष
दूध में थोड़ी मात्रा में जायफल मिलाना एक पारंपरिक खाद्य संयोजन है, लेकिन इसके साथ जुड़े हर स्वास्थ्य दावे को वैज्ञानिक रूप से सिद्ध मानना सही नहीं है। जायफल में मौजूद कुछ यौगिकों पर शोध जरूर हुआ है और उनमें संभावित जैविक प्रभाव दिखाई दिए हैं, लेकिन मनुष्यों में जायफल वाला दूध नींद, पाचन या किसी बीमारी का इलाज करता है—ऐसा मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण अभी उपलब्ध नहीं है।
सबसे महत्वपूर्ण बात है मात्रा और सुरक्षा। जायफल को मसाले की तरह सीमित मात्रा में इस्तेमाल करना और इसे किसी बीमारी की दवा समझकर अधिक मात्रा में न लेना ही वैज्ञानिक रूप से सावधानीपूर्ण दृष्टिकोण है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।