ऑपरेशन ट्राइडेंट में 3 राज्यों के 38 ठिकानों पर कार्रवाई हुई। अमित शाह के मुताबिक 18 गिरफ्तारियां हुईं, 1,424 खाते फ्रीज किए गए और ₹100 करोड़ के हवाला लेनदेन का पता चला।
📍 असम, मिजोरम और मणिपुर
🗓️ 25 अक्टूबर 2026
✍️ Mohd Naved
ऑपरेशन ट्राइडेंट में क्या हुआ?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 25 अक्टूबर को ऑपरेशन ट्राइडेंट के तहत ड्रग तस्करी के एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी साझा की। उनके प्रकाशित बयान के मुताबिक केंद्रीय एजेंसियों और असम, मिजोरम तथा मणिपुर की पुलिस ने 23 अक्टूबर को 38 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। मकसद कथित तस्करी नेटवर्क और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन पर कार्रवाई करना था।
खातों और संपत्तियों तक पहुंची जांच
शाह के मुताबिक कार्रवाई में 1,424 बैंक खाते फ्रीज किए गए और ₹17.82 करोड़ की संपत्तियां अटैच की गईं। उन्होंने ₹100 करोड़ के हवाला लेनदेन का पता चलने की बात भी कही।
इन रकमों का मतलब अलग है। ₹100 करोड़ कथित लेनदेन का आंकड़ा है। इसे नकद बरामदगी या बरामद ड्रग्स की कीमत बताना गलत होगा। उपलब्ध विवरण में नकद बरामदगी ₹12 लाख बताई गई है।
कार्रवाई के प्रमुख आंकड़े
अमित शाह के प्रकाशित बयान के मुताबिक:
• 3 राज्यों में 38 ठिकानों पर छापेमारी हुई।
• 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
• 1,424 बैंक खाते फ्रीज किए गए।
• ₹100 करोड़ के हवाला लेनदेन का पता चला।
• ₹17.82 करोड़ की संपत्तियां अटैच की गईं।
• 500 डेटोनेटर और ₹12 लाख नकद बरामद हुए।
गृह मंत्री ने क्या बताया?
शाह ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय नार्को नेटवर्क के खिलाफ सफलता बताया। उनके मुताबिक कथित नेटवर्क भारत, म्यांमार और बांग्लादेश की सीमाओं के पार नशीले पदार्थों की तस्करी करता था। प्रकाशित बयान में इस रास्ते के लिए ‘डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर’ शब्द इस्तेमाल हुआ है।
इस नाम से किसी निश्चित आधिकारिक भौगोलिक सीमा की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री से नहीं हुई है। इसे गृह मंत्री के बयान में इस्तेमाल शब्द के तौर पर पढ़ा जाना चाहिए।
ऑपरेशन के नाम से आगे की तस्वीर
उपलब्ध बयान में केंद्रीय एजेंसियों और 3 राज्यों की पुलिस के साझा अभियान का जिक्र है। हालांकि प्रमुख जांच एजेंसी, आरोपियों की पहचान, दर्ज मामलों और प्रत्येक ठिकाने से हुई बरामदगी का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध नहीं है।
इसी वजह से ‘पूरा नेटवर्क खत्म’ होने को फिलहाल सरकारी आकलन के तौर पर पेश करना उचित है। कार्रवाई के स्थायी असर का आकलन आगे सामने आने वाले साक्ष्यों से होगा।
तारीखों का फर्क समझिए
छापेमारी की तारीख 23 अक्टूबर 2026 बताई गई है। इसकी जानकारी 25 अक्टूबर को सार्वजनिक हुई। इसलिए इसे 25 अक्टूबर को हुई छापेमारी लिखना सही नहीं होगा। शाह ने 31 दिसंबर 2029 तक ड्रग नेटवर्क खत्म करने का सरकारी लक्ष्य भी दोहराया है। यह घोषित लक्ष्य है, हासिल परिणाम नहीं।
किन सवालों के जवाब बाकी हैं?
फ्रीज किए गए खातों में कुल कितनी रकम है? कथित हवाला लेनदेन किस अवधि में हुआ? गिरफ्तार लोगों की भूमिकाएं क्या थीं? बरामद डेटोनेटरों का कथित ड्रग नेटवर्क से क्या संबंध है?
उपलब्ध सामग्री इन सवालों का पर्याप्त जवाब नहीं देती। डेटोनेटर मिलने के आधार पर किसी आतंकी संगठन से संबंध का निष्कर्ष निकालना भी उचित नहीं होगा।
आगे क्या होगा?
अगले अपडेट में खातों के मालिकाना संबंध, लेनदेन की अवधि, संपत्ति अटैचमेंट के आदेश और आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य अहम होंगे। उपलब्ध सामग्री में अगली सुनवाई, आरोपपत्र या किसी नई छापेमारी की निश्चित तारीख नहीं दी गई है।
कार्रवाई का निष्कर्ष
गृह मंत्री के बयान में गिरफ्तारी, बैंक खातों और संपत्तियों पर कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। कथित नेटवर्क की पूरी बनावट और प्रत्येक आरोपी की भूमिका पर विस्तृत जांच रिकॉर्ड का इंतजार है।
वित्तीय कार्रवाई क्यों अहम है?
इस अभियान का प्रमुख पहलू कथित तस्करी से जुड़े पैसों की आवाजाही तक पहुंचने का दावा है। संपादकीय आकलन में ऐसी जांच की सफलता इस बात से तय होगी कि खाते, रकम और आरोपियों के बीच संबंध कितने ठोस साक्ष्यों से स्थापित होते हैं।
आंकड़ों से आगे जवाबदेही
1,424 खातों की संख्या से उनके अलग-अलग मालिकों, उनमें जमा रकम या हर खाताधारक की भूमिका का पता नहीं चलता। इसी तरह ₹100 करोड़ के कथित लेनदेन और ₹17.82 करोड़ की अटैच संपत्तियों को जोड़कर कुल बरामदगी लिखना भ्रामक होगा।
अगली रिपोर्टिंग का पैमाना
आगे की कवरेज में एजेंसियों के दस्तावेज, आरोपियों का पक्ष और अदालती कार्यवाही को जगह मिलनी चाहिए। फिलहाल सरकारी बयान कार्रवाई का आधार बताता है, लेकिन पूरे नेटवर्क के स्थायी खात्मे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता।