उत्तर प्रदेश में मोहसिन रजा को राज्य अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। उन्हें कैबिनेट रैंक का दर्जा मिलेगा। रजा पहले योगी सरकार में मंत्री रह चुके हैं।
📍 लखनऊ
🗓️ 08 सितंबर 2026
✍️ Wasi Siddiqui
उत्तर प्रदेश की राजनीति में मोहसिन रजा को नई जिम्मेदारी मिलने की रिपोर्ट सामने आई है। रजा को राज्य अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है और उन्हें कैबिनेट रैंक का दर्जा दिए जाने की जानकारी दी गई है। यह नियुक्ति उन्हें प्रदेश की अल्पसंख्यक राजनीति और प्रशासनिक विमर्श में एक बार फिर अहम भूमिका में ले आती है।
मोहसिन रजा इससे पहले योगी आदित्यनाथ सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ और हज से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं।
मोहसिन रजा को मिली नई जिम्मेदारी
उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष पद पर मोहसिन रजा की नियुक्ति की गई है। इस पद के साथ उन्हें कैबिनेट रैंक का दर्जा दिए जाने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध सार्वजनिक सरकारी स्रोतों में इस नियुक्ति का अलग से आदेश इस रिपोर्ट के समय तक सामने नहीं मिला है। इसलिए नियुक्ति से जुड़ी जानकारी को आधिकारिक अधिसूचना के संदर्भ में देखना जरूरी होगा।
अल्पसंख्यक आयोग राज्य में अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े मुद्दों, अधिकारों और कल्याण से संबंधित मामलों पर संस्थागत स्तर पर काम करता है। आयोग की भूमिका में शिकायतों और नीतिगत विषयों पर सरकार के सामने मुद्दे रखना भी शामिल होता है।
मंत्री के तौर पर संभाल चुके हैं जिम्मेदारी
मोहसिन रजा लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा की सदस्यता ली थी और बाद में पार्टी प्रवक्ता की भूमिका भी निभाई। 2017 में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद उन्हें मंत्री बनाया गया।
अगस्त 2019 में उनके पास अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ और हज से जुड़े विभाग रहे। इससे पहले वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं।
वक्फ संपत्तियों का मुद्दा भी उठाया था
नई जिम्मेदारी से पहले मोहसिन रजा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार 12 अगस्त को हुई इस मुलाकात में उन्होंने उत्तर प्रदेश के वक्फ बोर्डों से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था।
रजा ने वक्फ संपत्तियों की जिला स्तर पर विशेष जांच और ऑडिट की मांग रखी थी। उन्होंने दावा किया था कि प्रदेश में पहले 2 लाख से अधिक पंजीकृत वक्फ संपत्तियां थीं, जबकि मौजूदा संख्या करीब 1.27 लाख रह गई है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए आधिकारिक जांच और रिकॉर्ड की पड़ताल जरूरी है।
उन्होंने पिछली सरकारों के दौरान वक्फ बोर्डों के ऑडिट में कमी का आरोप भी लगाया था। उनके मुताबिक बड़ी संख्या में संपत्तियां रिकॉर्ड से बाहर हुईं या उन पर अवैध कब्जे हुए। ये आरोप हैं, इसलिए इन्हें स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
क्रिकेट से राजनीति तक का सफर
मोहसिन रजा की सार्वजनिक पहचान राजनीति के साथ खेल और मनोरंजन से भी जुड़ी रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह रणजी ट्रॉफी में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। मॉडलिंग और अभिनय से भी उनका जुड़ाव रहा है। 1995 में उन्हें प्रिंस लखनऊ चुने जाने की जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट में दी गई है।
राजनीति में आने के बाद उनका सियासी सफर भाजपा के साथ आगे बढ़ा। मंत्री पद पर रहते हुए अल्पसंख्यक कल्याण और वक्फ से जुड़े विषय उनकी सार्वजनिक भूमिका का प्रमुख हिस्सा रहे।
कैबिनेट रैंक का क्या मतलब
कैबिनेट रैंक का दर्जा किसी आयोग या संस्थान के अध्यक्ष को सरकार में कैबिनेट मंत्री के समान प्रोटोकॉल और दर्जे से जुड़ी सुविधाएं देने से संबंधित होता है। इसका अर्थ यह नहीं होता कि संबंधित व्यक्ति राज्य मंत्रिपरिषद का सदस्य या संवैधानिक रूप से कैबिनेट मंत्री बन गया है।
मोहसिन रजा को मिलने वाले दर्जे की वास्तविक प्रशासनिक व्यवस्था संबंधित सरकारी आदेश और नियमों के आधार पर स्पष्ट होगी। इसलिए इसे सीधे कैबिनेट मंत्री की नियुक्ति के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
राजनीतिक संदर्भ
मोहसिन रजा की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में अल्पसंख्यक मतदाताओं और समुदाय से जुड़े मुद्दे लगातार राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बने हुए हैं। आयोग की नई कमान के साथ रजा की सार्वजनिक भूमिका फिर सक्रिय होगी।
हालांकि, इस नियुक्ति को सीधे किसी चुनावी रणनीति का हिस्सा बताना अभी जल्दबाजी होगी। सरकार की ओर से नियुक्ति के उद्देश्य और प्राथमिकताओं पर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने आने के बाद ही इसके राजनीतिक निहितार्थों का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।
आगे की चुनौती
मोहसिन रजा के सामने सबसे अहम चुनौती आयोग की संस्थागत भूमिका को प्रभावी बनाना होगी। अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े अधिकार, शिक्षा, रोजगार, वक्फ संपत्तियां और सरकारी योजनाओं तक पहुंच जैसे मुद्दे आयोग के सामने महत्वपूर्ण रहेंगे।
वक्फ संपत्तियों को लेकर उनके पहले के बयानों के मद्देनज़र इस विषय पर भी उनकी भूमिका पर नजर रहेगी। यदि किसी संपत्ति या रिकॉर्ड से संबंधित शिकायत सामने आती है तो उसके समाधान के लिए दस्तावेजी जांच और कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
क्या बदलेगा
मोहसिन रजा के पास सरकार के भीतर काम करने का पूर्व अनुभव है। मंत्री और विधान परिषद सदस्य के तौर पर उनकी पिछली भूमिका आयोग के कामकाज में प्रशासनिक अनुभव का आधार बन सकती है।
लेकिन आयोग की प्रभावशीलता केवल अध्यक्ष के राजनीतिक अनुभव से तय नहीं होगी। शिकायतों की सुनवाई, सरकारी विभागों के साथ समन्वय, नीतिगत सिफारिशों पर कार्रवाई और सार्वजनिक पारदर्शिता इसके अहम पैमाने होंगे।
मोहसिन रजा को उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग की कमान दिए जाने की रिपोर्ट ने राज्य की सियासत में उनकी वापसी को फिर चर्चा में ला दिया है। कैबिनेट रैंक का दर्जा इस जिम्मेदारी को प्रोटोकॉल और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अहम बनाता है।
अब निगाह आयोग की आगामी कार्यवाही और सरकार की आधिकारिक अधिसूचना पर रहेगी। खास तौर पर वक्फ, अल्पसंख्यक कल्याण और समुदाय से जुड़े शिकायत निवारण के मामलों में आयोग किस तरह की प्राथमिकताएं तय करता है, इससे उनकी नई भूमिका की दिशा स्पष्ट होगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।