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यूपी बोर्ड ऑनलाइन हाजिरी: 33 जिलों में सख्ती, 6 दिन की डेडलाइन

Apurva Choudhary • 2026-09-08 21:47:58
यूपी बोर्ड ऑनलाइन हाजिरी: 33 जिलों में सख्ती, 6 दिन की डेडलाइन
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने 33 जिलों में ऑनलाइन हाजिरी की कम अनुपालना पर सख्ती बढ़ाई है। संबंधित डीआईओएस को छह दिनों में सरकारी, सहायता प्राप्त और स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों में छात्रों, शिक्षकों तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की 100 प्रतिशत ऑनलाइन उपस्थिति सुनिश्चित करनी है। भदोही में अनुपालन शून्य रहा।

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📍 लखनऊ | 📰 8 सितंबर 2026 | ✍️ Apurva Choudhary 

33 जिलों में ऑनलाइन हाजिरी को लेकर सख्ती
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपीएमएसपी ने 33 जिलों में यूपी बोर्ड ऑनलाइन हाजिरी की बेहद कम अनुपालना के बाद जिला विद्यालय निरीक्षकों यानी डीआईओएस को छह दिन की समयसीमा दी है। निर्देश के मुताबिक सरकारी, अशासकीय सहायता प्राप्त और स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों में छात्रों, शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की 100 प्रतिशत दैनिक ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराना सुनिश्चित करना होगा। 
बोर्ड की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक इन 33 जिलों में ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने वाले विद्यालयों का अनुपात 10 प्रतिशत या उससे कम पाया गया। सबसे कम अनुपालन भदोही में दर्ज हुआ, जहां 196 विद्यालयों में से किसी ने भी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं की। 

छह दिन में अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश
यूपीएमएसपी ने संबंधित जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश दिया है कि वे अपने जिलों के सभी संबंधित माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू कराएं। बोर्ड के मुताबिक कम अनुपालन को उसके निर्देशों के पालन में कमी और निगरानी व्यवस्था की कमजोरी के संकेत के तौर पर देखा गया है।
बोर्ड की वेबसाइट पर भी छात्रों, शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की प्रतिदिन ऑनलाइन उपस्थिति को आवश्यक प्रक्रिया के तौर पर दर्ज किया गया है। वेबसाइट पर अलग डेली अटेंडेंस व्यवस्था और उपस्थिति पोर्टल उपलब्ध है। 

किन जिलों में अनुपालन सबसे कम रहा
बोर्ड के जिला-वार आंकड़ों में भदोही सबसे नीचे है। वहां 196 विद्यालयों में शून्य विद्यालयों ने ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की। उन्नाव में 417 में से दो विद्यालयों ने उपस्थिति दर्ज की, जो 0.48 प्रतिशत है।
मिर्जापुर में 308 में से तीन विद्यालयों ने, फर्रुखाबाद में 283 में से तीन और सहारनपुर में 351 में से चार विद्यालयों ने ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की। प्रयागराज में 1,110 विद्यालयों में 17 विद्यालयों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज हुई, जो 1.53 प्रतिशत है। 
आगरा में 920 में से 53 विद्यालयों ने ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की, जबकि अलीगढ़ में 808 में से 78 विद्यालयों ने यह प्रक्रिया पूरी की। इन आंकड़ों से पता चलता है कि कई जिलों में ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था का इस्तेमाल अभी सीमित स्तर पर ही हुआ है। 

33 जिलों की पूरी सूची
कम अनुपालन वाले जिलों में भदोही, उन्नाव, मिर्जापुर, फर्रुखाबाद, सहारनपुर, गोंडा, प्रयागराज, चित्रकूट, चंदौली, कानपुर नगर, मैनपुरी, सिद्धार्थनगर, आगरा, बलिया, सोनभद्र, हमीरपुर, आजमगढ़ और कौशांबी शामिल हैं।
इसके अलावा कानपुर देहात, जौनपुर, सुल्तानपुर, फतेहपुर, गाजीपुर, हाथरस, बुलंदशहर, लखनऊ, बांदा, हरदोई, अलीगढ़, फिरोजाबाद, बहराइच, देवरिया और गोरखपुर भी बोर्ड की सूची में हैं। इन सभी जिलों में ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने वाले विद्यालयों का अनुपात 10 प्रतिशत या उससे कम रहा। 

व्यवस्था पहले से बोर्ड के डिजिटल सिस्टम का हिस्सा
यह निर्देश किसी नई डिजिटल अवधारणा की शुरुआत भर नहीं है। यूपीएमएसपी की आधिकारिक वेबसाइट पर छात्रों, शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की प्रतिदिन ऑनलाइन उपस्थिति के लिए अलग व्यवस्था मौजूद है और विद्यालयों के लिए उपस्थिति पोर्टल भी उपलब्ध है। 
बोर्ड की ऑनलाइन व्यवस्था का उद्देश्य विद्यालयों से संबंधित रिकॉर्ड को डिजिटल तरीके से दर्ज करना और प्रशासनिक निगरानी को आसान बनाना है। हालांकि उपलब्ध आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि चिन्हित जिलों में व्यवस्था के वास्तविक इस्तेमाल और रिपोर्टिंग के स्तर में बड़ा अंतर बना हुआ है।

कम अनुपालन का मतलब क्या है?
यहां एक अहम फर्क समझना जरूरी है। उपलब्ध जिला-वार आंकड़े मुख्य तौर पर यह बताते हैं कि कितने विद्यालयों ने ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की; इन्हें सीधे छात्रों या शिक्षकों की वास्तविक भौतिक उपस्थिति का प्रतिशत नहीं माना जा सकता। इसलिए कम ऑनलाइन रिपोर्टिंग को सीधे स्कूलों में कम छात्र उपस्थिति के बराबर मानना उचित नहीं होगा।
बोर्ड ने खुद कम ऑनलाइन उपस्थिति को निर्देशों के अनुपालन और पर्यवेक्षण से जोड़ा है। इसलिए मौजूदा कार्रवाई का सीधा केंद्र डिजिटल रिपोर्टिंग व्यवस्था को लागू कराना है, न कि उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर प्रत्येक विद्यालय की वास्तविक कक्षा-उपस्थिति पर निष्कर्ष निकालना। 

डीआईओएस की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
जिला विद्यालय निरीक्षक माध्यमिक विद्यालयों की जिला-स्तरीय प्रशासनिक निगरानी में अहम भूमिका निभाते हैं। इस मामले में यूपीएमएसपी ने सीधे संबंधित डीआईओएस को छह दिन के भीतर 100 प्रतिशत ऑनलाइन उपस्थिति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी है। 
हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक बोर्ड ने कम अनुपालन को निर्देशों की अनदेखी और शिथिल पर्यवेक्षण से जोड़ते हुए संबंधित अधिकारियों के स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टिंग में इस चरण पर किसी विशिष्ट डीआईओएस के खिलाफ अंतिम दंडात्मक कार्रवाई का विस्तृत आदेश सामने नहीं आया है। 

छात्रों और शिक्षकों पर क्या असर पड़ेगा?
स्कूलों को निर्धारित वेब पोर्टल या मोबाइल ऐप के माध्यम से नियमित ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करनी होगी। व्यवस्था छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों पर भी लागू है। 
छात्रों के लिए इसका सबसे प्रत्यक्ष असर यह है कि उनकी दैनिक उपस्थिति अब डिजिटल रिकॉर्ड का हिस्सा बनेगी। शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के मामले में भी स्कूल स्तर पर नियमित ऑनलाइन रिपोर्टिंग अपेक्षित होगी।
हालांकि उपलब्ध निर्देशों में इस खबर के आधार पर छात्रों के लिए किसी नए परीक्षा-नियम, उपस्थिति प्रतिशत की नई पात्रता सीमा या तत्काल दंड का अलग प्रावधान घोषित होने की पुष्टि नहीं होती। इसलिए इन पहलुओं को इस आदेश से जोड़कर देखना फिलहाल उचित नहीं होगा।
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Apurva Choudhary

Apurva Choudhary

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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