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लोहाघाट-पिथौरागढ़ हादसा: 250 मीटर खाई में गिरी कार में आग, 2 की मौत

Shahana 2026-06-20 11:00:25
लोहाघाट-पिथौरागढ़ हादसा: 250 मीटर खाई में गिरी कार में आग, 2 की मौत
शुक्रवार को चंपावत जिले के लोहाघाट-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक कार बंतोली गांव के पास अनियंत्रित होकर करीब 250 मीटर गहरी खाई में गिर गई और उसमें आग लग गई। हादसे में चालक समेत दो लोगों की मौके पर मौत हो गई, जबकि एक महिला और दो बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस, फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ की टीम ने राहत-बचाव अभियान चलाकर घायलों को खाई से बाहर निकाला। सभी घायलों का इलाज उप जिला चिकित्सालय लोहाघाट में जारी है और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

हादसे ने हिला दी पहाड़ की शांत दोपहर

उत्तराखंड के चंपावत जिले में शुक्रवार की दोपहर अचानक चीख-पुकार और धुएं के गुबार से भर गई, जब लोहाघाट-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक कार गहरी खाई में गिरकर आग की लपटों में घिर गई। यह हादसा इतना भीषण था कि मौके पर ही दो लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि तीन अन्य जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। पहाड़ों की शांत सड़कों पर ऐसे हादसे एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्थाओं और ड्राइविंग परिस्थितियों पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

क्या हुआ उस घातक मोड़ पर

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हल्द्वानी से पिथौरागढ़ जिले के कनालीछीना की ओर जा रही एक कार जैसे ही मरोड़ाखान से लगभग दो किलोमीटर आगे बंतोली गांव के पास पहुंची, अचानक अनियंत्रित हो गई। देखते ही देखते वाहन सड़क से फिसलकर लगभग 250 मीटर गहरी खाई में जा गिरा।

खाई में गिरने के बाद कार में जोरदार धमाका हुआ और वाहन आग की चपेट में आ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुर्घटना के बाद कुछ ही सेकंड में कार पूरी तरह जलने लगी, जिससे अंदर फंसे लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका।

कौन थे हादसे के शिकार

इस दर्दनाक हादसे में वाहन चालक राजेन्द्र कुमार (48), निवासी डीडीहाट, की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं कार में सवार बलदेव कुमार (36), निवासी कनालीछीना, भी आग की चपेट में आने से गंभीर रूप से झुलस गए और उन्होंने भी दम तोड़ दिया।

हादसे में बलदेव कुमार की पत्नी नीतू देवी (36), उनकी 8 वर्षीय बेटी अक्षिता और 5 वर्षीय पुत्र आरव गंभीर रूप से घायल हो गए। तीनों को गंभीर चोटों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

राहत-बचाव में समय से लड़ाई

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। खाई की गहराई और आग की तीव्रता के कारण बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण था। स्थानीय लोगों की मदद से राहत टीमों ने किसी तरह घायलों को बाहर निकाला।

घायलों को तत्काल उप जिला चिकित्सालय लोहाघाट ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उनकी लगातार निगरानी कर रही है। चिकित्सकों के अनुसार, तीनों की हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें विशेष चिकित्सा देखभाल की जरूरत है।

क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे हादसे

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में सड़क हादसे कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन हाल के वर्षों में इनकी संख्या और गंभीरता दोनों बढ़ी है। संकरी सड़कें, तीखे मोड़, खराब मौसम और ओवरस्पीडिंग जैसे कारक अक्सर ऐसे हादसों का कारण बनते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में ड्राइविंग के लिए अलग तरह की सतर्कता और अनुभव की जरूरत होती है, जो कई बार नजरअंदाज कर दी जाती है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच

हादसे के बाद प्रशासन ने तुरंत जांच के आदेश दे दिए हैं। शुरुआती जांच में वाहन के अनियंत्रित होने को कारण माना जा रहा है, लेकिन तकनीकी खराबी या ड्राइवर की गलती जैसे पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और परिजनों को सूचना दे दी गई है। प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।

सवालों के घेरे में सड़क सुरक्षा

यह हादसा एक बार फिर उत्तराखंड की सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। क्या पहाड़ी मार्गों पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम हैं? क्या ड्राइवरों को पर्याप्त प्रशिक्षण दिया जाता है? क्या वाहनों की फिटनेस जांच सही तरीके से हो रही है?

इन सवालों के जवाब तलाशना जरूरी है, क्योंकि हर साल ऐसे हादसे कई परिवारों को उजाड़ देते हैं।

स्थानीय लोगों की पीड़ा

घटना के बाद स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश और दुख है। उनका कहना है कि इस मार्ग पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन सुरक्षा के ठोस कदम अब तक नहीं उठाए गए हैं।

लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस क्षेत्र में सुरक्षा रेलिंग, चेतावनी संकेत और नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

आगे क्या

फिलहाल तीनों घायलों का इलाज जारी है और उनकी हालत पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और उम्मीद है कि जल्द ही हादसे के कारणों का खुलासा होगा।

लेकिन यह हादसा सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक चेतावनी है—पहाड़ी सड़कों पर जरा सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।

लोहाघाट-पिथौरागढ़ मार्ग पर हुआ यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि सड़क सुरक्षा केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि जीवन की सुरक्षा का सवाल है। जब तक प्रशासन और आम लोग मिलकर इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाते, तब तक ऐसी त्रासदियां बार-बार दोहराई जाती रहेंगी।

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Shahana

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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