तेज होती गर्मी और बढ़ते बिजली बिल के बीच सोलर AC अब केवल एक तकनीकी विकल्प नहीं रह गया है, बल्कि ऊर्जा बचत का व्यावहारिक समाधान बनता दिखाई दे रहा है। दूसरी ओर, शहरों में AC इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार सार्वजनिक परिवहन को अधिक आरामदायक और कम प्रदूषण वाला बनाने की कोशिश का हिस्सा है। केंद्र और कई राज्य सरकारें इन दोनों क्षेत्रों में वित्तीय सहायता और प्रोत्साहन योजनाओं के जरिए बदलाव को गति देने का प्रयास कर रही हैं।
सोलर AC ऐसी प्रणाली है जो सौर पैनलों से उत्पन्न बिजली का उपयोग करके एयर कंडीशनर चलाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती निवेश पारंपरिक AC की तुलना में अधिक होता है, लेकिन लंबे समय में बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। खासकर उन इलाकों में जहां धूप पर्याप्त मिलती है, यह मॉडल अधिक प्रभावी माना जाता है।
केंद्र सरकार की PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत पात्र परिवारों को रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने पर निर्धारित शर्तों के अनुसार वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कुछ श्रेणियों में कुल सहायता ₹78,000 तक पहुंच सकती है। उत्तर प्रदेश सहित कुछ राज्य अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दे रहे हैं। हालांकि वास्तविक सहायता राज्य, क्षमता और पात्रता के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि नेट मीटरिंग व्यवस्था सोलर सिस्टम की आर्थिक उपयोगिता बढ़ाती है। यदि उपभोक्ता की जरूरत से अधिक बिजली पैदा होती है तो उसे ग्रिड में भेजा जा सकता है। संबंधित राज्य की नीति के अनुसार इसका वित्तीय लाभ भी प्राप्त हो सकता है। यही कारण है कि कई परिवार सोलर सिस्टम को केवल बिजली बचत नहीं, बल्कि दीर्घकालिक निवेश के रूप में भी देखने लगे हैं।
सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र में भी बड़े बदलाव दिखाई दे रहे हैं। विभिन्न राज्यों में AC इलेक्ट्रिक बसों का संचालन लगातार बढ़ाया जा रहा है। इन बसों का उद्देश्य यात्रियों को आरामदायक यात्रा उपलब्ध कराने के साथ प्रदूषण और डीजल पर निर्भरता कम करना है। दिल्ली सरकार ने अपने सार्वजनिक परिवहन बेड़े में हजारों नई AC लो-फ्लोर इलेक्ट्रिक बसें शामिल करने की दिशा में काम तेज किया है। इसी तरह उत्तर प्रदेश के कई शहरों में भी इलेक्ट्रिक AC बस सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है।
इलेक्ट्रिक AC बसों में सफर अपेक्षाकृत शांत, कम कंपन वाला और वातानुकूलित होता है। कुछ मार्गों पर किराया भी प्रतिस्पर्धी रखा गया है ताकि अधिक लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। कई योजनाओं में डिजिटल टिकटिंग और कॉमन मोबिलिटी कार्ड के जरिए अतिरिक्त प्रोत्साहन भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
सोलर AC को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसकी शुरुआती लागत है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि उपभोक्ता केवल शुरुआती कीमत को देखे तो यह महंगा विकल्प लग सकता है। लेकिन 15 से 20 वर्ष की संभावित सोलर पैनल आयु, बिजली बिल में कमी और सरकारी सहायता को जोड़कर देखने पर इसकी आर्थिक तस्वीर बदल जाती है। इसके बावजूद सभी घरों के लिए यह समान रूप से उपयुक्त नहीं है। पर्याप्त छत, धूप की उपलब्धता, स्थानीय डिस्कॉम की नेट मीटरिंग नीति और स्थापना लागत जैसे कई कारक अंतिम निर्णय को प्रभावित करते हैं।
ऊर्जा और परिवहन दोनों क्षेत्रों में सौर ऊर्जा तथा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने का एक बड़ा उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन कम करना है। यदि बिजली उत्पादन में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ती है और डीजल बसों की जगह इलेक्ट्रिक बसें लेती हैं तो शहरी प्रदूषण में कमी आने की संभावना बढ़ती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि इलेक्ट्रिक वाहनों की वास्तविक पर्यावरणीय सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि चार्जिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली कितनी स्वच्छ ऊर्जा से तैयार की जा रही है।
भारत में ऊर्जा संक्रमण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। सरकारें रूफटॉप सोलर, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ऊर्जा दक्षता को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में आगे बढ़ा रही हैं। आने वाले वर्षों में यदि तकनीक की कीमतें और घटती हैं तथा सब्सिडी योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो सोलर AC और AC इलेक्ट्रिक बसें आम लोगों के लिए अधिक सुलभ हो सकती हैं।
सोलर AC और AC इलेक्ट्रिक बसें केवल नई तकनीक नहीं हैं, बल्कि ऊर्जा बचत, स्वच्छ पर्यावरण और कम परिचालन लागत की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही हैं। हालांकि किसी भी निवेश से पहले उपभोक्ताओं को स्थानीय सरकारी नियम, पात्रता, सब्सिडी की शर्तें और वास्तविक स्थापना लागत की जांच अवश्य करनी चाहिए। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि सही योजना और उचित जानकारी के साथ यह बदलाव लंबे समय में आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टि से लाभकारी साबित हो सकता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।