
Shah Times special geopolitical report on China and Pakistan during Operation Sindoor
भारत ने चीन-पाकिस्तान रिश्तों पर दिया बड़ा संदेश
ऑपरेशन सिंदूर से खुला नया China-Pakistan एंगल
भारत ने पहली बार खुलकर उन रिपोर्ट्स पर प्रतिक्रिया दी है जिनमें दावा किया गया कि मई 2025 के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान चीन ने पाकिस्तान को ग्राउंड लेवल पर मदद दी थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सीधे टकराव वाली भाषा से बचते हुए “ज़िम्मेदार देशों” को क्षेत्रीय स्थिरता और आतंकवाद पर गंभीर रुख अपनाने की नसीहत दी। इस बयान ने South Asia की बदलती Geo-Political तस्वीर और China-Pakistan Strategic Partnership पर नई बहस छेड़ दी है।
📍New Delhi📰12 May 2026✍️Asif Khan
ऑपरेशन सिंदूर और चीन-पाकिस्तान कनेक्शन पर भारत का बड़ा डिप्लोमैटिक संदेश
South Asia की सियासत में एक नया तनाव उस वक्त सामने आया जब चीन ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर यह माना कि मई 2025 में भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उसने पाकिस्तान को “ग्राउंड लेवल” पर मदद दी थी। यह कबूलनामा केवल एक Diplomatic Statement नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पूरे रीजन में बदलते Strategic Equation के तौर पर देखा जा रहा है।
नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक ब्रीफिंग के दौरान प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से जब इस मुद्दे पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने बेहद संतुलित लेकिन सख्त अंदाज़ में जवाब दिया। उन्होंने किसी देश का नाम लिए बिना कहा कि ज़िम्मेदार राष्ट्रों को क्षेत्रीय स्थिरता, संप्रभुता और आतंकवाद जैसे मसलों पर गंभीरता और स्थिर नीति दिखानी चाहिए।
भारत की प्रतिक्रिया में सीधे आरोपों की बजाय Diplomacy का दबाव साफ दिखाई दिया। यही वजह है कि यह बयान केवल एक औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं बल्कि एक Strategic Signal माना जा रहा है।
आखिर क्या था ‘ऑपरेशन सिंदूर’?
‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर आधिकारिक जानकारी अब भी सीमित है। हालांकि सुरक्षा और Foreign Policy से जुड़े विश्लेषकों के मुताबिक यह भारत की एक संवेदनशील Strategic Response कार्रवाई थी, जिसका संबंध सीमाई सुरक्षा, Cross-Border Threat Monitoring और Regional Security Dynamics से जोड़ा गया।
मई 2025 के दौरान South Asia में जिस तरह का तनाव बना था, उसने भारत, पाकिस्तान और चीन के त्रिकोणीय रिश्तों को फिर से अंतरराष्ट्रीय चर्चा में ला दिया। उसी दौरान कई रिपोर्ट्स सामने आईं जिनमें दावा किया गया कि चीन ने पाकिस्तान को Tactical Support, Intelligence Coordination और कुछ Ground-Level Inputs उपलब्ध कराए।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से अभी तक सामने नहीं आई है। लेकिन चीन की ओर से “मदद” स्वीकार किए जाने की खबर ने बहस को और गहरा कर दिया।
चीन का यह बयान क्यों अहम माना जा रहा है?
भारत और चीन के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में लगातार तनावपूर्ण रहे हैं। गलवान संघर्ष के बाद से दोनों देशों के बीच भरोसे का संकट बना हुआ है। Border Talks के बावजूद Strategic Competition खत्म नहीं हुई।
ऐसे माहौल में अगर चीन सार्वजनिक रूप से यह संकेत देता है कि उसने पाकिस्तान की सहायता की, तो इसे केवल दो देशों की दोस्ती के तौर पर नहीं देखा जाएगा। यह South Asia में बदलते Power Alignment की तरफ इशारा करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अब केवल आर्थिक ताकत नहीं बल्कि Regional Security Architecture का बड़ा खिलाड़ी बनना चाहता है। पाकिस्तान इस रणनीति में उसका अहम साझेदार माना जाता है।
भारत ने सीधे आरोप क्यों नहीं लगाए?
यह सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है। अगर चीन ने वास्तव में पाकिस्तान की मदद की, तो भारत ने खुलकर उसका नाम क्यों नहीं लिया?
इसके पीछे कई Diplomatic कारण माने जा रहे हैं।
पहला कारण यह है कि भारत फिलहाल दो मोर्चों पर खुला तनाव नहीं चाहता। एक तरफ पाकिस्तान के साथ पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां हैं, दूसरी तरफ चीन के साथ सीमा विवाद और Economic Competition जारी है।
दूसरा कारण BRICS, SCO और Global South Diplomacy से जुड़ा है। भारत और चीन कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साथ भी काम करते हैं। ऐसे में नई दिल्ली फिलहाल Controlled Messaging की नीति अपनाती दिखाई दे रही है।
तीसरा कारण यह भी है कि भारत बिना सार्वजनिक प्रमाणों के सीधे आरोप लगाने से बचना चाहता है, ताकि उसकी Diplomatic Credibility बनी रहे।
China-Pakistan Partnership कितनी गहरी है?
चीन और पाकिस्तान की साझेदारी दशकों पुरानी है, लेकिन पिछले दस वर्षों में यह रिश्ता कहीं ज्यादा Strategic हो गया है।
China-Pakistan Economic Corridor यानी CPEC ने दोनों देशों को आर्थिक और सुरक्षा स्तर पर और करीब ला दिया। इसके अलावा Military Technology Sharing, Joint Exercises, Surveillance Systems और Defence Cooperation लगातार बढ़ा है।
भारत की चिंता यह है कि अगर भविष्य में किसी Regional Conflict के दौरान चीन खुलकर पाकिस्तान का समर्थन करता है, तो South Asia का Strategic Balance बदल सकता है।
यही वजह है कि नई दिल्ली अब चीन-पाकिस्तान संबंधों को केवल Bilateral Friendship के रूप में नहीं देख रही।
क्या South Asia में नया Strategic Bloc बन रहा है?
कई Foreign Policy Analysts का मानना है कि South Asia धीरे-धीरे नए Power Bloc की तरफ बढ़ रहा है। एक तरफ भारत अपने Strategic Relations अमेरिका, फ्रांस, जापान और Middle East देशों के साथ मजबूत कर रहा है। दूसरी तरफ चीन पाकिस्तान के साथ अपनी Security Partnership गहरी कर रहा है।
हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि कोई औपचारिक सैन्य गठबंधन बन चुका है, लेकिन Geo-Political Alignment की दिशा जरूर बदलती दिखाई दे रही है।
यही कारण है कि भारत अब Regional Diplomacy पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव जैसे देशों के साथ लगातार Engagement बढ़ाई जा रही है।
बांग्लादेश और BRICS का संदर्भ क्यों जुड़ा?
विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग में बांग्लादेश के विरोध प्रदर्शनों और BRICS से जुड़े सवाल भी उठे। इससे साफ संकेत मिलता है कि भारत South Asia की पूरी Regional Situation को एक बड़े Strategic Framework में देख रहा है।
बांग्लादेश भारत के लिए केवल पड़ोसी देश नहीं बल्कि पूर्वी क्षेत्र की सुरक्षा और Connectivity Strategy का अहम हिस्सा है। अगर South Asia में चीन का प्रभाव और बढ़ता है तो भारत के लिए Regional Influence बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
BRICS के भीतर भी भारत और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा छिपी नहीं है। दोनों Global South Leadership की राजनीति में खुद को अहम शक्ति के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं।
क्या चीन की भूमिका को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है?
कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि मीडिया और Strategic Circles में चीन की भूमिका को जरूरत से ज्यादा बड़ा दिखाया जा रहा है। उनका तर्क है कि चीन और पाकिस्तान के करीबी रिश्ते कोई नई बात नहीं हैं।
वे यह भी कहते हैं कि “ग्राउंड लेवल सपोर्ट” का मतलब जरूरी नहीं कि सैन्य हस्तक्षेप ही हो। यह Diplomatic Coordination, Intelligence Sharing या तकनीकी सहायता तक सीमित भी हो सकता है।
यही वजह है कि अभी तक इस पूरे मामले को लेकर कई सवाल अनसुलझे हैं।
भारत के लिए सबसे बड़ा संदेश क्या है?
इस पूरे घटनाक्रम से भारत के सामने सबसे बड़ा सवाल Regional Preparedness का है। South Asia अब Traditional Warfare से ज्यादा Hybrid Strategy के दौर में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है।
अब युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं बल्कि साइबर नेटवर्क, Surveillance Systems, Intelligence Data और Diplomatic Pressure के स्तर पर भी लड़े जाते हैं।
भारत पिछले कुछ वर्षों में Defence Modernization, Border Infrastructure और International Partnerships पर तेजी से काम कर रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में यह प्रक्रिया और तेज हो सकती है।
भविष्य की राजनीति किस दिशा में जाएगी?
आने वाले महीनों में India-China-Pakistan समीकरण South Asia की सबसे बड़ी Geo-Political Story बन सकते हैं। खासकर अगर क्षेत्रीय तनाव बढ़ता है या नई Strategic Information सामने आती है।
भारत की कोशिश होगी कि वह अपनी Diplomacy को संतुलित रखते हुए International Support मजबूत करे। वहीं चीन South Asia में अपना प्रभाव बनाए रखने की कोशिश जारी रखेगा।
पाकिस्तान के लिए भी यह संतुलन आसान नहीं होगा। उसे एक तरफ चीन के साथ रिश्ते मजबूत रखने हैं, दूसरी तरफ International Pressure और Regional Stability के सवालों का सामना भी करना होगा।
सम्पादकीय दृष्टिकोण
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान को चीन से मदद मिलने की बात केवल एक Diplomatic Controversy नहीं है। यह South Asia की बदलती शक्ति राजनीति, Strategic Trust Deficit और Regional Competition की गहरी कहानी भी है।
भारत ने इस मुद्दे पर संयमित लेकिन स्पष्ट प्रतिक्रिया देकर संकेत दिया है कि वह हर Regional Development पर करीब से नजर रख रहा है। हालांकि कई दावे अब भी सार्वजनिक रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं, लेकिन इतना साफ है कि China-Pakistan Partnership अब भारत की Foreign Policy Calculations में पहले से कहीं ज्यादा अहम हो चुकी है।
आने वाले समय में यह मामला केवल Security Debate नहीं बल्कि South Asia के भविष्य के Power Structure को भी प्रभावित कर सकता है।





