ताजिकिस्तान सरकार ने हिजाब को किया बैन

Tajikistan government banned hijab shahtimesnews
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हिजाब और बुर्के को लेकर भारत ही नहीं बल्कि कई अन्य देशों में भी बहस चल रही है। कई देशों ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया है जबकि कई देशों में इस मुद्दे पर विचार किया जा रहा है। इस बीच मध्य एशिया के मुस्लिम देश ताजिकिस्तान ने हिजाब को लेकर बड़ा फैसला लिया है।

~ Neelam Saini

New Delhi ,( Shah Times)। मुस्लिम बहुल देश ताजिकिस्तान ने हिजाब के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इसके अलावा देश में ईद के त्योहार पर बच्चों को दी जाने वाली ईदी को भी बैन कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति इमोमाली रहमान ने हिजाब को विदेशी परिधान बताते हुए उसे प्रतिबंधित कर दिया।

दुनियां में सिर्फ भारत में ही नहीं बालकिकाई देशों में हिजाब और बुर्के को लेकर बहस छिड़ी हुई है। कई देशों ने इस पर बैन लगा दिया है तो कई देशों में इस मुद्दे पर विचार किया जा रहा है। इसी बीच मध्य एशिया के मुस्लिम देश ताजिकिस्तान ने हिजाब को लेकर बड़ा फैसला लिया है। देश की संसद ने हिजाब और बुर्का जैसे इस्लामिक पहनावे पर रोक लगाने के लिए कानून पारित कर दिया। बिल पास होने के बाद ताजिकिस्तान की सरकार अब हिजाब और बुर्का बैन को लागू करने जा रही है। हालांकि, इससे पूरे देश में हड़कंप मच गया है।

देश में कानून पारित होने से पहले कई जगह विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिल रहे हैं। सोवियत संघ से अलग हुआ ताजिकिस्तान एक मुस्लिम बाहुल्य देश है। इस देश की सीमा तालिबान शासित अफगानिस्तान से भी मिलती है। इन देशों के पड़ोसी होने के कारण ये आशंका जताई जा रही है कि कानून लागू होने के बाद विवाद बढ़ सकता है।

आपको बता दें कि अफगानिस्तान में बुर्का पहनना अनिवार्य माना गया है। जबकि ताजिकिस्तान की संसद में 19 जून को ये विधेयक पारित किया गया। इसमें ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा के वक्त बच्चों को विदेशी पहनावे पर रोक लगाने का कानूनी प्रावधान भी है। यह कानून दोनों सदनों में पारित कर दिया गया। विधेयक में विदेशी परिधानों को पहनने पर रोक की सिफारिश हुई थी।

विधेयक को लेकर ये बाते सामने आई है कि ताजिकिस्तान संसद में कहा गया कि बुर्का जो महिलाओं के चेहरे को ढकता है वो देश की परंपरा और संस्कृति का हिस्सा नहीं है। इसकी वजह है कि ऐसे विदेशी पहनावे को उनके देश में रोक लगाई जाती है।

जानकारी के अनुसार नए कानून का पालन न करने पर 60 हजार से 5 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। वहीं अगर कोई धार्मिक या सरकारी अधिकारी इस कानून का पालन नहीं करेगा तो उस पर 3-5 लाख तक का फाइन लगाया जाएगा। तजाकिस्तान की न्यूज एजेंसी एशिया-प्लस के मुताबिक, सरकार ने ये कदम देश में धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देने के लिए उठाए हैं।

तजाकिस्तान सरकार के फैसले की पूरे देश में आलोचना हो रही है। मानवाधिकार संगठनों समेत मुस्लिमों से जुड़े कई ग्रुप्स ने नए कानून का विरोध किया है। तजाकिस्तान में हिजाब के खिलाफ कानून भले ही अब बनाया गया है लेकिन देश में लंबे समय से इस पर अनाधिकारिक बैन लगा हुई है।

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