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द्वारका एक्सप्रेसवे सुरंग को मंजूरी, दक्षिण दिल्ली की तस्वीर बदलेगी?

Apurva Choudhary 2026-07-01 11:36:54
द्वारका एक्सप्रेसवे सुरंग को मंजूरी, दक्षिण दिल्ली की तस्वीर बदलेगी?
दिल्ली में द्वारका एक्सप्रेसवे सुरंग परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल गई है। लगभग 6970 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना पश्चिम और दक्षिण दिल्ली के बीच यात्रा को तेज बनाने का दावा करती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नई सड़कें बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि सार्वजनिक परिवहन और ट्रैफिक प्रबंधन सुधार भी उतने ही महत्वपूर्ण होंगे।

📍 नई दिल्ली
📰 01 जुलाई 2026
✍️ Apurva Chowdhury


द्वारका एक्सप्रेसवे सुरंग परियोजना को मिली हरी झंडी

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के परिवहन नक्शे में एक और बड़ा बदलाव आने जा रहा है। केंद्र सरकार ने द्वारका एक्सप्रेसवे को दक्षिण दिल्ली के वसंत कुंज स्थित नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ने वाली छह लेन की सुरंग परियोजना को मंजूरी दे दी है। लगभग 6970 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना दिल्ली की सबसे महत्वाकांक्षी अंडरग्राउंड रोड योजनाओं में गिनी जा रही है।

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में इस परियोजना को स्वीकृति दी गई। सरकार का दावा है कि इससे पश्चिमी और दक्षिणी दिल्ली के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी और लंबे समय से बने ट्रैफिक दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।

परियोजना में क्या-क्या शामिल है

प्रस्तावित परियोजना की कुल लंबाई लगभग 8.1 किलोमीटर होगी। इसमें ट्विन-ट्यूब आधारित छह लेन की सुरंग बनाई जाएगी, जो शिवमूर्ति इंटरचेंज से शुरू होकर वसंत कुंज के निकट नेल्सन मंडेला मार्ग तक पहुंचेगी।

परियोजना के तहत सुरंग के अलावा एलिवेटेड रोड, फ्लाईओवर और यातायात प्रबंधन संरचनाएं भी विकसित की जाएंगी। नेल्सन मंडेला मार्ग के साथ लगभग 1.8 किलोमीटर का एलिवेटेड सेक्शन भी प्रस्तावित है ताकि जंक्शनों पर दबाव कम किया जा सके।

दक्षिणी रिज के नीचे से गुजरेगी सुरंग

इस परियोजना का सबसे तकनीकी और संवेदनशील हिस्सा दक्षिणी रिज क्षेत्र के नीचे से गुजरने वाली सुरंग है। सुरंग का एक हिस्सा रिज वन क्षेत्र के नीचे बनाया जाएगा, जिसके लिए टनल बोरिंग मशीन तकनीक का इस्तेमाल होगा।

सरकार का कहना है कि भूमिगत निर्माण मॉडल अपनाने से सतह पर पर्यावरणीय नुकसान सीमित रहेगा और रिज क्षेत्र की जैव विविधता को सुरक्षित रखा जा सकेगा। हालांकि पर्यावरण विशेषज्ञ इस दावे की स्वतंत्र निगरानी और वैज्ञानिक मूल्यांकन की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।

आखिर इस सुरंग की जरूरत क्यों पड़ी

दिल्ली का महिपालपुर कॉरिडोर, एयरपोर्ट एक्सेस मार्ग और दक्षिणी दिल्ली के कई हिस्से वर्षों से भारी ट्रैफिक दबाव का सामना कर रहे हैं। विशेष रूप से गुरुग्राम, द्वारका और एयरपोर्ट से दक्षिण दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों को लंबी देरी झेलनी पड़ती है।

नई सुरंग को इसी समस्या का समाधान बताया जा रहा है। इससे एयरपोर्ट, गुरुग्राम, पश्चिमी दिल्ली और वसंत कुंज के बीच अपेक्षाकृत तेज और सिग्नल-फ्री यात्रा संभव हो सकती है।

क्या केवल नई सड़कें ट्रैफिक जाम खत्म कर देती हैं?

शहरी परिवहन विशेषज्ञ लंबे समय से एक महत्वपूर्ण सिद्धांत की ओर ध्यान दिलाते रहे हैं जिसे "इंड्यूस्ड डिमांड" कहा जाता है। इसका अर्थ है कि नई सड़कें बनने के बाद कुछ समय के लिए ट्रैफिक कम होता है, लेकिन बाद में बढ़ी हुई क्षमता नए वाहनों को आकर्षित करती है और जाम फिर लौट आता है।

दुनिया के कई महानगरों में केवल सड़क विस्तार से स्थायी समाधान नहीं मिला। यही वजह है कि कुछ विशेषज्ञ दिल्ली में मेट्रो विस्तार, बस नेटवर्क और मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम को समान प्राथमिकता देने की सलाह देते हैं।

सरकार का तर्क क्या है

सरकारी एजेंसियों का मानना है कि यह परियोजना केवल एक सुरंग नहीं बल्कि एक रणनीतिक कनेक्टिविटी कॉरिडोर है। यह द्वारका एक्सप्रेसवे, यूईआर-2 और दक्षिण दिल्ली के बीच एक नया यातायात मार्ग तैयार करेगी।

इसके माध्यम से एयरपोर्ट एक्सेस बेहतर होगी, लॉजिस्टिक्स मूवमेंट तेज होगा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के भीतर यात्रा समय कम हो सकेगा। अधिकारियों का अनुमान है कि इससे ईंधन की बचत और उत्सर्जन में भी कमी आ सकती है।

आर्थिक असर भी कम महत्वपूर्ण नहीं

इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रहतीं। इनके साथ रियल एस्टेट, व्यावसायिक गतिविधियां और निवेश के नए अवसर भी विकसित होते हैं।

द्वारका एक्सप्रेसवे पहले ही एनसीआर के सबसे तेजी से विकसित होते कॉरिडोरों में शामिल है। बेहतर कनेक्टिविटी से वसंत कुंज, द्वारका और गुरुग्राम के बीच आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि किसी भी रियल एस्टेट उछाल को केवल इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के आधार पर नहीं आंकना चाहिए।

पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन

दिल्ली पहले से ही वायु प्रदूषण, हरित क्षेत्र संरक्षण और शहरी विस्तार जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में किसी भी बड़ी परियोजना के साथ पर्यावरणीय मूल्यांकन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

सुरंग मॉडल से सतही हस्तक्षेप कम होगा, लेकिन निर्माण गतिविधियों का प्रभाव, भूगर्भीय स्थिरता और वन क्षेत्र पर संभावित असर की निरंतर निगरानी आवश्यक होगी। यह परियोजना भविष्य में शहरी विकास और पर्यावरणीय संतुलन के बीच एक महत्वपूर्ण परीक्षा बन सकती है।

अगले चरण में क्या होगा

मंत्रिमंडलीय मंजूरी के बाद अब निविदा प्रक्रिया, तकनीकी स्वीकृतियां और निर्माण एजेंसियों के चयन का चरण शुरू होगा। परियोजना को हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा।

यदि निर्माण समयसीमा का पालन हुआ तो आने वाले वर्षों में दिल्ली को अपना सबसे बड़ा अंडरग्राउंड शहरी परिवहन कॉरिडोर मिल सकता है।

क्या यह दिल्ली की ट्रैफिक समस्या का स्थायी समाधान बनेगी?

द्वारका एक्सप्रेसवे सुरंग निश्चित रूप से राजधानी की कनेक्टिविटी संरचना में एक बड़ा हस्तक्षेप है। इससे यात्रा आसान होगी, कुछ प्रमुख मार्गों पर दबाव कम हो सकता है और आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा मिल सकती है।

लेकिन शहरी परिवहन का इतिहास बताता है कि केवल नई सड़कें किसी महानगर की ट्रैफिक समस्या का अंतिम समाधान नहीं होतीं। वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सड़क अवसंरचना, सार्वजनिक परिवहन, ट्रैफिक प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को किस तरह एक साझा रणनीति के तहत आगे बढ़ाया जाता है।

द्वारका एक्सप्रेसवे सुरंग दिल्ली के लिए केवल एक निर्माण परियोजना नहीं है। यह उस बड़े सवाल का भी परीक्षण है कि क्या भारत के महानगर भविष्य की गतिशीलता को केवल सड़कों से परिभाषित करेंगे, या फिर एक अधिक संतुलित और टिकाऊ शहरी मॉडल की ओर बढ़ेंगे।

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Apurva Choudhary

Apurva Choudhary

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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