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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 672.59 अरब डॉलर पहुंचा, स्वर्ण भंडार में मजबूत उछाल

Apurva Choudhary • 2026-06-26 14:44:06
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 672.59 अरब डॉलर पहुंचा, स्वर्ण भंडार में मजबूत उछाल
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में फिर दर्ज हुई बढ़ोतरी

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 19 जून 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 96.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 672.587 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इससे पहले वाले सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में लगभग 9.98 अरब डॉलर की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी।

विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। यह आयात भुगतान, वैश्विक वित्तीय अस्थिरता तथा मुद्रा विनिमय दर को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाता है।

स्वर्ण भंडार में उल्लेखनीय वृद्धि

इस सप्ताह विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी का प्रमुख कारण स्वर्ण भंडार में हुई तेज वृद्धि रही। आरबीआई के अनुसार, देश का स्वर्ण भंडार 4.11 अरब डॉलर बढ़कर 107.93 अरब डॉलर पर पहुंच गया। पिछले सप्ताह इसमें 10 अरब डॉलर से अधिक की गिरावट दर्ज की गई थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वर्ण भंडार में उतार-चढ़ाव वैश्विक सोने की कीमतों और केंद्रीय बैंक की परिसंपत्ति रणनीति से प्रभावित होता है।

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में कमी

हालांकि कुल विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा, लेकिन विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (Foreign Currency Assets) 3.072 अरब डॉलर घटकर 541.217 अरब डॉलर रह गईं। इन परिसंपत्तियों में अमेरिकी डॉलर के अलावा यूरो, जापानी येन और ब्रिटिश पाउंड जैसी प्रमुख विदेशी मुद्राएं शामिल होती हैं, जिनका मूल्य विनिमय दरों के आधार पर तय होता है।

आईएमएफ से जुड़े भंडार में भी हल्की गिरावट

आरबीआई के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत की आरक्षित निधि 2.2 करोड़ डॉलर घटकर 4.793 अरब डॉलर रह गई। वहीं विशेष आहरण अधिकार (SDR) भी 5.2 करोड़ डॉलर घटकर 18.647 अरब डॉलर पर पहुंच गए।

आर्थिक दृष्टि से क्या है महत्व?

विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने का संकेत देती है। पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार से आयात भुगतान, विदेशी निवेशकों का विश्वास और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने की क्षमता मजबूत होती है।

हालांकि विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में आई गिरावट यह भी दर्शाती है कि वैश्विक मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव का प्रभाव अभी भी बना हुआ है।

आगे क्या ?

विशेषज्ञों की नजर अब आने वाले सप्ताहों के आरबीआई आंकड़ों, वैश्विक डॉलर इंडेक्स, सोने की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों पर रहेगी। यदि स्वर्ण भंडार और विदेशी निवेश में मजबूती बनी रहती है तो विदेशी मुद्रा भंडार आगे भी स्थिर या बढ़ सकता है।

CONCLUSION

19 जून 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में हुई वृद्धि सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। स्वर्ण भंडार में मजबूत बढ़ोतरी ने विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में आई गिरावट की भरपाई की। आने वाले समय में वैश्विक बाजारों और आरबीआई की नीतियों पर विदेशी मुद्रा भंडार की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।
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Apurva Choudhary

Apurva Choudhary

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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