21 जून 2026 को आयोजित री-NEET परीक्षा के दौरान वाराणसी के हरिश्चंद्र PG कॉलेज केंद्र पर एक अभ्यर्थी के अंडरगारमेंट्स में SIM कार्ड और पिछले साल का प्रश्नपत्र मिला। सुरक्षा जांच में पकड़े जाने के बाद उसे हिरासत में ले लिया गया। यह घटना तब सामने आई जब देशभर में 22 लाख से अधिक छात्र कड़ी निगरानी में परीक्षा दे रहे थे। NTA ने इसे अपवाद बताते हुए पूरे आयोजन को सफल बताया, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छेड़ दी।
री-NEET 2026: सुरक्षा के बीच सेंध, वाराणसी से उठे बड़े सवाल
मजबूत सुरक्षा के दावे के बीच चौंकाने वाली घटना
देशभर में कड़ी सुरक्षा और प्रशासनिक सतर्कता के बीच आयोजित री-NEET 2026 परीक्षा एक बार फिर विवादों में घिर गई है। वाराणसी के हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज परीक्षा केंद्र पर एक अभ्यर्थी के पास से SIM कार्ड और पिछले साल का NEET प्रश्नपत्र बरामद हुआ। यह घटना उस समय सामने आई जब परीक्षा केंद्र में प्रवेश से पहले सघन तलाशी ली जा रही थी।
इस खुलासे के बाद परीक्षा केंद्र पर हड़कंप मच गया और तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया। अभ्यर्थी को मौके पर हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई।
क्या हुआ था उस दिन
21 जून 2026 को देशभर में री-NEET परीक्षा आयोजित की गई थी। यह परीक्षा पिछले विवादों के बाद दोबारा कराई गई थी, जिसमें 22 लाख से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया। देश के 5,440 केंद्रों और विदेश के 14 केंद्रों पर यह परीक्षा 13 भाषाओं में आयोजित की गई।
वाराणसी के इस केंद्र पर जब अभ्यर्थियों की दो-स्तरीय जांच हो रही थी, उसी दौरान एक उम्मीदवार के अंडरगारमेंट्स में छिपाकर रखे गए SIM कार्ड और पुराने प्रश्नपत्र का पता चला।
क्यों अहम है यह मामला
यह घटना केवल एक व्यक्ति की गलती नहीं मानी जा रही, बल्कि यह पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है। जब इतनी बड़ी परीक्षा में करोड़ों छात्रों का भविष्य दांव पर हो, तब एक भी सुरक्षा चूक गंभीर मानी जाती है।
सरकार और NTA ने दावा किया था कि इस बार परीक्षा में अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं, लेकिन इस घटना ने उन दावों की मजबूती पर बहस छेड़ दी है।
अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था का दावा
री-NEET 2026 को लेकर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए थे। परीक्षा केंद्रों पर आधार-आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन, फेस ऑथेंटिकेशन, CCTV निगरानी और सिग्नल जैमर लगाए गए थे।
इसके अलावा हर केंद्र पर दो-स्तरीय तलाशी की व्यवस्था थी और पूरे देश में कमांड और कंट्रोल सेंटर बनाए गए थे, जो हर गतिविधि पर नजर रख रहे थे।
करीब 7 लाख अधिकारियों, जिनमें पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और परीक्षा स्टाफ शामिल थे, को तैनात किया गया था।
“टीम भारत” का सामूहिक प्रयास
NTA ने इस परीक्षा को “टीम भारत” का उदाहरण बताया। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के साथ कई मंत्रालयों और एजेंसियों ने मिलकर काम किया।
इसमें CAPF, गृह मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, भारतीय वायु सेना, NIC और बैंकिंग संस्थानों तक की भागीदारी रही।
छात्रों के लिए विशेष इंतजाम
इस बार परीक्षा में दिव्यांग और बीमार छात्रों के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। 10,000 से अधिक दिव्यांग छात्रों को सुविधाएं दी गईं, जबकि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं वाले छात्रों के लिए अलग प्रबंधन किया गया।
कुछ मामलों में ऐसे छात्र भी परीक्षा देने पहुंचे जो गंभीर चोट या बीमारी से जूझ रहे थे, जिससे यह परीक्षा उनके लिए सिर्फ एक टेस्ट नहीं बल्कि संघर्ष का प्रतीक बन गई।
विवाद और सवाल
हालांकि परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने का दावा किया गया, लेकिन वाराणसी की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद इस तरह की चीजें अंदर तक पहुंच सकती हैं?
क्या यह एक अकेली घटना है या किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा?
इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा, लेकिन यह स्पष्ट है कि परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने की जरूरत है।
छात्रों की प्रतिक्रिया
परीक्षा के बाद कई छात्रों ने फिजिक्स के पेपर को कठिन बताया, जबकि कुछ ने इसे संतुलित कहा।
लेकिन सुरक्षा से जुड़ी इस घटना ने छात्रों और अभिभावकों के मन में चिंता जरूर बढ़ा दी है।
राजनीतिक और सामाजिक असर
NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षा हमेशा राजनीतिक बहस का हिस्सा रही है। इस घटना के बाद विपक्ष सरकार और NTA पर सवाल उठा सकता है, जबकि सरकार इसे एक isolated incident बताकर स्थिति को संभालने की कोशिश करेगी।
समाज में भी यह बहस तेज हो सकती है कि क्या परीक्षा प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष है।
क्या यह केवल एक अपवाद है?
NTA का कहना है कि यह घटना अपवाद है और पूरे देश में परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि एक भी घटना पूरी प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है।
आगे क्या होगा
अब इस मामले की जांच सुरक्षा एजेंसियां कर रही हैं। यदि इसमें किसी बड़े नेटवर्क का खुलासा होता है, तो यह शिक्षा प्रणाली के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है।
भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को और सख्त और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की जरूरत होगी।
री-NEET 2026 ने जहां एक ओर प्रशासनिक क्षमता और सामूहिक प्रयास का उदाहरण पेश किया, वहीं वाराणसी की घटना ने यह भी दिखा दिया कि सुरक्षा में जरा सी चूक भी बड़े सवाल खड़े कर सकती है।
जब लाखों छात्रों का भविष्य एक परीक्षा पर निर्भर हो, तब हर स्तर पर पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य हो जाता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।