अमरोहा गैंगरेप पर अखिलेश यादव का हमला, बोले, दोषियों पर हो ऐतिहासिक कार्रवाई
Mohammad Naved
•
2026-09-24 11:42:11
अमरोहा में हरियाणा की महिला से कथित गैंगरेप मामले में दो यूपी पुलिसकर्मियों और दो CRPF कर्मियों की गिरफ्तारी हुई। अखिलेश यादव ने ऐतिहासिक कार्रवाई की मांग की।
Location | Date
हसनपुर, अमरोहा, उत्तर प्रदेश | 24 सितंबर 2026
By Mohd Naved
अमरोहा गैंगरेप मामले पर सियासी प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के हसनपुर क्षेत्र में एक महिला से कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले ने पुलिस और सुरक्षा बलों की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस के अनुसार मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस के दो कर्मियों और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी CRPF के दो कर्मियों को गिरफ्तार किया गया है। मामला एक फार्महाउस से जुड़ा है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार और पुलिस व्यवस्था पर निशाना साधा है। उन्होंने कथित गैंगरेप को पुलिस बल पर दाग बताते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ “ऐतिहासिक कार्रवाई” की मांग की। यह उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया है, जबकि घटना की जांच और आरोपों का न्यायिक परीक्षण अलग प्रक्रिया है।
पुलिस के मुताबिक क्या हुआ
अमरोहा के पुलिस अधीक्षक लखन सिंह यादव के मुताबिक महिला हरियाणा के फतेहाबाद की रहने वाली है और उसकी उम्र करीब 24 वर्ष बताई गई है। कुछ रिपोर्टों में उसकी उम्र 23 वर्ष बताई गई है। इसलिए उम्र को फिलहाल पुलिस रिकॉर्ड के अंतिम सत्यापन के बिना निश्चित संख्या के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
पुलिस के अनुसार महिला को धार्मिक स्थलों की यात्रा के बहाने अमरोहा आने के लिए संपर्क किया गया था। इसके बाद हसनपुर क्षेत्र स्थित एक फार्महाउस में कथित अपराध हुआ। पुलिस को 22 और 23 सितंबर की दरमियानी रात घटना की सूचना मिली।
पुलिस ने महिला को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों में उत्तर प्रदेश पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर और एक हेड कांस्टेबल तथा CRPF के एक सब-इंस्पेक्टर और एक हेड कांस्टेबल शामिल बताए गए हैं।
चारों आरोपी गिरफ्तार
पुलिस के मुताबिक चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। जांच अभी जारी है।
उत्तर प्रदेश पुलिस से जुड़े एक आरोपी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई है। रिपोर्टों के अनुसार संबंधित सब-इंस्पेक्टर को निलंबित किया गया है। CRPF के दोनों कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई है।
फार्महाउस को लेकर भी जांच
पुलिस के अनुसार जिस फार्महाउस में कथित घटना हुई, वह उत्तराखंड के एक निर्दलीय विधायक से संबंधित बताया जा रहा है। पुलिस ने संपत्ति के मैनेजर से पूछताछ की है। इस संपत्ति से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच जारी है।
फार्महाउस के मालिकाना हक और वहां मौजूद लोगों की भूमिका को लेकर सामने आने वाली जानकारी को जांच पूरी होने तक आरोप या निष्कर्ष के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
अखिलेश यादव ने क्या कहा
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने घटना को पुलिस बल पर दाग बताते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उनके बयान का राजनीतिक संदर्भ राज्य की कानून-व्यवस्था पर विपक्ष के लगातार सवालों से जुड़ा है।
उनकी मांग का केंद्र यह है कि वर्दी की आड़ में अपराध के आरोपों से जुड़े लोगों के खिलाफ ऐसी कानूनी कार्रवाई हो जो भविष्य में नज़ीर बने। हालांकि अंतिम दोषसिद्धि अदालत की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।
पुलिस और सुरक्षा बलों की भूमिका क्यों अहम
इस मामले का सबसे संवेदनशील पहलू आरोपियों में पुलिस और CRPF कर्मियों की कथित संलिप्तता है। कानून लागू करने वाली संस्थाओं से जुड़े लोगों पर अपराध का आरोप होने की स्थिति में विभागीय जांच के साथ आपराधिक जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
मामले में पुलिस ने गिरफ्तारी की कार्रवाई की है। साथ ही विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई शुरू होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच में यह स्पष्ट होना अहम होगा कि घटना की परिस्थितियां क्या थीं, सभी आरोपियों की व्यक्तिगत भूमिका क्या थी और उपलब्ध साक्ष्यों का न्यायिक परीक्षण किस तरह होता है।
जांच के अगले चरण
अब जांच एजेंसियों के सामने प्राथमिकी में दर्ज आरोपों की पुष्टि, बयान और अन्य साक्ष्यों का संकलन तथा घटनास्थल से जुड़े तथ्यों की जांच जैसे कदम होंगे। पुलिस ने बताया है कि मामले की तफ्तीश जारी है।
चारों आरोपियों की गिरफ्तारी को मामले में शुरुआती कानूनी कार्रवाई के तौर पर देखा जाना चाहिए। गिरफ्तारी अपने आप में अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं होती। आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी।
राजनीतिक असर और कानून-व्यवस्था का सवाल
अमरोहा की घटना ने एक बार फिर पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही और वर्दीधारी कर्मियों के आचरण का सवाल सामने रखा है। विपक्ष इसे राज्य की कानून-व्यवस्था से जोड़कर सरकार पर दबाव बना रहा है। दूसरी तरफ प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आगे बढ़े।
इस मामले में राजनीतिक बयान और पुलिस जांच को अलग-अलग रखना जरूरी है। अखिलेश यादव की टिप्पणी राजनीतिक प्रतिक्रिया है। घटना से जुड़े तथ्य पुलिस जांच और अदालत की प्रक्रिया से स्थापित होंगे।
अमरोहा के हसनपुर क्षेत्र में महिला से कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में चार वर्दीधारी कर्मियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। एक आरोपी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई और CRPF कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
अखिलेश यादव ने मामले में “ऐतिहासिक कार्रवाई” की मांग की है। अब सबसे अहम सवाल जांच की निष्पक्षता, साक्ष्यों की मजबूती और अदालत में आरोपों के कानूनी परीक्षण का है।
वीडियो देखें
ADVERTISEMENT
Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।