चट्टोग्राम | 3 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
बांग्लादेश के चट्टोग्राम सेंट्रल जेल में अवामी लीग के स्थानीय नेता Md Nurul Islam की मौत के बाद सियासी और मानवाधिकार बहस फिर तेज हो
गई है। 55 वर्षीय नूरुल इस्लाम मीरसराय नगरपालिका की अवामी लीग इकाई के महासचिव थे।
The Daily Star के मुताबिक, बुधवार दोपहर जेल में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी। उन्होंने सीने में दर्द की शिकायत की, जिसके बाद जेल
सुरक्षाकर्मी उन्हें पहले जेल अस्पताल लेकर गए। हालत बिगड़ने पर उन्हें Chattogram Medical College Hospital भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने
उन्हें मृत घोषित कर दिया।
चट्टोग्राम सेंट्रल जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक Md Iqbal Hossain ने बताया कि नूरुल इस्लाम को Anti-Terrorism Act, 2009 के तहत दर्ज एक
मामले में गिरफ्तार किए जाने के बाद जेल भेजा गया था। जेल अधिकारियों के मुताबिक उनकी गिरफ्तारी हाल में हुई थी।
रिपोर्ट के अनुसार बुधवार करीब दो बजे उन्हें सीने में दर्द हुआ। जेल अस्पताल में शुरुआती चिकित्सा के बाद उनकी हालत बिगड़ी और उन्हें मेडिकल
कॉलेज अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल की मॉर्चरी में रखा गया है। कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने
के बाद शव परिवार को सौंपे जाने की बात जेल अधिकारियों ने कही है।
नूरुल इस्लाम की पत्नी Rokeya Akhter ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में दावा किया कि उनके पति को एक राजनीतिक मामले में गिरफ्तार किया
गया था और अदालत के आदेश के बाद जेल भेजा गया।
उनके मुताबिक, 31 अगस्त को नूरुल इस्लाम को जमानत मिली थी। पत्नी का दावा है कि अगले दिन जेल के गेट पर ही उन्हें एक दूसरे मामले में
दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया।
परिवार के इस दावे की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है। इसलिए इसे आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
रोकैया अख्तर ने अपने पति की मौत के लिए मानसिक दबाव और कथित शारीरिक यातना को जिम्मेदार बताया। उन्होंने पर्याप्त इलाज नहीं मिलने का
भी आरोप लगाया।
इन आरोपों के विपरीत जेल अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से मौत की वजह के रूप में सीने में दर्द के बाद हालत बिगड़ने और अस्पताल में मृत्यु की
जानकारी दी है। उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसा कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है जिसमें यातना को मौत का कारण बताया गया हो।
अवामी लीग ने नूरुल इस्लाम की मौत को हिरासत में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और मानवाधिकार से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
पार्टी का आरोप है कि नूरुल इस्लाम को पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं दी गई और जेल में उनके साथ यातना की गई। पार्टी ने यह भी दावा किया कि
वह किसी अपराध में दोषसिद्ध नहीं हुए थे।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इन्हें स्थापित तथ्य के तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा।
अवामी लीग ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
नूरुल इस्लाम की मौत ऐसे समय हुई है जब बांग्लादेश में अवामी लीग से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी और प्री-ट्रायल डिटेंशन को लेकर मानवाधिकार
संगठनों की चिंता बढ़ी हुई है।
Human Rights Watch ने 23 अगस्त 2026 की अपनी रिपोर्ट में कहा था कि अवामी लीग सरकार के सत्ता से हटने के बाद पार्टी से जुड़े हजारों
अधिकारियों, कार्यकर्ताओं और समर्थकों को हिरासत में लिया गया। संगठन के मुताबिक सैकड़ों लोग बिना आरोप के जेल में बने हुए हैं।
Human Rights Watch ने यह भी कहा कि कई परिवारों और वकीलों ने हिरासत में रखे गए लोगों को जमानत और चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने की
शिकायत की है। संगठन ने जेल में हुई मौतों की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
यह पृष्ठभूमि नूरुल इस्लाम की मौत को व्यापक मानवाधिकार बहस से जोड़ती है, लेकिन इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि उनकी मृत्यु यातना या इलाज से इनकार के कारण हुई।
बांग्लादेश में अवामी लीग की राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लागू है। पार्टी से जुड़े कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ आपराधिक मामले
चल रहे हैं।
Human Rights Watch ने अपनी अगस्त की रिपोर्ट में कहा था कि कई लोगों को हत्या सहित गंभीर आरोपों में हिरासत में रखा गया है, जबकि कुछ
मामलों में संगठन ने पर्याप्त साक्ष्य और उचित प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं।
साथ ही, अवामी लीग सरकार के कार्यकाल में गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों की जांच भी बांग्लादेश में जारी रही है। इसलिए मौजूदा मामलों
को केवल राजनीतिक उत्पीड़न या केवल कानूनी कार्रवाई के एकतरफा फ्रेम में देखना भी तस्वीर को अधूरा कर सकता है।
किसी व्यक्ति की हिरासत में मौत होने पर राज्य की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। जेल प्रशासन व्यक्ति की सुरक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी अपने नियंत्रण में रखता है।
इसी वजह से पोस्टमार्टम, मेडिकल रिकॉर्ड, जेल अस्पताल में दिए गए उपचार, अस्पताल ले जाने का समय और संबंधित अधिकारियों के रिकॉर्ड
महत्वपूर्ण होंगे।
नूरुल इस्लाम के मामले में अभी उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी मुख्य तौर पर जेल अधिकारियों के बयान और मीडिया रिपोर्टिंग पर आधारित है। अंतिम चिकित्सकीय निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह तय करना संभव होगा कि उनकी मौत का कारण क्या था।
बांग्लादेश में अवामी लीग से जुड़े अन्य बंदियों की जेल में मौत के मामले पहले भी सामने आए हैं।
फरवरी 2026 में पूर्व जल संसाधन मंत्री और वरिष्ठ अवामी लीग नेता Ramesh Chandra Sen की हिरासत में मौत हुई थी। bdnews24 के
अनुसार 85 वर्षीय सेन की तबीयत जेल में बिगड़ी और अस्पताल पहुंचने के बाद उनकी मौत हो गई। परिवार और पार्टी ने उनकी खराब स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता जताई थी।
Human Rights Watch ने अगस्त 2026 में कहा था कि कम से कम 10 अवामी लीग पदाधिकारी फरवरी 2026 के बाद जेल में मर चुके थे। संगठन ने हिरासत में हुई मौतों की स्वतंत्र जांच की मांग की।
यह आंकड़ा व्यापक हिरासत व्यवस्था को लेकर चिंता दिखाता है, लेकिन हर मामले की परिस्थितियां अलग हैं। किसी एक मामले के आरोप को दूसरे मामले पर स्वतः लागू नहीं किया जा सकता।
नूरुल इस्लाम की मौत के मामले में सबसे अहम सवाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आधिकारिक जांच से जुड़े हैं।
मौत का चिकित्सकीय कारण क्या था?
क्या उन्हें जेल में समय पर उपचार मिला?
उन्हें अस्पताल भेजने में कितना समय लगा?
क्या उनके शरीर पर चोट के कोई निशान मिले?
31 अगस्त की जमानत और अगले दिन कथित दोबारा गिरफ्तारी का रिकॉर्ड क्या कहता है?
इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही यातना या चिकित्सा लापरवाही के आरोपों का ठोस आकलन संभव होगा।
चट्टोग्राम सेंट्रल जेल में नूरुल इस्लाम की मौत ने बांग्लादेश में हिरासत, राजनीतिक मामलों और बंदियों के स्वास्थ्य अधिकारों पर फिर सवाल खड़े किए
हैं।
जेल अधिकारियों के अनुसार उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया और वहां डॉक्टरों ने मृत घोषित किया। वहीं अवामी लीग
और मृतक के परिवार ने यातना और पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस मामले में निष्पक्ष पोस्टमार्टम, पारदर्शी जांच और मेडिकल रिकॉर्ड की सार्वजनिक
समीक्षा ही यह स्पष्ट कर सकती है कि नूरुल इस्लाम की मौत किन परिस्थितियों में हुई।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।