रसुवा, नेपाल | 3 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
नेपाल में हालिया बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बीच रसुवा जिले से राहत और बचाव अभियान की एक दिल छू लेने वाली घटना सामने आई है। यहां एक
छोटी बच्ची करीब 55 से 60 घंटे तक मिट्टी और मलबे के नीचे फंसी रही।
बचाव दल ने उसकी आवाज सुनने के बाद तलाश शुरू की और आखिरकार उसे जिंदा बाहर निकाल लिया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक बच्ची को
बाद में चिकित्सा सहायता दी गई और इलाज के लिए काठमांडू ले जाया गया।
रसुवा के प्रभावित इलाके में राहत एवं बचाव दल लगातार मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रहा था। इसी दौरान टीम को मलबे के भीतर से हल्की
आवाज सुनाई दी।
कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि बचावकर्मियों को शुरुआत में लगा कि आवाज किसी बिल्ली या जानवर की हो सकती है। हालांकि इस विशेष विवरण
की स्वतंत्र प्राथमिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
टीम ने फिर भी आवाज की दिशा में तलाश जारी रखी। मिट्टी और मलबा सावधानी से हटाया गया। धीरे-धीरे स्पष्ट हुआ कि वहां एक बच्ची फंसी हुई है।
बच्ची तक पहुंचना आसान नहीं था। उसके ऊपर मिट्टी और मलबा जमा था। बचावकर्मियों ने बिना जल्दबाजी के आसपास की सामग्री हटाई।
रिपोर्टों के अनुसार बच्ची को बाहर निकालने की प्रक्रिया करीब दो घंटे चली। आखिरकार उसे मलबे से बाहर निकाला गया।
रेस्क्यू के दौरान बच्ची बेहद कमजोर हालत में दिखाई दी। उसके शरीर पर मिट्टी और कीचड़ लगा था और वह बहुत कम प्रतिक्रिया दे रही थी।
मीडिया रिपोर्टों में बच्ची के मलबे के नीचे फंसे रहने का समय करीब 55 से 60 घंटे बताया गया है।
खराब हालत में मिली मासूम
बच्ची को बाहर निकालने के बाद बचावकर्मियों ने उसकी हालत संभाली। रिपोर्टों के मुताबिक वह बेहद कमजोर थी और शुरुआती तौर पर कम
प्रतिक्रिया दे रही थी।
एक रिपोर्ट में बताया गया कि खराब मौसम के कारण तत्काल हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट करने में परेशानी हुई। इसके बाद उसे रेस्क्यू कैंप ले जाकर
प्राथमिक सहायता दी गई।
बाद में उसे बेहतर इलाज के लिए काठमांडू भेजे जाने की जानकारी सामने आई। अस्पताल से जुड़े अपडेट में उसकी हालत स्थिर होने की बात कही
गई।
बच्ची के रेस्क्यू का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैला। वीडियो में बचावकर्मियों को मलबे और कीचड़ के बीच से बच्ची को बाहर निकालते देखा
जा सकता है।
लेकिन वायरल वीडियो के कुछ संस्करणों की प्रामाणिकता पर सवाल उठे। उपलब्ध फैक्ट-चेक रिपोर्ट के मुताबिक वास्तविक घटना हुई थी, लेकिन
सोशल मीडिया पर प्रसारित फुटेज का कुछ हिस्सा एडिटेड या AI की मदद से बदला हुआ था।
इसलिए वीडियो को घटना का सीधा और पूर्ण दस्तावेज मानने के बजाय सावधानी के साथ देखना जरूरी है।
रसुवा समेत नेपाल के कई इलाकों में आई बाढ़ और फ्लैश फ्लड ने व्यापक नुकसान पहुंचाया है। मिट्टी, पत्थर और पानी के तेज बहाव ने कई इलाकों
में घरों और सड़कों को प्रभावित किया।
ऐसे हालात में राहतकर्मियों के लिए मलबे में दबे लोगों तक पहुंचना बेहद कठिन होता है। इसी वजह से किसी व्यक्ति को कई घंटे बाद जिंदा निकालना
राहत अभियान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है।
मनीषा का मामला इसी मानवीय पहलू को सामने लाता है। बचाव दल ने एक मामूली आवाज को नजरअंदाज नहीं किया और उसकी दिशा में तलाश
जारी रखी।
बच्ची के परिवार को लेकर भी शुरुआती रिपोर्टों में अलग-अलग जानकारी सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में उसके माता-पिता के बाद में मिलने और
अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी गई है, जबकि दूसरी रिपोर्टों में इस संबंध में सीमित जानकारी है।
इसलिए परिवार की स्थिति से जुड़े अतिरिक्त दावों को आधिकारिक पुष्टि के बिना निश्चित तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
नेपाल की इस प्राकृतिक आपदा में जहां राहत एवं बचाव दल लगातार प्रभावित लोगों की तलाश कर रहे हैं, वहीं मलबे के नीचे से बच्ची का जिंदा निकलना उम्मीद का अहम पल बना।
करीब ढाई दिन तक मलबे में फंसे रहने के बाद उसे बाहर निकालना आसान नहीं था। बचावकर्मियों की सावधानी और लगातार तलाश ने उसे जीवन
का दूसरा मौका दिया।
इस घटना का सबसे अहम पहलू यही है कि आवाज सुनाई देने के बाद टीम ने तलाश बंद नहीं की। उसी खोज के दौरान मलबे के नीचे बच्ची के जिंदा
होने का पता चला।
इतने लंबे समय तक मलबे में फंसे रहने के बाद बच्ची की मेडिकल निगरानी जरूरी है। लंबे समय तक दबाव, निर्जलीकरण और चोट का जोखिम ऐसे
मामलों में महत्वपूर्ण होता है।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उसे काठमांडू ले जाकर चिकित्सा सुविधा दी गई और शुरुआती जानकारी में उसकी हालत स्थिर बताई गई।
फिलहाल इस घटना को लेकर सबसे सुरक्षित निष्कर्ष यही है कि नेपाल के रसुवा में एक बच्ची को करीब 55 से 60 घंटे बाद मलबे से जिंदा बचाया
गया। “बिल्ली समझकर आवाज सुनना” और वायरल वीडियो के कुछ विवरणों को स्वतंत्र पुष्टि के बिना तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
नेपाल की बाढ़ और मलबे के बीच बच्ची का जिंदा मिलना राहत अभियान की एक अहम घटना है।
करीब 60 घंटे तक मलबे में फंसी रहने के बाद उसे बचाव दल ने सुरक्षित बाहर निकाला। घटना से जुड़ी कुछ जानकारियों में उम्र और स्थान को लेकर
रिपोर्टों में अंतर है, जबकि वायरल वीडियो के कुछ संस्करणों में एडिटिंग के सवाल भी उठे हैं।
फिर भी मुख्य घटना स्पष्ट है। रसुवा में बचावकर्मियों ने मलबे के भीतर फंसी बच्ची तक पहुंच बनाई और उसे जिंदा बाहर निकाला। आपदा के बीच यह
रेस्क्यू अभियान नेपाल में उम्मीद की एक अहम तस्वीर बनकर सामने आया है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।