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बाबू नारायण सिंह पुण्यतिथि: हजारों लोगों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

Wasi Siddiqui 2026-07-19 14:59:20
बाबू नारायण सिंह पुण्यतिथि: हजारों लोगों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
मुज़फ्फरनगर के नसीरपुर स्थित प्रेरणा स्थल पर उत्तर प्रदेश के प्रथम उपमुख्यमंत्री स्वर्गीय बाबू नारायण सिंह की 39वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम में हजारों लोगों ने भाग लिया। वक्ताओं ने उनके किसान हितैषी योगदान को याद किया, जबकि सांसद चंदन चौहान ने उनके आदर्शों पर चलते हुए जनसेवा का संकल्प दोहराया।



📍 मुज़फ्फरनगर 
📰 19 जुलाई 2026 
 ✍️ वसी सिद्धीक़ी


बाबू नारायण सिंह पुण्यतिथि: जनसेवा और किसान राजनीति की विरासत को नमन

नसीरपुर में उमड़ी श्रद्धांजलि की भीड़

मुज़फ्फरनगर के ग्राम नसीरपुर स्थित प्रेरणा स्थल पर रविवार को उत्तर प्रदेश के प्रथम उपमुख्यमंत्री और किसान नेता स्वर्गीय बाबू नारायण सिंह की 39वीं पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में बिजनौर, मुज़फ्फरनगर सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से किसान, सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम नागरिक पहुंचे। श्रद्धांजलि सभा की शुरुआत वैदिक हवन-पूजन से हुई, जिसके बाद लोगों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।

'संघर्ष ही जीवन है' का संदेश रहा केंद्र में

पूरे आयोजन के दौरान स्वर्गीय बाबू नारायण सिंह का जीवन संदेश "संघर्ष ही जीवन है" प्रमुख विषय बना रहा। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने सार्वजनिक जीवन में पद और प्रतिष्ठा से अधिक जनविश्वास को महत्व दिया। उनका राजनीतिक जीवन किसान, मजदूर और ग्रामीण समाज की समस्याओं को उठाने के लिए समर्पित रहा।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अहम पहचान

बाबू नारायण सिंह का नाम पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में लिया जाता है। वर्ष 1967 में प्रदेश की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार के गठन के समय वे उत्तर प्रदेश के प्रथम उपमुख्यमंत्री बने। उस दौर में कृषि, ग्रामीण विकास और किसान हितों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने के कारण उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसान राजनीति में उनका योगदान आज भी संदर्भ के रूप में देखा जाता है। हालांकि समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियां और प्राथमिकताएं बदली हैं, लेकिन किसान नेतृत्व की चर्चा में उनका नाम आज भी सम्मान के साथ लिया जाता है।

चंदन चौहान ने दोहराया जनसेवा का संकल्प

कार्यक्रम में बिजनौर के सांसद चंदन चौहान ने कहा कि उनके दादा स्वर्गीय बाबू नारायण सिंह का जीवन उनके लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी पूंजी है और वे उसी परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उनके दादाजी ने किसानों, गरीबों और आम जनता के लिए अपना जीवन समर्पित किया था तथा वे स्वयं भी उसी भावना के साथ क्षेत्र की जनता की सेवा करते रहेंगे। उन्होंने सादगी, ईमानदारी और जनसेवा को अपने सार्वजनिक जीवन का आधार बनाने की बात कही।

वक्ताओं ने याद किए उनके सामाजिक सरोकार

श्रद्धांजलि सभा में विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि बाबू नारायण सिंह ने राजनीति को सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं बल्कि समाज सेवा का साधन माना। उनके कार्यकाल में किसानों की समस्याओं, ग्रामीण विकास और सामाजिक न्याय जैसे विषयों को प्रमुखता मिली। वक्ताओं ने कहा कि उनकी कार्यशैली आज भी नई पीढ़ी के जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

ऐसे आयोजन क्यों रहते हैं महत्वपूर्ण

लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐतिहासिक राजनीतिक व्यक्तित्वों की पुण्यतिथि केवल स्मरण का अवसर नहीं होती, बल्कि यह उनके योगदान का मूल्यांकन करने का भी समय होता है। ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को राजनीतिक इतिहास और जनसेवा की परंपरा से जोड़ने का माध्यम बनते हैं।

हालांकि किसी भी राजनीतिक विरासत का मूल्यांकन समय, परिस्थितियों और विभिन्न दृष्टिकोणों के आधार पर किया जाता है। इसलिए इतिहासकार और राजनीतिक विश्लेषक उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अलग-अलग निष्कर्ष भी प्रस्तुत करते हैं। यही लोकतांत्रिक विमर्श की विशेषता है।

किसान राजनीति के बदलते दौर में विरासत की चर्चा

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में किसान संगठनों और ग्रामीण मुद्दों की भूमिका लंबे समय से प्रभावशाली रही है। बदलते राजनीतिक समीकरणों के बावजूद किसान नेतृत्व से जुड़े ऐतिहासिक चेहरों की चर्चा समय-समय पर होती रहती है। बाबू नारायण सिंह की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम भी इसी विरासत को याद करने का अवसर बना।

संपादकीय दृश्टिकोण 
वसी सिद्दीकी 


नसीरपुर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा केवल एक स्मृति समारोह नहीं रही, बल्कि यह जनसेवा, किसान हित और लोकतांत्रिक मूल्यों पर चर्चा का मंच भी बनी। हजारों लोगों की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि दशकों बाद भी बाबू नारायण सिंह की राजनीतिक और सामाजिक विरासत क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। आने वाले समय में भी उनके योगदान का मूल्यांकन इतिहास, राजनीति और जनचर्चा के विभिन्न मंचों पर होता रहेगा।

वीडियो देखें

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Wasi Siddiqui

Wasi Siddiqui

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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