लखनऊ में विश्व युवा कौशल दिवस समारोह, 'कौशलम' पुस्तिका का हुआ विमोचन
विश्व युवा कौशल दिवस पर सीएम योगी ने 11 युवाओं को किया सम्मानित
Location:-
Lucknow, Uttar Pradesh
Date:- 15 July 2026
Byline:- Shahana
कौशल विकास मिशन से बदली जिंदगी, मंच पर युवाओं ने सुनाई सफलता की कहानी
विश्व युवा कौशल दिवस 2026 पर उत्तर प्रदेश सरकार ने कौशल विकास के क्षेत्र में प्रशिक्षित 11 युवाओं को सम्मानित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य कौशल आधारित रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देना था। यह आयोजन युवाओं को प्रशिक्षण, रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की सरकारी नीति का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
विश्व युवा कौशल दिवस 2026: कौशल विकास को नई
दिशा देने की कोशिश विश्व युवा कौशल दिवस पर सम्मान समारोह का आयोजन
विश्व युवा कौशल दिवस 2026 के अवसर पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कौशल विकास मिशन और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) से प्रशिक्षण प्राप्त 11 युवाओं को सम्मानित किया। समारोह का उद्देश्य उन युवाओं को पहचान देना था जिन्होंने प्रशिक्षण के बाद रोजगार, स्वरोजगार या उद्यमिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। कार्यक्रम के दौरान व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग तथा उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की ओर से "कौशलम" नामक पुस्तिका का भी विमोचन किया गया। इसमें केंद्र सरकार के पिछले 12 वर्षों और उत्तर प्रदेश में कौशल विकास से जुड़े प्रमुख कार्यों और उपलब्धियों का संकलन प्रस्तुत किया गया।
सरकार का दावा, कौशल आधारित विकास पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को केवल डिग्री आधारित व्यवस्था तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें रोजगार योग्य कौशल उपलब्ध कराने पर लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण, उद्योगों से साझेदारी और रोजगार के अवसरों के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का यह भी कहना है कि कौशल विकास मिशन के जरिए लाखों युवाओं को विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें विनिर्माण, स्वास्थ्य, आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, निर्माण, सेवा क्षेत्र और अन्य रोजगारोन्मुखी क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।
मंच से सामने आई संघर्ष और सफलता की कहानी
कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक क्षण तब आया जब सम्मानित युवाओं ने अपने अनुभव साझा किए। बरेली की राजरानी ने बताया कि उनके पिता का निधन हो चुका है जबकि उनकी मां कैंसर से जूझ रही हैं। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। उन्होंने उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के बाद उन्हें हरियाणा की एक कंपनी में रोजगार मिला, जहां वर्तमान में उन्हें लगभग 27 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि अब वह अपनी मां का इलाज कराने के साथ परिवार का भरण-पोषण भी कर रही हैं। राजरानी ने अन्य युवतियों से भी सरकारी कौशल योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की।
कौशल विकास क्यों बना नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा
भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है। ऐसे में केवल औपचारिक शिक्षा पर्याप्त नहीं मानी जा रही। उद्योग जगत लगातार ऐसे प्रशिक्षित युवाओं की मांग कर रहा है जिनके पास व्यावहारिक कौशल हो। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों ने पिछले वर्षों में स्किल डेवलपमेंट, अप्रेंटिसशिप, आईटीआई आधुनिकीकरण और डिजिटल प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रमों का विस्तार किया है। उत्तर प्रदेश भी इसी दिशा में अपने कौशल विकास मिशन को आगे बढ़ा रहा है।
रोजगार के आंकड़ों पर बहस भी जारी
हालांकि कौशल विकास कार्यक्रमों को लेकर सकारात्मक उदाहरण सामने आते रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं है। प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उद्योगों की वास्तविक मांग, रोजगार की स्थिरता और वेतन स्तर जैसे प्रश्न भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। कई श्रम विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं का नियमित ट्रैकिंग सिस्टम मजबूत होना चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कितने प्रशिक्षित युवाओं को दीर्घकालिक रोजगार मिला और कितने स्वरोजगार स्थापित कर पाए। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि उद्योगों के साथ साझेदारी बढ़ने से रोजगार की संभावनाएं लगातार बेहतर हो रही हैं।
आईटीआई और कौशल विकास मिशन की बदलती भूमिका
एक समय आईटीआई संस्थानों को सीमित विकल्प के रूप में देखा जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इनमें आधुनिक ट्रेड, डिजिटल लैब, उद्योग आधारित पाठ्यक्रम और प्लेसमेंट गतिविधियों को बढ़ाने की कोशिश की गई है। राष्ट्रीय स्तर पर भी स्किल इंडिया मिशन, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और विभिन्न राज्य स्तरीय कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
महिलाओं की भागीदारी पर बढ़ता ध्यान
कार्यक्रम में सामने आई राजरानी जैसी कहानियां इस बात की ओर संकेत करती हैं कि कौशल प्रशिक्षण केवल रोजगार का माध्यम नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का साधन भी बन सकता है। महिला प्रशिक्षुओं की संख्या बढ़ाने, सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराने और उद्योगों में समान अवसर सुनिश्चित करने पर भी नीति निर्माताओं का ध्यान बढ़ रहा है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षण केंद्रों तक पहुंच, परिवहन और जागरूकता जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।
भविष्य की चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन, ग्रीन एनर्जी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में नए कौशल की मांग तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में प्रशिक्षण कार्यक्रमों को समय-समय पर अपडेट करना आवश्यक होगा। इसके साथ ही उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करना, प्रशिक्षकों की गुणवत्ता सुधारना और प्रशिक्षित युवाओं के लिए बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध कराना नीति की सफलता तय करेगा।
विश्व युवा कौशल दिवस 2026 पर आयोजित सम्मान समारोह केवल पुरस्कार वितरण का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह कौशल आधारित विकास मॉडल की एक झलक भी था। सम्मानित युवाओं की व्यक्तिगत सफलताएं प्रेरणादायक हैं, लेकिन व्यापक स्तर पर सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कौशल प्रशिक्षण कितने युवाओं को स्थायी रोजगार, सम्मानजनक आय और दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर पाता है। आने वाले वर्षों में कौशल विकास की वास्तविक परीक्षा इसी पैमाने पर होगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।