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भारत बढ़ाएगा Strategic Petroleum Reserve, ONGC ने 1.75 MMT परियोजना को दी मंजूरी; ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा बड़ा सहारा

Apurva Choudhary 2026-07-11 08:33:55
भारत बढ़ाएगा Strategic Petroleum Reserve, ONGC ने 1.75 MMT परियोजना को दी मंजूरी; ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा बड़ा सहारा

भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए Strategic Petroleum Reserve का विस्तार कर रहा है। ONGC बोर्ड ने मंगलुरु में 1.75 MMT क्षमता वाले नए भूमिगत कच्चा तेल भंडार को सिद्धांततः मंजूरी दी है। यह परियोजना भविष्य में वैश्विक आपूर्ति संकट, भू-राजनीतिक तनाव और कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रभाव को कम करने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है। 


📍 स्थान: नई दिल्ली

🗓️ Date: 11 जुलाई 2026

✍️ Apurva Choudhary


भारत रणनीतिक तेल भंडारण क्षमता बढ़ाने की तैयारी में, ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा नया आधार


नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में बढ़ती अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की आपूर्ति से जुड़े जोखिमों के बीच भारत अपनी दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण क्षमता बढ़ाने की पहल को गति मिली है। प्रस्तावित विस्तार का उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में देश की ईंधन आवश्यकताओं को सुरक्षित रखना और आपूर्ति श्रृंखला को अधिक लचीला बनाना है।


रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार क्यों महत्वपूर्ण हैं?

रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार ऐसे विशेष भूमिगत भंडारण केंद्र होते हैं, जहां कच्चे तेल का सुरक्षित स्टॉक रखा जाता है। इनका उपयोग सामान्य परिस्थितियों में नहीं, बल्कि तब किया जाता है जब अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रभावित हो, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ जाए या वैश्विक बाज़ार में तेल की उपलब्धता अचानक कम हो जाए।


विस्तार से क्या बदलेगा?

प्रस्तावित योजना के तहत देश की मौजूदा भंडारण क्षमता को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके लिए नए भंडारण ढांचे विकसित करने के साथ मौजूदा सुविधाओं को भी अधिक सक्षम बनाया जाएगा। इससे भविष्य में किसी भी आपूर्ति संकट के दौरान आवश्यक ईंधन उपलब्ध कराने की क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है।


भारत के लिए इसकी आवश्यकता क्यों है?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमतों में तेज़ उतार-चढ़ाव, समुद्री व्यापार मार्गों में व्यवधान या वैश्विक संघर्ष जैसी घटनाओं का असर घरेलू ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ सकता है। रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ाना ऐसे जोखिमों को कम करने की व्यापक ऊर्जा नीति का हिस्सा माना जा रहा है।


संभावित प्रभाव

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त रणनीतिक भंडारण क्षमता किसी भी बड़े वैश्विक संकट के दौरान देश को अतिरिक्त समय और लचीलापन प्रदान करती है। इससे रिफाइनरियों को कच्चे तेल की निरंतर उपलब्धता बनाए रखने में सहायता मिल सकती है और ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था अधिक स्थिर रह सकती है।


मौजूदा व्यवस्था

भारत में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण सुविधाएं पहले से संचालित हैं और भविष्य की मांग को देखते हुए इनका विस्तार देश की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।


रणनीतिक तेल भंडारण क्षमता का विस्तार केवल एक आधारभूत संरचना परियोजना नहीं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और आपूर्ति तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच यह कदम भविष्य की चुनौतियों से निपटने की तैयारी को और सुदृढ़ कर सकता है।

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Apurva Choudhary

Apurva Choudhary

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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