भिवंडी बिल्डिंग हादसा: 9 मौतें, जर्जर इमारत पर उठे सवाल
रेस्क्यू जारी, मौत बढ़ी... भिवंडी हादसे की पूरी कहानी
खतरे की चेतावनी के बावजूद लोग क्यों रह रहे थे इस इमारत में?
भिवंडी, ठाणे, महाराष्ट्र
31 जुलाई 2026
Asif Khan
महाराष्ट्र के ठाणे ज़िले के भिवंडी में गुरुवार देर रात हुआ बिल्डिंग हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि शहरी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी खड़े करता है। चार मंजिला कोहिनूर बिल्डिंग की बी-विंग अचानक भरभराकर गिर गई, जिससे अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है। कई लोग घायल हुए हैं, जबकि राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रात में पहले तेज़ दरारों जैसी आवाज़ें सुनाई दीं। स्थानीय लोगों ने कई परिवारों को बाहर निकलने में मदद भी की, लेकिन कुछ लोग समय रहते बाहर नहीं आ सके और मलबे में दब गए।
हादसा भिवंडी के बालाजी नगर स्थित कोहिनूर बिल्डिंग में देर रात हुआ। इमारत की बी-विंग अचानक ढह गई। सूचना मिलते ही एनडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुँचा। भारी मशीनों और डॉग स्क्वॉड की मदद से मलबा हटाने का काम जारी है।
रेस्क्यू अभियान के दौरान एनडीआरएफ के एक असिस्टेंट कमांडेंट भी घायल हो गए, जिससे अभियान की कठिन परिस्थितियों का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस इमारत को पहले ही स्थानीय निकाय ने खतरनाक घोषित किया था। इसके बावजूद उसमें लोग रह रहे थे। कुछ रिपोर्टों के अनुसार इमारत में मरम्मत का काम भी चल रहा था। हादसे की सबसे बड़ी पड़ताल अब यही होगी कि जब भवन असुरक्षित घोषित था, तब उसे पूरी तरह खाली क्यों नहीं कराया गया।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि रात लगभग 8 से 9 बजे के बीच इमारत से अजीब आवाज़ें आने लगी थीं। इसके बाद लोगों ने अपने स्तर पर कई परिवारों को बाहर निकाला। यदि यह सतर्कता नहीं दिखाई जाती तो जनहानि और अधिक हो सकती थी।
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक जवाबदेही का है। क्या भवन की नियमित निगरानी हो रही थी? क्या निवासियों को पर्याप्त नोटिस दिया गया था? क्या भवन खाली कराने की कार्रवाई प्रभावी रही? इन सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। अभी तक दुर्घटना के सटीक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भिवंडी जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में पुरानी और जर्जर इमारतें लगातार जोखिम बनी हुई हैं। विशेषज्ञ लंबे समय से भवनों का नियमित स्ट्रक्चरल ऑडिट, समय पर मरम्मत और असुरक्षित इमारतों को खाली कराने की आवश्यकता पर ज़ोर देते रहे हैं।
यह हादसा केवल एक शहर की समस्या नहीं, बल्कि देश के अनेक पुराने शहरी इलाकों के लिए चेतावनी है। यदि समय रहते भवन सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी गई तो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना कठिन होगा।
भिवंडी बिल्डिंग हादसा केवल एक दुखद दुर्घटना नहीं बल्कि शहरी नियोजन, भवन सुरक्षा और प्रशासनिक अमल के बीच मौजूद कमियों की भी याद दिलाता है। फिलहाल राहत एवं बचाव अभियान जारी है और मृतकों की संख्या बदल सकती है। जांच पूरी होने के बाद ही हादसे के वास्तविक कारण और संभावित जिम्मेदारियों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।