मेटा ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े अमेरिकी मुकदमों को निपटाने के लिए करीब 18 अरब डॉलर तक भुगतान पर सहमति दी है। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर किशोरों के लिए नए सुरक्षा नियम लागू होंगे।
ओकलैंड, कैलिफोर्निया, अमेरिका | 27 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
अमेरिकी राज्यों के साथ हुए एक बड़े कानूनी समझौते के बाद फेसबुक और इंस्टाग्राम की मालिक कंपनी मेटा को बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े आरोपों के निपटारे के लिए अगले 10 वर्षों में 18 अरब डॉलर तक का भुगतान करना होगा। समझौते के साथ कंपनी ने किशोर उपयोगकर्ताओं के लिए अपने प्लेटफॉर्म पर कई अहम सुरक्षा बदलाव लागू करने पर भी सहमति दी है। यह मामला केवल आर्थिक भुगतान तक सीमित नहीं है। समझौते में किशोरों के सोशल मीडिया इस्तेमाल की अवधि, रात के समय पहुंच, स्कूल के दौरान नोटिफिकेशन और उम्र की पुष्टि जैसे मुद्दों पर नए प्रावधान शामिल हैं। हालांकि मेटा ने किसी गलत काम की स्वीकारोक्ति नहीं की है।
मामला क्या है
अमेरिका के कई राज्यों ने मेटा के खिलाफ मुकदमे दायर किए थे। आरोप था कि कंपनी ने फेसबुक और इंस्टाग्राम के ऐसे फीचर तैयार किए, जिनसे बच्चों और किशोरों को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने की प्रवृत्ति बढ़ी। राज्यों का आरोप था कि मेटा को कम उम्र के उपयोगकर्ताओं पर सोशल मीडिया के संभावित मानसिक और मनोवैज्ञानिक असर की जानकारी थी, फिर भी कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म की सुरक्षा को लेकर जनता को गुमराह किया। मुकदमों में बच्चों की निजी जानकारी से जुड़े कथित उल्लंघनों के आरोप भी शामिल थे। यह मुकदमा कैलिफोर्निया की संघीय अदालत में चल रहे एक महत्वपूर्ण ट्रायल के दौरान समझौते तक पहुंचा। शुरुआत में कुछ राज्यों ने मेटा से कहीं अधिक बड़ी आर्थिक क्षतिपूर्ति की मांग की थी। समझौते के बाद उस मुकदमे का आगे का ट्रायल रुक गया है।
18 अरब डॉलर की रकम का मतलब
मीडिया रिपोर्टों में समझौते की अधिकतम रकम करीब 18 अरब डॉलर बताई गई है। हालांकि आधिकारिक अमेरिकी राज्य सरकारों की घोषणाओं में मूल बहु-राज्य समझौते की रकम 17.1 अरब डॉलर तक बताई गई है। अलग-अलग रिपोर्टों में रकम की गणना और अतिरिक्त शर्तों के कारण आंकड़े में अंतर दिखाई देता है। रिपोर्ट के मुताबिक समझौते में 12.7 अरब डॉलर की गारंटीड राशि और लगभग 5 अरब डॉलर की अतिरिक्त राशि जैसी शर्तें शामिल हैं। अतिरिक्त भुगतान का एक हिस्सा दूसरी बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों की समान सुरक्षा शर्तें अपनाने से जुड़ा है। इसलिए इसे सीधे तौर पर 18 अरब डॉलर की तत्काल अदायगी कहना सही नहीं होगा। यह अधिकतम संभावित भुगतान है, जो समझौते की अलग-अलग शर्तों के पूरा होने पर निर्भर करता है।
किशोरों के लिए क्या बदलने वाला है
समझौते के तहत फेसबुक और इंस्टाग्राम पर किशोर उपयोगकर्ताओं के लिए डिफॉल्ट रूप से रोजाना 2 घंटे की सीमा लागू करने का प्रावधान है। यह सीमा माता-पिता की अनुमति के बिना बदली नहीं जा सकेगी। इस्तेमाल के दौरान किशोरों को समय बीतने की जानकारी देने वाले अलर्ट भी मिलेंगे।
रात के समय भी पहुंच सीमित होगी। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार आधी रात से सुबह 6 बजे तक मेटा के इन ऐप्स पर किशोरों की पहुंच डिफॉल्ट रूप से रोकी जाएगी। स्कूल के समय नोटिफिकेशन भी सीमित किए जाएंगे। सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक नोटिफिकेशन को डिफॉल्ट रूप से म्यूट करने का प्रावधान रखा गया है। इसका उद्देश्य स्कूल के दौरान सोशल मीडिया से होने वाले व्यवधान को कम करना है।
उम्र की पुष्टि पर जोर
समझौते में उम्र की पुष्टि करने वाली तकनीक को भी अहम स्थान दिया गया है। मेटा ऐसे खातों की पहचान मजबूत करने पर काम करेगा, जो वास्तविक उम्र से जुड़ी जानकारी के बारे में संदेह पैदा करते हैं। कंपनी को 13 साल से कम उम्र के संभावित उपयोगकर्ताओं की पहचान के लिए उम्र सुनिश्चित करने वाली तकनीक में निवेश बढ़ाना होगा। किशोरों के लिए बनाए गए खातों में भी उम्र संबंधी जांच को मजबूत किया जाएगा। यह प्रावधान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सोशल मीडिया कंपनियों के लिए कम उम्र के उपयोगकर्ताओं की सही पहचान लंबे समय से एक चुनौती रही है। केवल जन्मतिथि दर्ज कराने वाली व्यवस्था को पर्याप्त नहीं माना जा रहा है।
लाइक्स और कंटेंट पर भी बदलाव
समझौते में किशोर उपयोगकर्ताओं के लिए लाइक्स और रिएक्शन की संख्या छिपाने का प्रावधान भी शामिल है। इसका मकसद सोशल मीडिया पर लोकप्रियता से जुड़े दबाव को कम करना है। मेटा ने यह भी कहा है कि किशोरों को ऐसे कंटेंट और फीचर्स से बचाने के लिए मौजूदा सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जाएगा, जिन्हें कंपनी हानिकारक मानती है। कुछ मेकअप फिल्टर पर भी अतिरिक्त पाबंदी का प्रावधान है। माता-पिता के नियंत्रण को मजबूत करने की बात भी समझौते में शामिल है। किशोरों की तरफ से हानिकारक कंटेंट की रिपोर्ट मिलने पर कंपनी की प्रतिक्रिया प्रक्रिया को तेज करने की योजना है।
मेटा ने क्या कहा
मेटा ने समझौते के जरिए किसी गलत काम की स्वीकारोक्ति नहीं की है। कंपनी ने अपने बयान में किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर नए सुरक्षा उपायों को व्यापक स्तर पर लागू करने की बात कही है। कंपनी ने दूसरी सोशल मीडिया कंपनियों से भी इसी तरह के सुरक्षा मानक अपनाने की अपील की है। मेटा का तर्क है कि किशोर एक ही प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रहते, इसलिए बाल सुरक्षा के लिए पूरे उद्योग में समान मानकों की जरूरत है।
कानूनी विवाद यहीं खत्म नहीं
यह समझौता मेटा के खिलाफ चल रहे सभी मामलों का अंत नहीं करता। फ्लोरिडा और न्यू मैक्सिको जैसे राज्यों की स्थिति अलग है। फ्लोरिडा ने समझौते में शामिल नहीं होने का फैसला किया है और न्यू मैक्सिको में कंपनी पहले अलग कानूनी कार्रवाई में भारी आर्थिक दंड का सामना कर चुकी है। इसके अलावा अमेरिका में स्कूल जिलों, परिवारों और व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं की तरफ से सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ कई अन्य मुकदमे जारी हैं। इन मामलों में मानसिक स्वास्थ्य, कथित लत, आत्महत्या और अन्य नुकसान से जुड़े अलग-अलग दावे किए गए हैं। हर मामले में आरोप और कानूनी निष्कर्ष अलग हैं, इसलिए सभी मामलों को एक ही तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
टेक कंपनियों पर बढ़ता दबाव
मेटा के साथ यह समझौता अमेरिकी तकनीकी कंपनियों के लिए व्यापक नियामकीय दबाव का संकेत है। बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर अमेरिका में राज्य सरकारें, अभिभावक और नागरिक संगठन लंबे समय से ज्यादा सख्त नियमों की मांग कर रहे हैं। इस समझौते का असर दूसरी कंपनियों पर भी पड़ सकता है। मेटा ने खुद टिकटॉक और यूट्यूब जैसी कंपनियों से समान सुरक्षा मानक अपनाने की अपील की है। समझौते की कुछ आर्थिक शर्तें भी दूसरी कंपनियों द्वारा समान उपाय अपनाने से जुड़ी हैं।
आलोचनाएं भी सामने आईं
बाल सुरक्षा से जुड़े संगठनों ने समझौते में शामिल उपायों का स्वागत किया है, लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि केवल समय सीमा और उम्र जांच से सोशल मीडिया के सभी जोखिम खत्म नहीं होंगे। आलोचकों का कहना है कि प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम, हानिकारक कंटेंट की पहचान और बच्चों की डिजिटल आदतों से जुड़े बुनियादी सवाल अभी भी बने हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ विशेषज्ञों ने इन उपायों को अहम शुरुआत माना, लेकिन व्यापक सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया है।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर असर
इस समझौते का सबसे अहम पहलू आर्थिक रकम से ज्यादा प्लेटफॉर्म डिजाइन में बदलाव है। पहली बार इतने बड़े स्तर पर एक प्रमुख सोशल मीडिया कंपनी को किशोरों के इस्तेमाल पर डिफॉल्ट सीमाएं और सुरक्षा प्रावधान स्वीकार करने पड़े हैं। हालांकि इन उपायों का वास्तविक असर इनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। उम्र की सही पहचान, माता-पिता की अनुमति, सुरक्षा शिकायतों पर कार्रवाई और नियमों की निगरानी, सभी पहलुओं पर प्रभावी अमल जरूरी होगा।
आगे की राह
मेटा के लिए यह समझौता एक बड़े कानूनी विवाद से निकलने का रास्ता है, लेकिन साथ ही कंपनी के प्लेटफॉर्म संचालन में महत्वपूर्ण बदलाव की शुरुआत भी है। आने वाले समय में निगाह इस बात पर रहेगी कि नई पाबंदियां कितनी प्रभावी साबित होती हैं और क्या दूसरी सोशल मीडिया कंपनियां भी समान सुरक्षा मानक अपनाती हैं। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर यह विवाद एक बड़े सवाल को सामने रखता है। सोशल मीडिया कंपनियों को अपनी सेवाओं की लोकप्रियता और कारोबार के साथ कम उम्र के उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के बीच संतुलन किस तरह कायम करना चाहिए।
मेटा के खिलाफ हुआ यह समझौता इस बहस में एक अहम पड़ाव है। आर्थिक भुगतान बड़ा है, लेकिन इसका दीर्घकालिक असर इस बात से तय होगा कि प्लेटफॉर्म पर लागू नए सुरक्षा नियम वास्तव में बच्चों और किशोरों के डिजिटल अनुभव को कितना सुरक्षित बनाते हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।