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Meta स्कैम Ads से सालाना 7 अरब डॉलर की कमाई का दावा, जांच में बड़ा खुलासा
Shah Times
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2026-08-06 06:11:31
Meta स्कैम Ads से 7 अरब डॉलर की कमाई का दावा
स्कैम Ads पर Meta की कमाई का राज, 7 अरब डॉलर का आंकड़ा
Meta पर स्कैम Ads को लेकर गंभीर आरोप, अरबों डॉलर का मामला
Meta पर स्कैम Ads से सालाना करीब 7 अरब डॉलर की आमदनी के आरोप ने डिजिटल विज्ञापन मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। Reuters की जांच और कैलिफोर्निया मुकदमे में आंतरिक दस्तावेजों का हवाला है। Meta ने आरोपों को खारिज करते हुए स्कैम के खिलाफ अपनी कार्रवाई और 2025 में 159 मिलियन Ads हटाने का दावा किया है।
📍 Newyork 📰 Date: 6 अगस्त 2026 ✍️ By Asif Khan
Meta स्कैम Ads से 7 अरब डॉलर की कमाई का दावा
Facebook और Instagram की पैरेंट कंपनी Meta एक गंभीर डिजिटल-सिक्योरिटी और विज्ञापन विवाद के केंद्र में है। Reuters की 2025 की जांच में सामने आए आंतरिक दस्तावेजों के मुताबिक Meta ने अनुमान लगाया था कि हाई-रिस्क स्कैम Ads से उसकी सालाना आमदनी करीब 7 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। यह आंकड़ा किसी प्रकाशित वित्तीय रिपोर्ट में अलग से दर्ज स्कैम-रेवेन्यू नहीं है, बल्कि आंतरिक दस्तावेजों में दर्ज अनुमान है।
मामला 2026 में और गंभीर हुआ, जब कैलिफोर्निया के Santa Clara County ने Meta के खिलाफ मुकदमा दायर किया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कंपनी ने Facebook और Instagram पर स्कैम विज्ञापनों से होने वाली आमदनी को लेकर पर्याप्त सख्ती नहीं दिखाई। Meta ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि उसके खिलाफ पेश की गई तस्वीर उसके फ्रॉड-विरोधी काम को सही तरीके से पेश नहीं करती।
7 अरब डॉलर के आंकड़े का असल मतलब
यहां सबसे जरूरी फर्क समझना होगा। 7 अरब डॉलर का आंकड़ा Meta की कुल आमदनी या पूरे स्कैम इकोसिस्टम की कमाई नहीं है। Reuters द्वारा देखे गए दिसंबर 2024 के दस्तावेज में हाई-रिस्क स्कैम Ads से सालाना लगभग 7 अरब डॉलर की आमदनी का अनुमान बताया गया था। इसी रिपोर्टिंग में करीब 15 अरब हाई-रिस्क Ads रोजाना दिखाए जाने का आंतरिक अनुमान भी सामने आया।
इसके अलावा एक अलग आंतरिक अनुमान में Meta ने 2024 की अपनी कुल सालाना आमदनी के करीब 10 फीसदी, यानी लगभग 16 अरब डॉलर, को स्कैम और प्रतिबंधित सामान से जुड़े Ads से आने का अनुमान लगाया था। इसलिए 7 अरब डॉलर और 16 अरब डॉलर को एक ही कैटेगरी मानना संपादकीय तौर पर गलत होगा।
जांच में क्या सामने आया
Reuters की जांच के मुताबिक Meta के आंतरिक दस्तावेजों में स्कैम, फ्रॉड, अवैध जुआ, निवेश योजनाओं और प्रतिबंधित मेडिकल प्रोडक्ट्स से जुड़े Ads की बड़ी संख्या का जिक्र था। रिपोर्ट के अनुसार प्लेटफॉर्म पर मौजूद कुछ विज्ञापन ऐसे थे जिनमें धोखाधड़ी के स्पष्ट संकेत थे, फिर भी वे बड़ी संख्या में यूजर्स तक पहुंच रहे थे।
एक दिसंबर 2024 के दस्तावेज में रोजाना करीब 15 अरब “हाई-रिस्क” स्कैम Ads दिखाए जाने का अनुमान दर्ज था। यह संख्या Ads के Impressions को दर्शाती है, अलग-अलग लोगों या अलग-अलग स्कैम का आंकड़ा नहीं। इसलिए इसे 15 अरब पीड़ित या 15 अरब अलग-अलग विज्ञापन समझना भी सही नहीं होगा।
2022 से 2025 तक मामला कैसे बढ़ा
Reuters की रिपोर्टिंग में 2022 के एक दस्तावेज का हवाला दिया गया, जिसमें ऑटोमेटेड स्कैम डिटेक्शन में निवेश की कमी का उल्लेख था। इसके बाद कंपनी ने सेलिब्रिटी के नाम और पहचान का इस्तेमाल करने वाले फ्रॉड पर भी ध्यान केंद्रित किया। दस्तावेजों में इस तरह के फ्रॉड से यूजर्स और विज्ञापनदाताओं पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता दर्ज थी।
2023 से जुड़े दस्तावेजों के बारे में Reuters ने बताया कि Facebook और Instagram पर यूजर्स की ओर से हर हफ्ते करीब एक लाख वैध फ्रॉड रिपोर्ट आने का अनुमान था। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने उनमें से 96 फीसदी रिपोर्ट को इग्नोर या रिजेक्ट किया। यह दावा आंतरिक दस्तावेजों पर आधारित रिपोर्टिंग का हिस्सा है और Meta ने पूरे नैरेटिव को चुनौती दी है।
2024 में आंतरिक दस्तावेजों ने स्कैम Ads से जुड़ी आमदनी और हाई-रिस्क विज्ञापनों की मात्रा को लेकर ज्यादा बड़ा सवाल खड़ा किया। 2025 में Reuters की जांच ने इन दस्तावेजों को सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया। इसके बाद 2026 में मामला अदालत तक पहुंच गया।
Meta का पक्ष क्या है
Meta ने Reuters की रिपोर्ट में इस्तेमाल दस्तावेजों को कंपनी के फ्रॉड-विरोधी नजरिए की “चुनिंदा तस्वीर” बताया। कंपनी का कहना रहा कि वह स्कैम को रोकने के लिए आक्रामक कार्रवाई करती है क्योंकि ऐसे कंटेंट से यूजर्स, वैध विज्ञापनदाता और खुद Meta प्रभावित होते हैं।
Meta ने मार्च 2026 में बताया कि 2025 के दौरान उसने दुनिया भर में 159 मिलियन से अधिक स्कैम Ads हटाए। कंपनी के मुताबिक इनमें 92 फीसदी Ads यूजर्स की रिपोर्ट आने से पहले हटा दिए गए। उसी दौरान Facebook और Instagram से स्कैम सेंटर से जुड़े 10.9 मिलियन अकाउंट्स भी हटाने का दावा किया गया।
भारत के संदर्भ में Meta ने कहा कि 2025 में उसने Fraud, Scam और Deceptive Practices की पॉलिसी का उल्लंघन करने वाले 12.1 मिलियन से अधिक Ad कंटेंट पर कार्रवाई की। कंपनी के मुताबिक इनमें 93 फीसदी से ज्यादा कार्रवाई प्रोएक्टिव तरीके से हुई।
विवाद का असल मसला क्या है
इस विवाद का केंद्र केवल यह सवाल नहीं है कि Meta कितने स्कैम Ads हटाता है। बड़ा सवाल यह है कि संदिग्ध Ads की पहचान, रोकथाम और विज्ञापन नीलामी के बीच कंपनी का सिस्टम किस तरह काम करता है।
Reuters की रिपोर्टिंग के अनुसार Meta के आंतरिक दस्तावेजों में ऐसे सिस्टम का जिक्र था जिसमें किसी विज्ञापनदाता को स्कैम करने का पर्याप्त भरोसा न होने पर भी उस पर ज्यादा Ad लागत लागू की जा सकती थी। Meta की दलील है कि यह फ्रॉड रोकने की प्रक्रिया का हिस्सा था, जबकि आलोचकों का सवाल है कि ऐसे मॉडल में संदिग्ध विज्ञापन से आर्थिक लाभ का जोखिम पैदा होता है।
यहां आरोप और प्रमाण के बीच फर्क बनाए रखना जरूरी है। उपलब्ध दस्तावेज Meta के आंतरिक अनुमान और प्रक्रियाओं पर सवाल उठाते हैं, लेकिन 7 अरब डॉलर को अदालत द्वारा सिद्ध “अवैध कमाई” बताना अभी सही नहीं होगा।
2026 में मुकदमे ने विवाद को नया मोड़ दिया
मई 2026 में Santa Clara County ने Meta पर मुकदमा दायर किया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कंपनी Facebook और Instagram पर स्कैम Ads से अरबों डॉलर की आमदनी हासिल करती रही और उपभोक्ता सुरक्षा के मुकाबले आर्थिक हितों को तरजीह दी। शिकायत में करीब 7 अरब डॉलर सालाना का आंकड़ा हाई-रिस्क स्कैम Ads से जुड़ा है।
अदालत में दाखिल शिकायत खुद आरोपों का दस्तावेज है, अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं। इसलिए इसमें लिखे दावों को स्थापित तथ्य के बजाय मुकदमे में लगाए गए आरोप के तौर पर पेश करना जरूरी है।
डिजिटल इकोनॉमी पर इसका असर
Meta का बिजनेस मॉडल बड़े पैमाने पर डिजिटल विज्ञापन पर निर्भर है। ऐसे में अगर स्कैम Ads का हिस्सा वास्तव में अरबों डॉलर के स्तर पर रहा है, तो मामला केवल कंटेंट मॉडरेशन का नहीं रहता। यह Ad-tech, Consumer Protection और Platform Accountability के बीच सीधा टकराव बन जाता है।
विज्ञापनदाता के लिए भी यह गंभीर मसला है। अगर किसी प्लेटफॉर्म पर धोखाधड़ी वाले Ads बड़े पैमाने पर पहुंचते हैं, तो वैध ब्रांड की Credibility प्रभावित होती है। यूजर का भरोसा कमजोर होता है और डिजिटल विज्ञापन बाजार में Compliance Cost बढ़ सकती है।
भारत के लिए क्या मायने हैं
भारत में Facebook और Instagram की पहुंच बड़ी है और डिजिटल फ्रॉड के तरीके लगातार बदल रहे हैं। Meta के अपने आंकड़ों के मुताबिक 2025 में भारत में 12.1 मिलियन से ज्यादा Ad कंटेंट को Fraud, Scam और Deceptive Practices के उल्लंघन के तहत हटाया गया।
यह आंकड़ा दो तस्वीरें एक साथ दिखाता है। पहली, स्कैम Ads की चुनौती व्यापक है। दूसरी, प्लेटफॉर्म पर Enforcement भी बड़े पैमाने पर हो रही है। इसलिए केवल हटाए गए Ads की संख्या से यह तय नहीं होता कि सिस्टम पर्याप्त प्रभावी है या नहीं। असल पैमाना यह है कि कितने संदिग्ध Ads यूजर तक पहुंचने से पहले रोके गए और कितने लोगों को आर्थिक नुकसान हुआ।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नियामकीय दबाव
स्कैम Ads का विवाद अमेरिका तक सीमित नहीं है। मई 2026 में यूरोपीय Consumer Organizations ने Meta, Google और TikTok के खिलाफ वित्तीय स्कैम से जुड़ी शिकायतें दाखिल कीं। Reuters के मुताबिक दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच Consumer Groups ने करीब 900 संदिग्ध Ads जमा किए, जिनमें केवल 27 फीसदी हटाए गए।
यह घटनाक्रम Digital Services Act जैसे नियमों के महत्व को बढ़ाता है। यूरोप में बड़े प्लेटफॉर्मों से Illegal और Harmful Content के जोखिम को नियंत्रित करने की अपेक्षा बढ़ रही है। आने वाले समय में Ad Transparency, Advertiser
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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।