अमेरिका में मेटा पर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा में नाकामी को लेकर भारी जुर्माना लगा। कोर्ट ने प्लेटफॉर्म को हानिकारक बताया और नए नियम लागू करने का आदेश दिया। मामला बिग टेक रेगुलेशन और डिजिटल सेफ्टी पर वैश्विक बहस को तेज करता है।
📍 न्यू मैक्सिको, अमेरिका
📰 07 अगस्त 2026
✍️ By Asif Khan
अमेरिका के न्यू मैक्सिको की अदालत ने टेक दिग्गज मेटा पर 56.7 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त जुर्माना लगाया है। यह फैसला बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े गंभीर मसलों पर आया है। कुल पेनल्टी अब 94.2 करोड़ डॉलर तक पहुंच चुकी है।
कोर्ट का यह रुख दिखाता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही अब ज्यादा सख्त हो रही है। जज ब्रायन बीडशीड ने मेटा को ‘सार्वजनिक नुकसान पहुंचाने वाली कंपनी’ तक कह दिया।
मामला इस आरोप से जुड़ा है कि मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म पर बच्चों को संभावित खतरों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर बच्चों को हानिकारक कंटेंट और यौन शिकारियों तक पहुंच मिल रही थी।
अदालत ने माना कि यह सिर्फ टेक्निकल कमी नहीं, बल्कि एक सिस्टमेटिक फेलियर है। इससे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ रहा है।
अदालत ने मेटा को कई बड़े बदलाव लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसमें बच्चों के लिए ‘लाइक काउंट’ हटाना शामिल है। साथ ही रात और स्कूल टाइम में नोटिफिकेशन रोकने का आदेश दिया गया है।
इसके अलावा 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए महीने में 90 घंटे की समय सीमा तय की गई है। यह लगभग तीन घंटे रोज के बराबर है।
कोर्ट ने वयस्कों द्वारा बच्चों को मैसेज भेजने पर भी सख्त पाबंदी लगाने को कहा है।
पिछले कुछ सालों में मेटा और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई केस सामने आए हैं। अमेरिका में हजारों मुकदमे लंबित हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि एल्गोरिद्म आधारित कंटेंट डिलीवरी सिस्टम बच्चों को एडिक्टिव और हानिकारक सामग्री की ओर धकेलता है।
कैलिफोर्निया में अगले हफ्ते एक और बड़ा केस शुरू होने वाला है, जो बच्चों की प्राइवेसी से जुड़ा है।
शुरुआती शिकायतों में पैरेंट्स और हेल्थ एक्सपर्ट्स ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के असर की बात उठाई।
इसके बाद कई स्टेट्स में जांच शुरू हुई। कोर्ट में पेश दस्तावेजों ने दिखाया कि कंपनी को जोखिम की जानकारी थी, फिर भी पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए।
अब यह फैसला उसी जांच का नतीजा है।
यह सिर्फ एक कंपनी पर जुर्माना नहीं है। यह पूरे बिग टेक इकोसिस्टम के लिए चेतावनी है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म अब सिर्फ टेक्नोलॉजी कंपनी नहीं, बल्कि सामाजिक प्रभाव वाले इदारे बन चुके हैं। ऐसे में उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ती है।
यह फैसला ग्लोबल रेगुलेशन ट्रेंड को भी मजबूत करता है।
मेटा ने इस फैसले का विरोध किया है। कंपनी का कहना है कि वह लगातार ऑनलाइन सेफ्टी पर काम कर रही है।
कंपनी ने ऊपरी अदालत में अपील करने का फैसला किया है। मेटा का दावा है कि उसने पहले ही कई सेफ्टी टूल्स लागू किए हैं।
मेटा का तर्क है कि पैरेंटल कंट्रोल और यूजर सेटिंग्स मौजूद हैं। लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है।
कई रिसर्च रिपोर्ट्स बताती हैं कि एल्गोरिद्म यूजर एंगेजमेंट बढ़ाने के लिए रिस्की कंटेंट को प्राथमिकता देते हैं।
यह सवाल भी उठता है कि क्या कंपनियां मुनाफे और सेफ्टी के बीच संतुलन बना पा रही हैं।
यह फैसला अमेरिकी पॉलिसी मेकिंग पर असर डाल सकता है। कई सांसद पहले से ही सोशल मीडिया रेगुलेशन को सख्त करने की मांग कर रहे हैं।
यूरोप में पहले ही डिजिटल सर्विसेज एक्ट जैसे कानून लागू हो चुके हैं। अमेरिका भी उसी दिशा में बढ़ता दिख रहा है।
इतना बड़ा जुर्माना मेटा के लिए वित्तीय झटका जरूर है, लेकिन कंपनी के आकार के हिसाब से यह सीमित असर वाला है।
असल चुनौती ऑपरेशनल बदलाव की है। नए नियम लागू करना और सिस्टम अपडेट करना महंगा और जटिल होगा।
यह मामला वैश्विक स्तर पर भी असर डाल सकता है। भारत सहित कई देशों में सोशल मीडिया रेगुलेशन पर बहस तेज हो सकती है।
सरकारें अब बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को राष्ट्रीय पॉलिसी का हिस्सा बना रही हैं।
मेटा की अपील इस केस को लंबा खींच सकती है। लेकिन फिलहाल अदालत का आदेश लागू रहेगा।
आने वाले समय में और सख्त नियम सामने आ सकते हैं। टेक कंपनियों को अपने बिजनेस मॉडल पर भी पुनर्विचार करना पड़ सकता है।
मेटा जुर्माना सिर्फ कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि डिजिटल युग का नया संकेत है।
बच्चों की सुरक्षा अब वैकल्पिक नहीं, अनिवार्य बन चुकी है।
अगर टेक कंपनियां खुद सुधार नहीं करेंगी, तो अदालतें और सरकारें सख्ती बढ़ाती रहेंगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।