स्मार्टफोन में लगेगा सुरक्षा कवच, बच्चों को नग्न तस्वीरें लेने और शेयर करने से रोकने की तैयारी
Harish Qureshi
•
2026-09-09 16:46:45
ब्रिटेन सरकार ने टेक कंपनियों को बच्चों के डिवाइस में नग्न तस्वीरों को पहचानकर ब्लॉक करने वाली तकनीक लागू करने को कहा है। कंपनियों को 3 महीने में प्रगति दिखानी होगी।
लंदन | 9 सितंबर 2026
Mohd Haris
ब्रिटेन ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर टेक कंपनियों पर दबाव और बढ़ा दिया है। सरकार ऐसी व्यवस्था लागू करना चाहती है जिसमें बच्चों के स्मार्टफोन और टैबलेट नग्न तस्वीरों को लेने, साझा करने या देखने से रोकें।
प्रधानमंत्री की घोषणा के मुताबिक एप्पल और गूगल जैसी बड़ी टेक कंपनियों को डिवाइस में मौजूद तकनीकी सुरक्षा उपायों को सक्रिय करना होगा या ऐसी तकनीक विकसित करनी होगी जो बच्चों के लिए नग्न तस्वीरों को पहचानकर ब्लॉक करे। सरकार ने कंपनियों को meaningful progress दिखाने के लिए 3 महीने का समय दिया है।
यह अभी कानून बना या प्रस्ताव है?
इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है।
ब्रिटेन सरकार ने 8 जून 2026 को योजना की घोषणा की थी। उस समय सरकार ने कहा था कि अगर टेक कंपनियां 3 महीने के भीतर पर्याप्त कदम नहीं उठातीं, तो सरकार कानून लाकर इन सुरक्षा उपायों को अनिवार्य करेगी।
इसलिए मौजूदा स्थिति को सीधे तौर पर “नया कानून लागू हो गया” कहना सही नहीं होगा। यह सरकार की घोषित नीति और प्रस्तावित विधायी कार्रवाई का हिस्सा है।
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि नियमों का पालन नहीं करने वाली कंपनियों पर जुर्माना लगाया जा सकता है। अंतिम स्थिति में टेक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक जिम्मेदारी की संभावना तलाशने की बात भी सरकार ने कही है।
डिवाइस स्तर पर कैसे काम करेगी सुरक्षा
सरकार का प्रस्ताव केवल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है।
लक्ष्य यह है कि स्मार्टफोन और टैबलेट के ऑपरेटिंग सिस्टम स्तर पर ऐसी सुरक्षा व्यवस्था हो, जो नग्न तस्वीरों की पहचान कर सके और उन्हें ब्लॉक करे।
इसका अर्थ है कि सुरक्षा केवल किसी एक ऐप पर निर्भर नहीं रहेगी। सरकार चाहती है कि कैमरा, मैसेजिंग, थर्ड-पार्टी सेवाओं और अन्य ऐप्स में भी बच्चों के लिए यह सुरक्षा डिफॉल्ट रूप से काम करे।
सरकार के अनुसार मौजूदा डिवाइस सुरक्षा उपाय कई जगह मौजूद हैं, लेकिन वे एक जैसे लागू नहीं हैं। कई मामलों में वे डिफॉल्ट रूप से बंद रहते हैं या केवल तस्वीर को ब्लर करते हैं, उसे पूरी तरह ब्लॉक नहीं करते।
बच्चों को किस तरह की सुरक्षा मिलेगी
प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों को नग्न तस्वीरें लेने, देखने, सेव करने या साझा करने से रोकना है।
सरकार का कहना है कि इससे ऑनलाइन ग्रूमिंग, यौन शोषण, ब्लैकमेल, दबाव और बच्चों द्वारा खुद बनाई गई आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार का जोखिम कम होगा।
ब्रिटेन सरकार के मुताबिक 2024 में दर्ज ऑनलाइन बाल यौन शोषण की 91 प्रतिशत रिपोर्टों में बच्चों द्वारा खुद तैयार की गई सामग्री शामिल थी। सरकार ने यह भी कहा कि औसत बच्चा अब लगभग 13 वर्ष की उम्र में पोर्नोग्राफी देखता है।
एडल्ट यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा
सरकार के प्रस्ताव में वयस्कों और बच्चों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है।
18 वर्ष से अधिक उम्र के लोग उम्र सत्यापन प्रक्रिया पूरी करने के बाद वयस्क सामग्री तक पहुंच बनाए रखेंगे।
इसका मतलब यह है कि सरकार सभी यूजर्स के लिए नग्न या वयस्क सामग्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की बात नहीं कर रही है। मुख्य फोकस बच्चों के डिवाइस और बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर है।
प्राइवेसी को लेकर भी सरकार का दावा
डिवाइस स्तर की निगरानी को लेकर सबसे बड़ा सवाल प्राइवेसी का है।
ब्रिटेन सरकार का कहना है कि प्रस्तावित सुरक्षा व्यवस्था बच्चों की निजी जानकारी को किसी केंद्रीय सर्वर पर भेजे बिना काम करनी चाहिए।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कंपनियों को ऐसी तकनीक विकसित करनी होगी जो डिवाइस पर ही हानिकारक सामग्री को ब्लॉक करे और डेटा संग्रह की नई समस्या पैदा न करे।
यही पहलू आगे की नीति बहस में सबसे महत्वपूर्ण रहेगा, क्योंकि बाल सुरक्षा और डिजिटल प्राइवेसी के बीच संतुलन आसान नहीं है।
एप्पल पहले से क्या कर रहा है
ब्रिटेन सरकार के मुताबिक एप्पल ने पहले ही आईफोन यूजर्स के लिए उम्र जांच से जुड़े कुछ सुरक्षा उपाय लागू किए हैं।
कंपनी ने उन यूजर्स के लिए कुछ सुरक्षा फीचर डिफॉल्ट रूप से सक्रिय किए हैं जिनकी उम्र 18 वर्ष से अधिक सत्यापित नहीं हुई है।
लेकिन सरकार का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था कैमरा, व्यापक ऐप इकोसिस्टम, थर्ड-पार्टी मैसेजिंग और सर्च जैसी सभी जगहों पर नग्न सामग्री को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है।
ब्रिटेन का ऑनलाइन सेफ्टी एजेंडा और सख्त होगा
बच्चों की नग्न तस्वीरों को रोकने की योजना ब्रिटेन की व्यापक ऑनलाइन सेफ्टी नीति का हिस्सा है।
जून 2026 में सरकार ने यह भी घोषित किया कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया सेवाएं उपलब्ध कराने पर रोक लगाने की दिशा में कानून लाया जाएगा।
इसके अलावा 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए अजनबियों से संपर्क और अपनी लाइव स्ट्रीम शुरू करने जैसी हाई-रिस्क सुविधाओं पर प्रतिबंध की योजना है।
सरकार की व्यापक नीति में उम्र सत्यापन को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है।
न्यूड तस्वीरें भेजने पर युवाओं की चिंता
ब्रिटेन सरकार की ऑनलाइन सेफ्टी कंसल्टेशन में बच्चों और अभिभावकों ने नग्न तस्वीरों और वीडियो भेजने की सुविधा को लेकर गंभीर चिंता जताई।
सरकार के मुताबिक 90 प्रतिशत अभिभावक इस बात को लेकर चिंतित थे कि उनके बच्चों को नग्न तस्वीरें या वीडियो भेजने की सुविधा उपलब्ध है।
कंसल्टेशन में 79 प्रतिशत प्रतिभागियों ने नग्न मीडिया भेजने जैसी सुविधा पर उम्र संबंधी पाबंदी का समर्थन किया।
बच्चों द्वारा खुद बनाई गई सामग्री क्यों चिंता का विषय है
ऑनलाइन बाल यौन शोषण के मामलों में एक गंभीर बदलाव यह है कि आपत्तिजनक सामग्री हमेशा किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा तैयार नहीं की जाती।
कई मामलों में बच्चे खुद तस्वीर या वीडियो बनाते हैं और बाद में वह सामग्री दबाव, धमकी, ग्रूमिंग या ब्लैकमेल के जरिए दूसरे लोगों तक पहुंचती है।
इसी वजह से ब्रिटेन सरकार डिवाइस स्तर की सुरक्षा को व्यापक डिजिटल सेफ्टी सिस्टम का हिस्सा बनाना चाहती है।
सरकार के अनुसार इंटरनेट वॉच फाउंडेशन ने भी डिवाइस स्तर की सुरक्षा को बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया है।
अन्य ऑनलाइन खतरों पर भी रोक
ब्रिटेन की नई नीति केवल नग्न तस्वीरों तक सीमित नहीं है।
सरकार 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अजनबियों से संपर्क करने और खुद लाइव स्ट्रीम करने जैसी सुविधाओं से दूर रखने की योजना बना रही है।
16 और 17 वर्ष के यूजर्स के लिए कुछ हाई-रिस्क सुविधाएं डिफॉल्ट रूप से बंद रखने का प्रस्ताव है।
इससे सरकार का व्यापक उद्देश्य स्पष्ट होता है। बच्चों के लिए इंटरनेट की पहुंच पूरी तरह बंद करने के बजाय उन फीचर्स पर नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है जिनसे शोषण और नुकसान का जोखिम अधिक माना गया है।
टेक कंपनियों पर बढ़ेगी जवाबदेही
ब्रिटेन सरकार का रुख है कि ऑनलाइन सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी माता-पिता पर नहीं डाली जा सकती।
सरकार के मुताबिक टेक कंपनियों के पास ऐसी तकनीक विकसित करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, इसलिए उन्हें सुरक्षा उपाय डिफॉल्ट रूप से उपलब्ध कराने होंगे।
यही वजह है कि प्रस्तावित व्यवस्था में ऑपरेटिंग सिस्टम कंपनियों के साथ सप्लाई चेन के दूसरे हिस्सों को भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। इसमें रिटेलर्स जैसे कारोबारी भी दायरे में आ सकते हैं।
कानूनी ढांचे में आगे क्या होगा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कंपनियों को पहले सुरक्षा उपाय लागू करने और अपनी प्रगति दिखाने का मौका दिया जा रहा है।
यदि सरकार को लगता है कि कंपनियां पर्याप्त कदम नहीं उठा रही हैं, तो कानून के जरिए तकनीकी सुरक्षा को अनिवार्य बनाया जा सकता है।
इसके बाद अनुपालन, जुर्माने और संभावित प्रवर्तन कार्रवाई का ढांचा महत्वपूर्ण होगा।
बच्चों की सुरक्षा बनाम डिजिटल प्राइवेसी
इस नीति के सामने सबसे बड़ा सवाल तकनीकी क्षमता से ज्यादा निजता का है।
डिवाइस को यह पहचानना होगा कि किसी तस्वीर में नग्नता मौजूद है और उसे किस उम्र के यूजर से संबंधित गतिविधि के रूप में ब्लॉक करना है।
सरकार का दावा है कि यह प्रक्रिया इस तरह होनी चाहिए जिससे बच्चों की निजी तस्वीरें या व्यक्तिगत डेटा बाहर न जाएं। लेकिन इस तकनीक का वास्तविक इस्तेमाल किस तरह होगा, इसकी विस्तृत तकनीकी व्यवस्था आगे की नीति और नियमों से स्पष्ट होगी।
आगे क्या होगा
ब्रिटेन में अब निगाह टेक कंपनियों की प्रतिक्रिया पर है।
यदि कंपनियां सरकार की अपेक्षा के मुताबिक डिवाइस स्तर की सुरक्षा लागू करती हैं, तो बिना नए कानून के भी व्यवस्था आगे बढ़ सकती है। यदि प्रगति अपर्याप्त रहती है, तो सरकार ने कानून लाने की स्पष्ट चेतावनी दी है।
इसके साथ ही ब्रिटेन बच्चों के लिए सोशल मीडिया, लाइव स्ट्रीमिंग और अजनबियों से संपर्क जैसी सुविधाओं पर भी नए प्रतिबंधों की दिशा में बढ़ रहा है।
यह नीति ब्रिटेन में डिजिटल बाल सुरक्षा के लिए एक व्यापक बदलाव की तरफ इशारा करती है। असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन में होगी, खासकर इस सवाल पर कि बच्चों की सुरक्षा मजबूत करते हुए उनकी निजता और वैध डिजिटल इस्तेमाल को किस तरह सुरक्षित रखा जाता है।
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Harish Qureshi
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।