एनएसई के आईपीओ को सेबी की मंजूरी मिल गई है। करीब 30,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित इश्यू की लिस्टिंग सितंबर में होने की संभावना है, जबकि प्राइस बैंड जल्द सामने आ सकता है।
नई दिल्ली, भारत
भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के बहुप्रतीक्षित आईपीओ को लेकर तस्वीर अब पहले से साफ होती दिखाई दे रही है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद एनएसई के पब्लिक इश्यू की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। बाजार में अब प्राइस बैंड, इश्यू की तारीख और शेयर बाजार में लिस्टिंग को लेकर निगाहें टिकी हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक एनएसई सितंबर के दूसरे पखवाड़े में बाजार में उतरने की तैयारी कर रहा है। हालांकि प्राइस बैंड और अंतिम लिस्टिंग तारीख की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। इसलिए सामने आ रही तारीखों को संभावित टाइमलाइन के तौर पर देखा जाना चाहिए।
एनएसई के आईपीओ की राह लंबे समय से नियामकीय और कानूनी अड़चनों के कारण रुकी हुई थी। अब सेबी की मंजूरी के बाद एक्सचेंज के पब्लिक होने की प्रक्रिया निर्णायक चरण में पहुंच गई है।
इससे पहले एनएसई से जुड़े को-लोकेशन और डार्क-फाइबर मामलों में कानूनी विवाद भी आईपीओ प्रक्रिया पर असर डालते रहे थे। चार सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सेबी की संबंधित अपीलों को खारिज किया, जिसके बाद एनएसई के आईपीओ के सामने मौजूद एक अहम कानूनी बाधा दूर हुई।
यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एनएसई का आईपीओ कई वर्षों से निवेशकों और बाजार के बीच चर्चा का विषय रहा है।
एनएसई ने जून में आईपीओ से संबंधित ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया था। प्रस्ताव में करीब 14.89 करोड़ शेयरों की बिक्री का उल्लेख है, जो एक्सचेंज की चुकता पूंजी के लगभग छह प्रतिशत के बराबर है।
यह इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस के रूप में प्रस्तावित है। इसका अर्थ है कि आईपीओ के जरिए बेचे जाने वाले मौजूदा शेयरों की रकम कंपनी के पास जाने के बजाय शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों और हिस्सेदारों को मिलेगी।
इश्यू का अनुमानित आकार करीब 30,000 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। यदि यह आकार बरकरार रहता है तो एनएसई का आईपीओ भारत के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल होगा। इससे पहले हुंडई मोटर इंडिया का करीब 27,870 करोड़ रुपये का आईपीओ देश के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में रहा था।
एनएसई के आईपीओ की सबसे अहम जानकारियों में प्राइस बैंड शामिल है। उपलब्ध रिपोर्टों में अलग-अलग संभावित समयसीमा सामने आई है।
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक 11 सितंबर को प्राइस बैंड की घोषणा होने की संभावना जताई गई है। दूसरी ओर रॉयटर्स की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि प्राइस बैंड करीब 15 सितंबर तक तय होने की संभावना है और बुक-बिल्डिंग प्रक्रिया 11 सितंबर के आसपास शुरू हो सकती है।
इसलिए फिलहाल किसी निश्चित कीमत को अंतिम इश्यू प्राइस मानना उचित नहीं होगा।
बाजार में एनएसई के शेयर की संभावित कीमत करीब 1,800 रुपये के आसपास होने की चर्चा है। रॉयटर्स ने भी सूत्रों के हवाले से करीब 1,800 रुपये प्रति शेयर की संभावित कीमत का उल्लेख किया है। हालांकि वास्तविक प्राइस बैंड आधिकारिक दस्तावेज में सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
एनएसई की संभावित लिस्टिंग को लेकर भी बाजार में गतिविधि बढ़ गई है। आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक एक्सचेंज 26 सितंबर से शुरू होने वाले पितृ पक्ष से पहले शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने का लक्ष्य रख सकता है। इस हिसाब से 25 सितंबर या उससे पहले लिस्टिंग की संभावना बताई गई है।
रॉयटर्स ने भी बताया है कि एनएसई सितंबर के 21 तारीख से शुरू होने वाले सप्ताह में आईपीओ लाने की योजना पर काम कर रहा है। इस आधार पर सितंबर के आखिरी सप्ताह से पहले या उसके आसपास लिस्टिंग की संभावना बनती है।
फिर भी अंतिम तारीख को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार रहेगा।
एनएसई भारतीय पूंजी बाजार के बुनियादी ढांचे का प्रमुख हिस्सा है। यह देश के प्रमुख इक्विटी और डेरिवेटिव्स बाजारों का संचालन करता है और निफ्टी पचास जैसे प्रमुख सूचकांक से जुड़ा है। रॉयटर्स के मुताबिक कॉन्ट्रैक्ट की संख्या के आधार पर एनएसई दुनिया का सबसे सक्रिय डेरिवेटिव्स एक्सचेंज है।
आईपीओ के बाद एनएसई के शेयर सार्वजनिक बाजार में कारोबार के लिए उपलब्ध होंगे। इससे एक्सचेंज की वैल्यूएशन को बाजार की रोजाना की खरीद-बिक्री के आधार पर परखा जाएगा।
फिलहाल अनलिस्टेड बाजार में एनएसई की वैल्यूएशन करीब 55 अरब डॉलर तक बताई जा रही है। प्रस्तावित आईपीओ के संदर्भ में करीब 47 अरब डॉलर की वैल्यूएशन और लगभग 1,800 रुपये प्रति शेयर की कीमत की रिपोर्ट सामने आई है।
एनएसई के सार्वजनिक होने से खुदरा निवेशकों को एक्सचेंज के शेयर में सीधे निवेश का अवसर मिलेगा, बशर्ते वे आईपीओ की पात्रता और आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।
लेकिन आईपीओ की लोकप्रियता को निवेश का पर्याप्त आधार नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी सार्वजनिक निर्गम में निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, वैल्यूएशन, आय की गुणवत्ता, नियामकीय जोखिम और इश्यू दस्तावेज का अध्ययन जरूरी होता है।
एनएसई के मामले में नियामकीय इतिहास भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। को-लोकेशन और डार्क-फाइबर विवाद लंबे समय तक चर्चा में रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले और सेबी से मिली मंजूरी ने आईपीओ की राह आसान की है, लेकिन निवेशकों को अंतिम दस्तावेज में उपलब्ध सभी जोखिम कारकों का अध्ययन करना होगा।
एनएसई का प्रस्तावित आईपीओ पूरी तरह ओएफएस है। ऐसे इश्यू में कंपनी के लिए नई पूंजी नहीं जुटाई जाती। मौजूदा शेयरधारक अपने हिस्से के शेयर बेचते हैं और बिक्री से मिली रकम उन्हीं को प्राप्त होती है।
इसका मतलब यह है कि एनएसई के कारोबार में आईपीओ से सीधे नई पूंजी का प्रवाह नहीं होगा। निवेशकों के लिए यह अंतर समझना जरूरी है, क्योंकि फ्रेश इश्यू और ओएफएस का कंपनी की बैलेंस शीट पर असर अलग होता है।
एनएसई का आईपीओ ऐसे समय आ रहा है जब भारतीय प्राथमिक बाजार में गतिविधियां तेज हैं। बड़े इश्यू की वजह से संस्थागत और खुदरा निवेशकों की पूंजी का एक हिस्सा एनएसई की ओर जा सकता है।
रॉयटर्स ने इसे 2026 के प्रमुख भारतीय आईपीओ में से एक बताया है। इसकी प्रस्तावित वैल्यूएशन इसे देश की बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों की कतार में ला सकती है।
हालांकि इसका वास्तविक असर इश्यू प्राइस, सब्सक्रिप्शन, लिस्टिंग प्राइस और लिस्टिंग के बाद के कारोबार पर निर्भर करेगा।
अब बाजार की निगाहें अपडेटेड आईपीओ दस्तावेज, प्राइस बैंड और सब्सक्रिप्शन शेड्यूल पर रहेंगी। इसके बाद एंकर निवेशकों की भागीदारी, संस्थागत निवेशकों की मांग और खुदरा निवेशकों के रुझान से इश्यू की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
लिस्टिंग के बाद एनएसई का बाजार मूल्यांकन लगातार बदलता रहेगा। इसलिए आईपीओ के दौरान तय कीमत और सूचीबद्ध होने के बाद शेयर की बाजार कीमत को अलग-अलग संदर्भों में देखना जरूरी होगा।
एनएसई का आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बड़ा कॉरपोरेट और वित्तीय घटनाक्रम है। सेबी की मंजूरी और सुप्रीम कोर्ट से जुड़े हालिया कानूनी घटनाक्रम के बाद इसकी राह काफी हद तक साफ हुई है।
फिलहाल 11 से 15 सितंबर के बीच प्राइस बैंड से जुड़ी घोषणा और 25 सितंबर के आसपास संभावित लिस्टिंग की खबरों पर बाजार की नजर है। लेकिन जब तक एनएसई या संबंधित नियामकीय दस्तावेज अंतिम तारीख और कीमत की पुष्टि नहीं करते, इन आंकड़ों को संभावित टाइमलाइन के रूप में ही देखना चाहिए।
निवेशकों के लिए सबसे अहम पड़ाव आधिकारिक प्राइस बैंड, आईपीओ दस्तावेज, वैल्यूएशन और जोखिम कारकों का सामने आना होगा। इसके बाद ही एनएसई के आईपीओ की वास्तविक निवेश तस्वीर का बेहतर आकलन संभव होगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।