बकिंघम पैलेस की बहाली के दौरान फर्श और दीवारों के भीतर से कई पुरानी वस्तुएं मिली हैं। इनमें 1889 का अख़बार, 1949 का एक कार्यक्रम टिकट, 1957 की फुटबॉल पूल पर्चियां, पुराने जूते, सिगरेट पैकेट और शाही समारोहों से जुड़े दस्तावेज़ शामिल हैं।
लंदन | 14 सितंबर 2026
By Mohd Haris
ब्रिटेन के बकिंघम पैलेस में चल रहे बड़े पैमाने के बहाली कार्य के दौरान विशेषज्ञों को कई ऐसी वस्तुएं मिली हैं, जो शाही महल के भीतर काम करने वाले कर्मचारियों की रोजमर्रा की जिंदगी पर रोशनी डालती हैं। फर्श की पट्टियों के नीचे और महल की दीवारों के भीतर से मिले इन सामान में पुराने टिकट, अख़बार, जूते, पर्चियां और कर्मचारियों से जुड़े निर्देश शामिल हैं।
इन खोजों में सबसे पुरानी उल्लेखनीय वस्तुओं में 1889 के अख़बार का एक टुकड़ा शामिल है। हालांकि सभी बरामद वस्तुएं 1800 के दशक की नहीं हैं। कई सामान 20वीं सदी के हैं और वे महल में काम करने वाले लोगों की सामाजिक और पेशेवर जिंदगी की अलग-अलग झलक देते हैं।
बकिंघम पैलेस में क्यों चल रहा है काम
बकिंघम पैलेस में लंबे समय से व्यापक बहाली और आधारभूत ढांचे को आधुनिक बनाने का काम जारी है। इस परियोजना का मकसद महल की पुरानी प्रणालियों को बदलना और भवन की सुरक्षा तथा भविष्य की उपयोगिता सुनिश्चित करना है।
रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा बहाली परियोजना पर लगभग 370 मिलियन पाउंड खर्च होने का अनुमान है। काम के दौरान पुरानी विद्युत व्यवस्था और दूसरी आधारभूत सुविधाओं को हटाया जा रहा है। अब तक पुरानी वल्कनाइज्ड इंडियन रबर केबलिंग का 1.2 मील से अधिक हिस्सा बदला जा चुका है।
इसी निर्माण और संरक्षण प्रक्रिया के दौरान विशेषज्ञों को ऐसी वस्तुएं मिलीं, जो आधिकारिक शाही रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थीं।
1889 का अख़बार बना खास खोज
मिली वस्तुओं में 1889 के अख़बार का टुकड़ा खास तौर पर ध्यान खींचता है। यह सामग्री 19वीं सदी के अंतिम दौर की है और बकिंघम पैलेस के इतिहास के एक अलग दौर से जुड़ती है।
ऐसे छोटे कागजी अवशेष इतिहासकारों के लिए उपयोगी होते हैं क्योंकि वे किसी इमारत में काम करने वाले लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियों और उस समय के सामाजिक माहौल के बारे में संकेत देते हैं।
महल में मिले कर्मचारियों से जुड़े सामान
बहाली के दौरान 1949 के रॉयल हाउसहोल्ड सोशल क्लब के एक व्हिस्ट ड्राइव टिकट का भी पता चला। इसके अलावा 1957 के लिटलवुड्स फुटबॉल पूल की पर्चियां मिलीं।
एक जोड़ी पुराने हॉनबिल बूट्स और सिल्क कट सिगरेट का पैकेट भी बरामद हुआ। इन वस्तुओं से संकेत मिलता है कि महल में काम करने वाले कर्मचारी अपनी निजी और सामाजिक जिंदगी से जुड़ी छोटी-छोटी चीजें कार्यस्थल के अलग-अलग हिस्सों में छोड़ जाते थे।
यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शाही इमारतों का इतिहास अक्सर राजाओं, रानियों और महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाओं के इर्द-गिर्द दर्ज होता है। ऐसी रोजमर्रा की वस्तुएं उस इतिहास में आम कर्मचारियों की भूमिका और जिंदगी को सामने लाती हैं।
1977 के शाही समारोह का दस्तावेज़ भी मिला
खोज के दौरान 1977 में आयोजित एक शाही स्वागत समारोह से जुड़े कर्मचारियों के निर्देश भी मिले। इसके अलावा 1966 के डेली एक्सप्रेस अख़बार के पन्ने मिले, जिनमें ग्रेट ट्रेन रॉबर्स की गिरफ्तारी से संबंधित खबरें थीं।
इन दस्तावेज़ों की अहमियत इस वजह से बढ़ जाती है कि वे महल के अंदर काम करने वाले कर्मचारियों के प्रशासनिक और सामाजिक वातावरण की जानकारी देते हैं।
पुरानी टाइल और दूसरी वस्तुएं भी बरामद
बहाली के दौरान मिंटन की ऐतिहासिक सिरेमिक टाइलें, एक पीटर टैंकर्ड, श्वेप्स की पानी की बोतल, लकड़ी का जंक्शन बॉक्स और क्रिसमस कार्ड का एक बॉक्स भी मिला।
इनमें से कई वस्तुएं अपने आप में दुर्लभ या अत्यधिक मूल्यवान होने के बजाय ऐतिहासिक संदर्भ के लिहाज़ से महत्वपूर्ण हैं। इनसे पता चलता है कि महल के अलग-अलग हिस्सों में किस तरह की वस्तुएं इस्तेमाल होती थीं और कर्मचारी किस तरह की रोजमर्रा की चीजों के बीच काम करते थे।
क्या यह सचमुच 1800 के दशक का खजाना है
इस सवाल का जवाब सावधानी से देना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्ट में 1889 का अख़बार 19वीं सदी की वस्तु के तौर पर सामने आता है। लेकिन बाकी सभी खोजों को 1800 के दशक का बताना सही नहीं है।
मिली वस्तुओं में 1949 का टिकट, 1957 की फुटबॉल पूल पर्चियां, 1966 के अख़बार के पन्ने और 1977 के शाही समारोह से जुड़े निर्देश भी शामिल हैं। इसलिए इसे 19वीं सदी से लेकर 20वीं सदी तक फैली ऐतिहासिक वस्तुओं की खोज कहना अधिक सटीक होगा।
यही फर्क एक सनसनीखेज शीर्षक और तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग के बीच महत्वपूर्ण है।
बकिंघम पैलेस की पुरानी पुरातात्विक खोजें
बकिंघम पैलेस में पुरातात्विक जांच कोई नई प्रक्रिया नहीं है। ऑक्सफोर्ड आर्कियोलॉजी ने 2006 में महल के बगीचों में खुदाई की थी। उस दौरान 17वीं, 18वीं और 19वीं सदी से जुड़े कई पुरातात्विक अवशेष मिले थे।
उस जांच में पुराने मिट्टी के पाइप, मिट्टी के बर्तन, ईंटों और निर्माण सामग्री के साथ बगीचे के पुराने ढांचे के प्रमाण मिले थे। पश्चिमी हिस्से में की गई खुदाई के दौरान एक हीरे जड़ा सोने का झुमका भी मिला था।
इससे स्पष्ट होता है कि महल और उसके आसपास की जमीन में अलग-अलग दौर के इतिहास की कई परतें मौजूद हैं।
महल की इमारत खुद इतिहास की दस्तावेज़ है
बकिंघम पैलेस सिर्फ ब्रिटिश राजशाही का आधिकारिक निवास नहीं है। इसकी इमारत और परिसर ब्रिटिश शाही इतिहास के कई चरणों के गवाह रहे हैं।
ईस्ट विंग को 1840 के दशक में क्वीन विक्टोरिया के लिए बनाया गया था। इसमें उनके बढ़ते परिवार के लिए अतिरिक्त रहने और मेहमाननवाज़ी की जगह तैयार की गई थी। इसी हिस्से में अब तक हजारों रॉयल कलेक्शन वस्तुएं रखी जाती रही हैं।
ऐसी स्थिति में भवन के संरक्षण और आधुनिकीकरण के दौरान पुराने सामान का सामने आना इतिहासकारों के लिए अहम स्रोत बन जाता है।
रोजमर्रा की वस्तुएं क्यों महत्वपूर्ण हैं
इतिहास की किताबों में अक्सर बड़े राजनीतिक फैसले, युद्ध, शाही समारोह और महत्वपूर्ण व्यक्तियों की गतिविधियां दर्ज होती हैं। लेकिन किसी दौर को समझने के लिए रोजमर्रा की वस्तुएं भी उतनी ही अहम होती हैं।
एक टिकट से किसी कर्मचारी की सामाजिक गतिविधि का संकेत मिलता है। पुरानी पर्चियां मनोरंजन की आदतों के बारे में बताती हैं। जूते और सिगरेट पैकेट काम करने वाले लोगों की निजी जिंदगी की छोटी झलक देते हैं।
यही वजह है कि संरक्षण विशेषज्ञ ऐसी वस्तुओं को महज कचरा मानकर हटाने के बजाय उनका दस्तावेजीकरण करते हैं।
शाही इतिहास का एक अलग चेहरा
बकिंघम पैलेस से जुड़ी ऐतिहासिक सामग्री का बड़ा हिस्सा राजपरिवार, कला, फर्नीचर और औपचारिक समारोहों से संबंधित है। रॉयल कलेक्शन में पेंटिंग, फर्नीचर, घड़ियां, सिरेमिक और दूसरी बहुमूल्य वस्तुओं का विशाल संग्रह मौजूद है।
लेकिन बहाली के दौरान मिली ये छोटी वस्तुएं महल का दूसरा चेहरा सामने लाती हैं। यह वह दुनिया है जिसमें हजारों कर्मचारियों ने काम किया, सामाजिक जीवन जिया और रोजमर्रा के काम पूरे किए।
इस लिहाज़ से यह खोज किसी सोने के खजाने से ज्यादा सामाजिक इतिहास का दस्तावेज़ है।
बहाली का काम कब पूरा होगा
बकिंघम पैलेस की मौजूदा बहाली परियोजना वर्ष 2017 में शुरू हुई थी। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक इसके 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है।
काम जारी रहने के दौरान और भी ऐतिहासिक वस्तुएं सामने आने की संभावना बनी हुई है। हालांकि किसी भी नई खोज की ऐतिहासिक अहमियत तय करने के लिए विशेषज्ञों की जांच और दस्तावेजीकरण जरूरी होगा।
आगे क्या होगा
मिली वस्तुओं का महत्व उनकी उम्र से ज्यादा उनके संदर्भ में है। विशेषज्ञों के लिए यह समझना अहम होगा कि ये वस्तुएं महल के किस हिस्से से मिलीं, वहां कैसे पहुंचीं और किस दौर में इस्तेमाल की गईं।
खुदाई और बहाली से सामने आने वाले ऐसे छोटे अवशेष बकिंघम पैलेस के इतिहास को राजपरिवार से आगे ले जाकर वहां काम करने वाले लोगों की जिंदगी से जोड़ते हैं।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी से इतना साफ है कि बकिंघम पैलेस की दीवारों और फर्श के नीचे सिर्फ निर्माण सामग्री नहीं, बल्कि बीते दशकों की रोजमर्रा की जिंदगी के निशान भी सुरक्षित रहे हैं। 1889 का अख़बार इस कहानी की सबसे पुरानी प्रमुख कड़ी है, जबकि दूसरी वस्तुएं 20वीं सदी तक महल के भीतर बदलती जिंदगी का सिलसिला दर्ज करती हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।