कक्षा 8 तक पहुंचेगी तमिलनाडु की नाश्ता योजना
कक्षा 6-8 के छात्रों के लिए नई SOP जारी
नाश्ता योजना का दायरा बढ़ा, अब कक्षा 8 तक लाभ
तमिलनाडु सरकार ने नाश्ता योजना को कक्षा 6 से 8 तक विस्तारित करने की तैयारी में SOP जारी की है। योजना का नाम पेरुंतलैवर कामराजर नाश्ता योजना रखा गया है। सितंबर से चरणबद्ध शुरुआत प्रस्तावित है। विस्तार का मकसद अधिक विद्यार्थियों तक पौष्टिक सुबह का भोजन पहुंचाना और स्कूल में पढ़ाई के दौरान भूख की चुनौती घटाना है।
स्थान: तमिलनाडु
तारीख: 17 अगस्त 2026
बाय: Mohd Naved
तमिलनाडु में स्कूली बच्चों के पोषण और शिक्षा से जुड़ी एक अहम कल्याणकारी योजना अब मध्य कक्षाओं तक पहुंचने जा रही है। राज्य सरकार ने कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों को नाश्ता योजना के दायरे में लाने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी जारी की है। इससे योजना के विस्तार को प्रशासनिक अमल का अगला आधार मिला है।
जून 2026 में राज्य सरकार ने कक्षा 6 से 8 तक योजना के विस्तार की घोषणा की थी। सरकार ने पहले चरण को 17 सितंबर से शुरू करने की तैयारी के निर्देश दिए थे।
तमिलनाडु सरकार ने नाश्ता योजना को कक्षा 6 से 8 तक विस्तारित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। जुलाई में जारी सरकारी आदेश के मुताबिक योजना का नाम बदलकर पेरुंतलैवर कामराजर नाश्ता योजना किया गया और इसे सभी सरकारी तथा सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 6 से 8 तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों तक विस्तारित करने का फैसला किया गया।
इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर योजना को लागू करने के लिए एसओपी जारी की गई है। इसका मकसद योजना के संचालन में एकरूपता लाना और स्कूल, स्थानीय प्रशासन तथा भोजन उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था के बीच जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना है।
यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि एसओपी के सभी तकनीकी प्रावधानों की स्वतंत्र रूप से उपलब्ध आधिकारिक प्रति इस रिपोर्ट के लिए पूरी तरह सत्यापित नहीं हो सकी है। इसलिए भोजन की मात्रा, मेन्यू या स्थानीय स्तर की जिम्मेदारियों से जुड़े ऐसे आंकड़े जिन्हें प्राथमिक दस्तावेज से पुष्ट नहीं किया जा सका है, उन्हें तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जा रहा है।
तमिलनाडु की नाश्ता योजना की शुरुआत 2022 में प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए हुई थी। बाद में इसका विस्तार सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त प्राथमिक स्कूलों तक किया गया। 2025 में शहरी सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों तक विस्तार के बाद राज्य में योजना से लाभान्वित विद्यार्थियों की संख्या करीब 20 लाख तक पहुंची थी।
सरकार का तर्क रहा है कि सुबह का पौष्टिक भोजन विद्यार्थियों को स्कूल में बेहतर तरीके से पढ़ाई पर ध्यान देने में मदद करता है। तमिलनाडु के बजट दस्तावेजों में भी योजना को बच्चों में भूख और पोषण संबंधी चुनौतियों से जोड़ते हुए इसके विस्तार का उल्लेख किया गया है।
अब कक्षा 6 से 8 को शामिल करने का फैसला योजना को प्राथमिक शिक्षा से आगे मध्य विद्यालय स्तर तक ले जाता है।
योजना के विस्तार की घोषणा 15 जून 2026 को हुई थी। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सामाजिक कल्याण और महिला अधिकारिता विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को कक्षा 6 से 8 तक योजना के विस्तार के लिए कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। पहले चरण की शुरुआत 17 सितंबर को प्रस्तावित की गई थी।
इसके बाद 15 जुलाई को सरकारी आदेश के जरिए योजना का नाम पेरुंतलैवर कामराजर नाश्ता योजना किया गया। इसी आदेश में सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 6 से 8 तक इसके विस्तार का फैसला दर्ज है।
अगस्त में प्रशासनिक तैयारियां आगे बढ़ती दिख रही हैं। तमिलनाडु के सरकारी ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर कई नगर निकायों ने पेरुंतलैवर कामराजर नाश्ता योजना के लिए खाद्य सेवा प्रदाताओं के चयन से संबंधित निविदाएं जारी की हैं। इससे संकेत मिलता है कि स्थानीय स्तर पर भोजन की तैयारी और आपूर्ति के लिए व्यवस्थाएं तैयार की जा रही हैं।
राज्य सरकार इस विस्तार को स्कूली विद्यार्थियों के पोषण और शिक्षा से जोड़कर देख रही है। जून में सरकार की ओर से कहा गया था कि विस्तार से बड़ी संख्या में मध्य विद्यालय के विद्यार्थी योजना के दायरे में आएंगे। न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार सामाजिक कल्याण मंत्री के. जगदीश्वरी ने करीब 15 लाख अतिरिक्त विद्यार्थियों के योजना से जुड़ने की बात कही थी।
योजना का नया नाम भी राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ रखता है। के. कामराज को तमिलनाडु में शिक्षा के विस्तार और स्कूल भोजन कार्यक्रमों की विरासत से जोड़ा जाता है। मौजूदा सरकार द्वारा योजना का नाम उनके नाम पर रखना इसी ऐतिहासिक विरासत को रेखांकित करता है।
उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड से यह साफ है कि योजना पहले ही बड़े पैमाने पर संचालित हो रही है। नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन के अनुसार मुख्यमंत्री नाश्ता योजना के तहत 34,982 स्कूलों और 198 कुकिंग सेंटरों को डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था से जोड़ा गया था। शहरी क्षेत्रों में केंद्रीकृत किचन और ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल परिसर में भोजन तैयार करने की व्यवस्था का उल्लेख भी सरकारी रिकॉर्ड में है।
सरकारी दस्तावेजों में योजना के संचालन की निगरानी के लिए मोबाइल एप्लिकेशन और डैशबोर्ड का भी उल्लेख है। इसका अर्थ है कि नई कक्षाओं तक विस्तार केवल भोजन उपलब्ध कराने का मामला नहीं है। इसमें आपूर्ति, निगरानी, स्थानीय प्रशासन और गुणवत्ता नियंत्रण भी अहम होंगे।
हालिया सरकारी निविदाओं से भी पता चलता है कि अलग-अलग नगर निकाय खाद्य सेवा प्रदाताओं के चयन की प्रक्रिया में हैं। कुछ निविदाओं में भोजन की पोषण संबंधी विशिष्टताओं और निर्धारित मेन्यू के अनुरूप आपूर्ति का प्रावधान दर्ज है।
कक्षा 6 से 8 तक विस्तार का सीधा असर उन विद्यार्थियों पर पड़ेगा जो प्राथमिक कक्षाओं के बाद भी सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ रहे हैं। इस स्तर पर पढ़ाई का पाठ्यक्रम अधिक जटिल होता है और स्कूल में नियमित उपस्थिति तथा एकाग्रता शिक्षा के नतीजों से सीधे जुड़ी रहती है।
यदि योजना का क्रियान्वयन निर्धारित मानकों के मुताबिक होता है, तो सुबह के भोजन की उपलब्धता परिवारों पर भोजन से जुड़ा कुछ आर्थिक दबाव घटा सकती है। साथ ही स्कूल आने वाले बच्चों के लिए सुबह भोजन उपलब्ध होने से कक्षा शुरू होने से पहले की पोषण संबंधी चुनौती कम हो सकती है।
लेकिन प्रभाव का आकलन केवल लाभार्थियों की संख्या से नहीं होना चाहिए। भोजन की गुणवत्ता, समय पर आपूर्ति, स्वच्छता, स्थानीय निगरानी और शिकायत निवारण व्यवस्था भी उतने ही महत्वपूर्ण संकेतक होंगे।
तमिलनाडु में स्कूल भोजन योजनाओं की लंबी सामाजिक और राजनीतिक विरासत रही है। कामराज के दौर के मध्याह्न भोजन कार्यक्रम से लेकर बाद की पोषण योजनाओं तक, स्कूल भोजन राज्य की कल्याणकारी नीतियों का अहम हिस्सा रहा है।
नई सरकार द्वारा योजना का नाम कामराज के नाम पर रखना इस विरासत को वर्तमान नीति से जोड़ता है। हालांकि योजना का वास्तविक मूल्यांकन नाम या राजनीतिक विमर्श से नहीं, बल्कि उसके कार्यान्वयन और विद्यार्थियों पर पड़ने वाले वास्तविक असर से होना चाहिए।
कक्षा 6 से 8 तक विस्तार शिक्षा नीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह प्राथमिक शिक्षा के बाद भी पोषण सहायता को जारी रखने का प्रयास है।
इस विस्तार के लिए अतिरिक्त वित्तीय और प्रशासनिक संसाधनों की आवश्यकता होगी। करीब 15 लाख अतिरिक्त विद्यार्थियों को शामिल करने की बात सामने आई है, इसलिए भोजन की खरीद, किचन क्षमता, परिवहन, मानव संसाधन और निगरानी व्यवस्था पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक प्रशासनिक चुनौती होगी।
सरकारी ई-प्रोक्योरमेंट रिकॉर्ड में अलग-अलग नगर निकायों के लिए खाद्य सेवा प्रदाताओं की निविदाएं इस विस्तार की जमीनी तैयारी को दिखाती हैं। कुछ निविदाओं की अनुमानित लागत करोड़ों रुपये में है, हालांकि इन्हें पूरे राज्य के कुल खर्च के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
सामाजिक स्तर पर योजना का सबसे अहम सवाल यह रहेगा कि क्या इसका लाभ जरूरतमंद विद्यार्थियों तक नियमित और समान रूप से पहुंचता है।
यह मुख्य रूप से राज्य स्तरीय शिक्षा और पोषण नीति का मामला है। इसका सीधा अंतरराष्ट्रीय असर सीमित है। हालांकि स्कूल पोषण कार्यक्रमों को लेकर तमिलनाडु का अनुभव भारत में सार्वजनिक शिक्षा और सामाजिक कल्याण की व्यापक बहस के लिए प्रासंगिक है।
तमिलनाडु पहले से ही बड़े पैमाने पर स्कूल भोजन और डिजिटल निगरानी मॉडल विकसित कर चुका है। इसलिए कक्षा 6 से 8 तक विस्तार के नतीजे दूसरे राज्यों के लिए भी नीति संबंधी संदर्भ उपलब्ध करा सकते हैं, बशर्ते उनके परिणाम स्वतंत्र मूल्यांकन से प्रमाणित हों।
सबसे अहम सवाल यह है कि नई एसओपी के तहत हर स्कूल में भोजन की गुणवत्ता और पोषण मानकों की निगरानी किस स्तर पर होगी। दूसरा सवाल आपूर्ति व्यवस्था का है। खासकर उन इलाकों में जहां स्कूल दूर-दराज के क्षेत्रों में हैं, वहां समय पर भोजन पहुंचाना प्रशासनिक चुनौती हो सकता है।
तीसरा सवाल वित्तीय निगरानी से जुड़ा है। लाभार्थियों की संख्या बढ़ने के साथ खर्च भी बढ़ेगा। ऐसे में पारदर्शी खरीद, गुणवत्ता जांच और नियमित ऑडिट योजना की विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
चौथा सवाल परिणामों का है। योजना का मूल्यांकन केवल यह देखकर नहीं होना चाहिए कि कितने बच्चों को भोजन मिला। उपस्थिति, सीखने की क्षमता, पोषण संकेतक और स्कूल छोड़ने की दर जैसे परिणामों का समय-समय पर अध्ययन अधिक ठोस तस्वीर देगा।
राज्य सरकार की घोषित समयरेखा के मुताबिक विस्तार का पहला चरण 17 सितंबर 2026 से शुरू करने की तैयारी है।
अब प्रशासनिक तंत्र के सामने मुख्य चुनौती एसओपी को जमीन पर लागू करना होगी। स्कूलों की सूची, किचन क्षमता, खाद्य आपूर्ति, स्थानीय निकायों की भूमिका, निगरानी तंत्र और शिकायत निवारण व्यवस्था को एक साथ सक्रिय करना होगा।
सरकारी निविदाओं से संकेत मिलता है कि कई नगर निकाय पहले ही भोजन सेवा प्रदाताओं की चयन प्रक्रिया में आगे बढ़ चुके हैं।
तमिलनाडु की नाश्ता योजना का कक्षा 6 से 8 तक विस्तार राज्य की शिक्षा और पोषण नीति में महत्वपूर्ण कदम है। योजना पहले से बड़े पैमाने पर संचालित है और अब इसका दायरा मध्य विद्यालय तक बढ़ाया जा रहा है।
सरकार के सामने अब घोषणा से ज्यादा अहम सवाल अमल का है। एसओपी तभी प्रभावी मानी जाएगी जब भोजन की गुणवत्ता, नियमितता, स्वच्छता, पारदर्शिता और निगरानी जमीन पर भी उसी स्तर पर दिखाई दें।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।