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एफसीएनआर से भारत में 95 अरब डॉलर तक पूंजी आमद का अनुमान

Asif Khan 2026-08-14 14:49:10
एफसीएनआर से भारत में 95 अरब डॉलर तक पूंजी आमद का अनुमान
  1. एफसीएनआर से भारत में बढ़ी डॉलर आमद की उम्मीद
  2. एफसीएनआर स्कीम का असर, भारत को मिल सकते हैं अरबों डॉलर
  3. डॉलर जुटाने में आरबीआई की एफसीएनआर रणनीति कितनी कामयाब?


आरबीआई की एफसीएनआर योजना से भारत में विदेशी मुद्रा आमद तेज हुई है। जुलाई अंत तक कुल आमद 40.8 अरब डॉलर पहुंची। एसबीआई रिसर्च ने सितंबर तक एफसीएनआर समेत कुल 80–85 अरब डॉलर का अनुमान दिया है। हालांकि 95 अरब डॉलर के आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है और अलग-अलग रिपोर्टों के अनुमान अलग हैं।

LOCATION | DATE | BYLINE

नई दिल्ली | 14 अगस्त 2026 | Mohd Naved


एफसीएनआर आमद ने बदला विदेशी पूंजी का परिदृश्य

भारत की विदेशी मुद्रा स्थिति को मजबूत करने के लिए रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया की एफसीएनआर रणनीति को शुरुआती महीनों में अपेक्षा से बेहतर प्रतिक्रिया मिली है। जून 2026 में शुरू हुई विशेष सुविधा के तहत बैंकों ने विदेशों से बड़ी मात्रा में डॉलर जुटाए हैं। इससे भारत के Balance of Payments, रुपये की स्थिरता और बैंकिंग सिस्टम की विदेशी मुद्रा उपलब्धता को सहारा मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

हालांकि 95 अरब डॉलर तक की संभावित आमद का आंकड़ा खबर में प्रमुखता से सामने आया है, उपलब्ध स्वतंत्र रिपोर्टिंग इससे अधिक सावधान तस्वीर पेश करती है। एसबीआई रिसर्च ने सितंबर के अंत तक एफसीएनआर जमा को 65–70 अरब डॉलर और एफसीएनआर, OFCB तथा ECB को मिलाकर कुल आमद 80–85 अरब डॉलर रहने का अनुमान लगाया था।

जुलाई तक कितने डॉलर भारत आए

आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक 17 जुलाई 2026 तक विशेष Swap Facility के तहत कुल 20.718 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा आमद हुई थी। इसमें एफसीएनआर बी जमा का हिस्सा 17.406 अरब डॉलर था, जबकि Overseas Foreign Currency Borrowings से 1.97 अरब डॉलर और External Commercial Borrowings से 1.342 अरब डॉलर आए।

इसके बाद रफ्तार और तेज हुई। जुलाई के अंत तक आरबीआई की विशेष Swap Facility के जरिए कुल विदेशी मुद्रा आमद करीब 40.816 अरब डॉलर बताई गई। इस वृद्धि में एफसीएनआर बी जमा प्रमुख माध्यम रहे।

यह आंकड़ा इसलिए अहम है क्योंकि जून में योजना शुरू होने के समय इसकी सफलता को लेकर बाजार में काफी अनिश्चितता थी। जुलाई के मध्य में Barclays ने कहा था कि एफसीएनआर आमद शुरुआती उम्मीदों से धीमी रही थी। लेकिन बाद के आंकड़ों ने तस्वीर को तेजी से बदला।

आरबीआई ने एफसीएनआर योजना क्यों शुरू की

भारत के बाहरी क्षेत्र पर 2026 में कई तरफ से दबाव आया। पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, रुपये पर दबाव और विदेशी पूंजी के कमजोर प्रवाह ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन को चुनौती दी।

इसी माहौल में आरबीआई ने 5 जून 2026 को विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए कई उपायों की घोषणा की। इनमें नए तीन से पांच साल के एफसीएनआर बी जमा पर बैंकों की Hedging Cost को आरबीआई द्वारा वहन करने की सुविधा भी शामिल थी। विशेष Swap Facility 8 जून से चालू हुई।

इस व्यवस्था का मकसद बैंकों के लिए विदेशों से डॉलर जुटाना सस्ता बनाना था। बैंक इस लाभ का कुछ हिस्सा ग्राहकों को बेहतर ब्याज दर के रूप में दे सकते थे। इससे एनआरआई जमाकर्ताओं के लिए भारत में विदेशी मुद्रा जमा रखना ज्यादा आकर्षक हुआ।

एनआरआई जमा ने क्यों पकड़ी रफ्तार

एफसीएनआर बी खाते विदेशी मुद्रा में रखे जाने वाले Term Deposit हैं। इनका प्रमुख आकर्षण यह है कि जमाकर्ता को रुपये के उतार-चढ़ाव से सीधा Currency Risk नहीं उठाना पड़ता।

आरबीआई द्वारा Hedging Cost उठाए जाने से बैंकों को प्रतिस्पर्धी दरें देने की गुंजाइश मिली। जून और जुलाई में कई भारतीय बैंकों ने तीन से पांच साल की एफसीएनआर बी जमा पर घरेलू दरों के मुकाबले आकर्षक रिटर्न पेश किए।

बैंकों की ओर से विदेशों में रहने वाले भारतीयों तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश भी तेज हुई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को एनआरआई Outreach मजबूत करने और नए Deposit Products विकसित करने को कहा था। बैंकों ने सिंगापुर, हांगकांग, खाड़ी देशों, ब्रिटेन और अमेरिका में बेहतर प्रतिक्रिया मिलने की बात कही।

एसबीआई रिसर्च का अनुमान क्या कहता है

एसबीआई रिसर्च ने जुलाई के अंत में कहा था कि एफसीएनआर बी जमा सितंबर के अंत तक 65–70 अरब डॉलर तक पहुंच सकते हैं। एफसीएनआर के साथ OFCB और ECB को जोड़ने पर कुल विदेशी मुद्रा आमद 80–85 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक 17 जुलाई तक 17.4 अरब डॉलर की एफसीएनआर आमद हो चुकी थी। एसबीआई रिसर्च ने यह भी संकेत दिया कि अगस्त और सितंबर में परिपक्व होने वाली पुरानी एफसीएनआर जमाओं का एक बड़ा हिस्सा नई योजना के तहत Renew हो सकता है। इससे कुल रकम और बढ़ सकती है।

यही वजह है कि बाजार में शुरुआती अनुमान लगातार ऊपर जाते रहे हैं। हालांकि हर अनुमान को एक जैसा नहीं माना जा सकता। जुलाई में Barclays का अनुमान इससे काफी कम था, जबकि दूसरे संस्थानों ने 70 अरब डॉलर या उससे अधिक की संभावना जताई।

95 अरब डॉलर के आंकड़े पर क्या तस्वीर है

यहां एक महत्वपूर्ण संपादकीय सावधानी जरूरी है। उपलब्ध स्वतंत्र स्रोतों में एफसीएनआर और संबंधित Swap Facilities के लिए 80–85 अरब डॉलर का एसबीआई अनुमान स्पष्ट रूप से दर्ज है। Motilal Oswal Financial Services ने अलग गणना में आरबीआई और सरकार के उपायों से 75–80 अरब डॉलर की Incremental Foreign Capital Inflows तथा वैश्विक Bond Indices में अतिरिक्त भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों के शामिल होने से 15–20 अरब डॉलर Passive Inflows का अनुमान लगाया था।

इसलिए 95 अरब डॉलर को एक निश्चित या सर्वसम्मत एफसीएनआर अनुमान के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। उपलब्ध डेटा इसे एक Upper-End Scenario के रूप में देखने की इजाजत देता है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि एसबीआई या आरबीआई के उपलब्ध आंकड़ों से नहीं होती।

विदेशी मुद्रा आमद से रुपये को कितना सहारा मिलेगा

एफसीएनआर से आने वाली विदेशी मुद्रा भारत के बाहरी क्षेत्र के लिए अहम सुरक्षा देती है। इससे बैंकों को डॉलर फंडिंग मिलती है और आरबीआई को विदेशी मुद्रा बाजार में अधिक लचीलापन मिलता है।

Reuters की जुलाई रिपोर्ट के मुताबिक 17 जुलाई तक 20.72 अरब डॉलर की आमद ने भारत के Balance of Payments पर दबाव कम करने में मदद की। अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया था कि अगर यह रफ्तार बनी रहती है तो पूरे कार्यक्रम से 80 अरब डॉलर तक की आमद संभव हो सकती है।

लेकिन पूरी रकम सीधे विदेशी मुद्रा भंडार में जुड़ जाए, ऐसा मानना सही नहीं होगा। Reuters के एक अन्य विश्लेषण में अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया कि आरबीआई ने इन डॉलर प्रवाह का कुछ हिस्सा अपनी Forward Position को व्यवस्थित करने में इस्तेमाल किया होगा। इसलिए विदेशी मुद्रा आमद और रिजर्व वृद्धि को एक ही चीज नहीं माना जाना चाहिए।

भारत के बाहरी खाते के लिए बड़ा सहारा

भारत के बाहरी क्षेत्र में Services Exports और Remittances पहले से महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच हैं। Motilal Oswal के अनुमान के मुताबिक FY27 में भारत का Services Trade Surplus करीब 238 अरब डॉलर और Net Transfer Inflows लगभग 158 अरब डॉलर रह सकते हैं।

इसी रिपोर्ट ने FY27 में Current Account Deficit करीब 60 अरब डॉलर रहने का अनुमान लगाया। इसके मुकाबले मजबूत Capital Inflows भारत के Overall Balance of Payments को Surplus में ले जाने में मदद कर सकते हैं। रिपोर्ट ने FY27 में करीब 45 अरब डॉलर के BoP Surplus का अनुमान लगाया।

यह परिदृश्य दिखाता है कि एफसीएनआर योजना को केवल रुपये को बचाने वाली अल्पकालिक नीति के तौर पर देखना अधूरा होगा। इसका असर बैंकिंग Liquidity, External Financing और विदेशी मुद्रा बाजार तक फैल सकता है।

लेकिन जोखिम भी मौजूद हैं

एफसीएनआर जमा एक स्थायी FDI प्रवाह नहीं हैं। ये बैंकिंग सिस्टम में विदेशी मुद्रा की अवधि आधारित देनदारियां हैं। Deposit Maturity पर इन्हें वापस भी करना होगा या Renew करना होगा।

यही वजह है कि इन प्रवाहों को दीर्घकालीन External Sector Strength का अकेला पैमाना नहीं माना जा सकता। भारत को स्थायी मजबूती के लिए निर्यात, Services Revenue, FDI Retention और घरेलू उत्पादन क्षमता में लगातार सुधार की जरूरत रहेगी।

भारत के FY26 के Gross FDI inflows करीब 95 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे थे। लेकिन Net FDI इससे काफी कम रहा, क्योंकि विदेशी निवेशकों की Repatriation और भारतीय कंपनियों के Overseas Investments भी बढ़े।

यह अंतर महत्वपूर्ण है। बड़ी Gross Inflow संख्या अपने आप में यह साबित नहीं करती कि उतनी ही पूंजी भारतीय अर्थव्यवस्था में स्थायी रूप से बनी रहेगी।

बैंकिंग सिस्टम पर क्या असर पड़ेगा

एफसीएनआर जमा बैंकों के लिए विदेशी मुद्रा फंडिंग का अतिरिक्त स्रोत बन रहे हैं। इससे उन बैंकों को फायदा हो सकता है जिनका एनआरआई ग्राहक आधार मजबूत है।

अगस्त में भारतीय बैंकिंग क्षेत्र से भी मजबूत संकेत मिले। Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक 12 अगस्त तक Indian Bank और Central Bank of India ने मिलकर करीब 1.5 अरब डॉलर की एफसीएनआर जमा जुटाई थी। इससे संकेत मिलता है कि जुलाई के बाद भी Mobilisation जारी रहा।

लेकिन अधिक जमा जुटाना मुफ्त नहीं है। बैंक ग्राहकों को आकर्षक ब्याज देते हैं और विदेशी मुद्रा जोखिम की Hedging भी जरूरी रहती है। इसलिए एफसीएनआर वृद्धि के साथ Bank Margins और Funding Cost पर भी नजर रखनी होगी।

क्या एफसीएनआर योजना 2013 जैसी सफलता दोहरा सकती है

भारत ने 2013 के Currency Pressure के दौरान भी एफसीएनआर बी का इस्तेमाल विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए किया था। इस बार नीति ढांचा अलग है और वैश्विक Financial Conditions भी अलग हैं।

एसबीआई रिसर्च का आकलन है कि नई योजना के शुरुआती 45 दिनों में एफसीएनआर जुटाव 2013 के तीन महीने के स्तर से आगे निकल चुका था। रिपोर्ट ने इसे मौजूदा योजना की मजबूत शुरुआती प्रतिक्रिया के संकेत के रूप में देखा।

फिर भी 2013 और 2026 की सीधी तुलना सावधानी से करनी होगी। अमेरिका की ब्याज दरें, वैश्विक Dollar Liquidity, भू-राजनीतिक जोखिम और भारत की मौजूदा विदेशी मुद्रा स्थिति अलग है।

आगे क्या होगा

एफसीएनआर योजना का निर्णायक दौर अगस्त और सितंबर में रहेगा। इस दौरान नई जमाओं के साथ पुरानी जमाओं के Renewal और बैंकों की Overseas Outreach से वास्तविक प्रवाह की दिशा साफ होगी।

अगर मौजूदा रफ्तार कायम रहती है तो भारत का Capital Account FY27 में मजबूत रह सकता है। लेकिन अगर डॉलर की वैश्विक मांग बढ़ती है, तेल की कीमतों में तेज उछाल आता है या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है तो रुपये पर दोबारा दबाव बन सकता है।

इसलिए 95 अरब डॉलर जैसे ऊपरी अनुमान को तत्काल उपलब्ध पूंजी नहीं माना जाना चाहिए। मौजूदा प्रमाण 80–85 अरब डॉलर के कुल FCNR, OFCB और ECB प्रवाह की संभावना को अधिक स्पष्ट रूप से समर्थन देते हैं।

पांच सवालों के सीधे जवाब

एफसीएनआर बी क्या है

एफसीएनआर बी एनआरआई के लिए विदेशी मुद्रा में Term Deposit सुविधा है। इसमें जमा डॉलर, पाउंड, यूरो, येन जैसी विदेशी मुद्राओं में रखी जा सकती है।

आरबीआई ने नई सुविधा क्यों दी

आरबीआई ने विदेशी मुद्रा आमद बढ़ाने, Balance of Payments को मजबूत करने और रुपये पर दबाव कम करने के लिए विशेष Swap और Hedging व्यवस्था शुरू की।

अब तक कितनी विदेशी मुद्रा आई

17 जुलाई तक कुल Swap-linked inflows 20.718 अरब डॉलर थे। जुलाई के अंत तक यह आंकड़ा करीब 40.816 अरब डॉलर पहुंच गया।

80–85 अरब डॉलर का अनुमान किसका है

एसबीआई रिसर्च ने सितंबर के अंत तक एफसीएनआर बी जमा 65–70 अरब डॉलर और संबंधित OFCB तथा ECB समेत कुल 80–85 अरब डॉलर की आमद का अनुमान दिया है।

क्या 95 अरब डॉलर पक्का आंकड़ा है

नहीं। उपलब्ध स्वतंत्र स्रोतों में 95 अरब डॉलर का आंकड़ा सर्वसम्मत अनुमान के रूप में स्थापित नहीं है। इसे Upper-End Estimate के तौर पर देखना अधिक उचित है।

निष्कर्ष

भारत के लिए एफसीएनआर योजना ने फिलहाल एक महत्वपूर्ण विदेशी मुद्रा चैनल खोल दिया है। जुलाई के अंत तक 40.8 अरब डॉलर की Swap-linked आमद और एफसीएनआर में तेज बढ़ोतरी ने शुरुआती आशंकाओं को काफी हद तक पीछे छोड़ा है।

लेकिन असली परीक्षा सितंबर तक होगी। भारत को केवल डॉलर जुटाने से नहीं, बल्कि इन प्रवाहों को स्थायी बाहरी मजबूती में बदलने से फायदा होगा।

95 अरब डॉलर का अनुमान आकर्षक है, लेकिन उपलब्ध स्वतंत्र आंकड़े अभी 80–85 अरब डॉलर के दायरे को ज्यादा ठोस आधार देते हैं। एफसीएनआर आमद रुपये और Balance of Payments को राहत दे सकती है, लेकिन दीर्घकालीन स्थिरता के लिए FDI, निर्यात, सेवाओं और मजबूत Net Capital Flows पर निर्भरता बनी रहेगी।

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Asif Khan

Asif Khan

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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