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आय के आधार पर आरक्षण की मांग पर केंद्र का सुप्रीम कोर्ट में विरोध, संविधान का दिया हवाला

Apurva Choudhary • 2026-08-07 11:47:30
आय के आधार पर आरक्षण की मांग पर केंद्र का सुप्रीम कोर्ट में विरोध, संविधान का दिया हवाला

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण का आधार केवल आय नहीं हो सकता। सरकार ने कहा कि संविधान के तहत इन वर्गों को आरक्षण सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन को दूर करने तथा समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए दिया गया है। अब इस संवैधानिक मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आगे की सुनवाई करेगा।


📍 Location: नई दिल्ली

📰 Date: 7 अगस्त 2026

✍️ By: Apurva Choudhary


सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने रखा अपना पक्ष

आय के आधार पर आरक्षण तय करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना स्पष्ट पक्ष रखा है। सरकार ने कहा कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण केवल आर्थिक स्थिति के आधार पर निर्धारित नहीं किया जा सकता। यह व्यवस्था संविधान के तहत सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन को दूर करने तथा समान अवसर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाई गई है।


क्या है पूरा मामला?

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में मांग की गई है कि SC, ST और OBC वर्गों के भीतर भी आय के आधार पर आरक्षण की पात्रता तय की जाए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को आरक्षण का लाभ सीमित किया जाना चाहिए ताकि इसका लाभ वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सके।


केंद्र सरकार ने क्या कहा?

केंद्र सरकार ने अपने जवाब में कहा कि आरक्षण का उद्देश्य आर्थिक सहायता देना नहीं है। सरकार के अनुसार यह व्यवस्था उन समुदायों को सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व देने के लिए बनाई गई है, जो ऐतिहासिक रूप से सामाजिक और शैक्षणिक रूप से वंचित रहे हैं। इसलिए केवल आय को आधार बनाकर आरक्षण की पात्रता तय करना संविधान की मूल भावना के अनुरूप नहीं होगा।


संविधान का हवाला

सरकार ने अदालत को बताया कि संविधान में SC, ST और OBC वर्गों के लिए विशेष प्रावधान सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। इनका उद्देश्य समान अवसर, प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है। इसलिए आर्थिक आधार को अकेला मानदंड बनाना संवैधानिक व्यवस्था से मेल नहीं खाता।


याचिकाकर्ता की दलील

याचिका में कहा गया है कि आरक्षण का लाभ उन्हीं लोगों तक सीमित होना चाहिए जिन्हें वास्तव में इसकी आवश्यकता है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को आरक्षण का लाभ जारी रहने से जरूरतमंद लोगों तक इसका पूरा लाभ नहीं पहुंच पाता।


आगे क्या होगा?

केंद्र सरकार का जवाब दाखिल होने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सभी पक्षों की दलीलों पर विस्तार से सुनवाई करेगा। अदालत के अंतिम फैसले से आरक्षण व्यवस्था और उससे जुड़े संवैधानिक सिद्धांतों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।


यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

यह विवाद केवल आरक्षण की पात्रता तक सीमित नहीं है, बल्कि संविधान में सामाजिक न्याय की अवधारणा और आरक्षण के मूल उद्देश्य की व्याख्या से भी जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भविष्य में आरक्षण से जुड़े कई मामलों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल बन सकता है।


केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया है कि SC, ST और OBC आरक्षण का आधार केवल आर्थिक स्थिति नहीं हो सकती। सरकार का कहना है कि आरक्षण सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन को दूर करने का संवैधानिक माध्यम है। अब इस महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई और अंतिम फैसला देश की आरक्षण व्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

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Apurva Choudhary

Apurva Choudhary

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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