बांग्लादेश में मां के अंतिम संस्कार पर रो पड़े चिन्मय कृष्ण दास, 5 घंटे की पैरोल के बाद फिर जेल लौटे
Harish Qureshi
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2026-09-11 11:54:14
बांग्लादेश में जेल में बंद चिन्मय कृष्ण दास को मां के अंतिम संस्कार के लिए 5 घंटे की पैरोल मिली। अंतिम संस्कार में शामिल होने के बाद उन्हें दोबारा जेल लौटना था।
चटगांव, बांग्लादेश | 11 सितंबर 2026 By Mohd Haris
मां के अंतिम संस्कार में पहुंचे चिन्मय कृष्ण दास
बांग्लादेश में जेल में बंद हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास अपनी मां संध्या रानी धर के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। इसके लिए चटगांव जिला प्रशासन ने उन्हें 5 घंटे की पैरोल दी थी। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, अंतिम संस्कार के दौरान चिन्मय दास भावुक नजर आए।
संध्या रानी धर का 10 सितंबर की सुबह निधन हुआ था। वह लंबे समय से बीमार थीं और इलाज करा रही थीं। परिवार के मुताबिक, बीमारी के दौरान उनकी हालत गंभीर होने पर चिन्मय दास को उनसे मिलाने के लिए पैरोल का अनुरोध किया गया था, लेकिन वह अनुमति नहीं मिल सकी।
मौत के बाद परिवार ने दोबारा किया आवेदन
मां के निधन के बाद परिवार ने चिन्मय दास को अंतिम संस्कार में शामिल कराने के लिए जिला प्रशासन के सामने पैरोल का आवेदन दिया। चटगांव के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट ने परिवार के आवेदन के बाद 5 घंटे की पैरोल मंजूर किए जाने की पुष्टि की।
रिपोर्टों के मुताबिक, चिन्मय दास को चटगांव केंद्रीय जेल से बाहर लाया गया और उन्हें हथाजारी स्थित पुंडरीक धाम में अंतिम संस्कार में शामिल होना था। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद उन्हें वापस जेल लौटना था।
मां संध्या रानी धर लंबे समय से थीं बीमार
चिन्मय दास की मां संध्या रानी धर लंबे समय से बीमारी से जूझ रही थीं। बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनका इलाज चटगांव के एक अस्पताल में चल रहा था और बाद में उनकी इच्छा के मुताबिक उन्हें पुंडरीक धाम ले जाया गया।
रिपोर्टों में उनकी उम्र को लेकर थोड़ा अंतर है। कुछ बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों में उनकी उम्र 70 वर्ष बताई गई है, जबकि एक रिपोर्ट में 72 वर्ष का उल्लेख है। उपलब्ध रिपोर्टों में बीमारी के कारण उनके निधन की जानकारी एक जैसी है।
चिन्मय दास नवंबर 2024 से जेल में
चिन्मय कृष्ण दास नवंबर 2024 से जेल में हैं। उन्हें 25 नवंबर 2024 को ढाका से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी का संबंध राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान से जुड़े राजद्रोह के मामले से था।
उनकी गिरफ्तारी के बाद चटगांव अदालत परिसर में तनाव और हिंसा की घटना हुई थी। इसी दौरान वकील सैफुल इस्लाम अलीफ की हत्या हुई। इस मामले में बाद में चिन्मय दास को भी आरोपी बनाया गया। वह आरोपों से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं।
कई मामलों में कानूनी प्रक्रिया जारी
चिन्मय दास को कुछ मामलों में अदालतों से जमानत मिल चुकी है, लेकिन अन्य मामलों के चलते उनकी जेल से रिहाई नहीं हो सकी है। हाल में बांग्लादेश हाई कोर्ट ने दो और मामलों में उन्हें जमानत दी थी, लेकिन अन्य लंबित मामलों के कारण वह जेल से बाहर नहीं आ सके।
उनके खिलाफ मामलों में राजद्रोह, तोड़फोड़ और हत्या से जुड़े आरोप शामिल हैं। इन आरोपों का अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा। आरोपों को दोषसिद्धि के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों का मुद्दा
चिन्मय कृष्ण दास बांग्लादेश में हिंदू समुदाय से जुड़े मुद्दों को उठाने वाले प्रमुख चेहरों में रहे हैं। वह सम्मिलित सनातनी जागरण जोत के प्रवक्ता के तौर पर भी सक्रिय रहे हैं। 2024 में बांग्लादेश में राजनीतिक बदलाव के बाद उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर सार्वजनिक गतिविधियों में हिस्सा लिया था।
उनकी गिरफ्तारी ने बांग्लादेश के भीतर और बाहर व्यापक प्रतिक्रिया पैदा की थी। भारत में भी उनके मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा हुई है। हालांकि मौजूदा मामले में मुख्य घटनाक्रम उनकी मां के निधन और अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए दी गई अस्थायी पैरोल से जुड़ा है।
पैरोल का मानवीय पहलू
पैरोल की अनुमति ने चिन्मय दास को अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने का अवसर दिया। लेकिन अनुमति की अवधि केवल 5 घंटे रखी गई और इसके बाद उन्हें जेल लौटना था।
इस घटनाक्रम का मानवीय पहलू इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि परिवार ने पहले बीमारी के दौरान उनसे मुलाकात की अनुमति मांगी थी। मां के निधन के बाद अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए प्रशासन के सामने दोबारा आवेदन किया गया।
आगे क्या होगा
पैरोल समाप्त होने के बाद चिन्मय कृष्ण दास की जेल और उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी। जमानत से जुड़े हालिया आदेशों के बावजूद दूसरे मामलों के कारण उनकी तत्काल रिहाई संभव नहीं हुई है।
उनके मामलों में आगे की सुनवाई बांग्लादेश की अदालतों में होगी। आरोपों की वैधानिक स्थिति और अंतिम जिम्मेदारी का निर्धारण अदालत के फैसलों के आधार पर होगा।
निष्कर्ष
चिन्मय कृष्ण दास को मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए मिली 5 घंटे की पैरोल उनके लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद के बीच एक मानवीय घटनाक्रम रहा। मां की बीमारी के दौरान उनसे मुलाकात नहीं हो सकी और निधन के बाद परिवार के अनुरोध पर उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति मिली।
उनकी कानूनी स्थिति अभी समाप्त नहीं हुई है। आगे का फैसला अदालतों में लंबित मामलों और न्यायिक प्रक्रिया से तय होगा।
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Harish Qureshi
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।