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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, सीजेपी ने जेपी नड्डा को सौंपा ज्ञापन
Asif Khan
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2026-07-20 19:53:23
सोनम वांगचुक की रिहाई समेत तीन मांगों पर अड़ी सीजेपी, जेपी नड्डा से हुई मुलाकात
जंतर-मंतर से सरकार तक पहुंची सीजेपी की आवाज, धर्मेंद्र प्रधान पर बढ़ा सियासी दबाव?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी सीजेपी प्रदर्शन के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और संगठन के प्रतिनिधियों की मुलाकात हुई। संगठन ने तीन प्रमुख मांगों वाला ज्ञापन सौंपा। सरकार की ओर से मांगों पर तत्काल निर्णय की घोषणा नहीं हुई, लेकिन बातचीत जारी रहने का संकेत दिया गया।
📍 स्थान: नई दिल्ली
📰 दिनांक: 20 जुलाई 2026
✍️ By Asif Khan
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के बीच सीजेपी प्रतिनिधिमंडल की जेपी नड्डा से मुलाकात, तीन मांगों का ज्ञापन सौंपा
दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी सीजेपी प्रदर्शन सोमवार को उस समय नए मोड़ पर पहुंच गया, जब संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर तीन प्रमुख मांगों वाला ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारी संगठन का कहना है कि उसकी प्रमुख मांगों में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अस्पताल से रिहा करना, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाना तथा नीट-यूजी 2026 पेपर लीक प्रकरण के बाद कथित रूप से जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देना शामिल है।
सरकार की ओर से इन मांगों पर किसी तत्काल निर्णय की घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सार्वजनिक रूप से मुलाकात की पुष्टि करते हुए प्रदर्शनकारियों से धरना समाप्त करने और सामान्य स्थिति बहाल करने में सहयोग की अपील की है।
जंतर-मंतर से सरकार तक पहुंचा संवाद
पिछले कुछ समय से सीजेपी जंतर-मंतर पर लगातार प्रदर्शन कर रही है। संगठन का आरोप है कि नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय नहीं की गई और छात्रों की चिंताओं का समुचित समाधान नहीं हुआ। इसी मुद्दे को लेकर संगठन ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई है।
सोमवार को संगठन के प्रतिनिधि सौरव दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने इस मुलाकात की पुष्टि की है, हालांकि बातचीत की परिस्थितियों को लेकर दोनों के बयान अलग-अलग हैं।
सीजेपी ने क्या कहा
संगठन के प्रवक्ताओं के अनुसार, उन्हें सरकार की ओर से बातचीत के लिए बुलाया गया था। उनका कहना है कि बैठक के दौरान तीन प्रमुख मांगों वाला ज्ञापन सौंपा गया और मंत्री ने संबंधित स्तर पर इन विषयों पर चर्चा कराने का आश्वासन दिया। संगठन का यह भी कहना है कि जब तक मांगों पर ठोस प्रगति नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
सीजेपी ने यह भी मांग की है कि सोनम वांगचुक के विरुद्ध आंदोलन से संबंधित कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए और उन्हें अस्पताल से रिहा किया जाए। यह संगठन की मांग है, जिस पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक निर्णय घोषित नहीं किया गया है।
जेपी नड्डा का पक्ष
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी दी कि प्रदर्शनकारियों की ओर से बातचीत का प्रस्ताव आया था और उसके बाद प्रतिनिधिमंडल के साथ विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि उन्हें लिखित ज्ञापन भी सौंपा गया।
नड्डा ने अपने संदेश में प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण ढंग से धरना समाप्त करने तथा प्रशासन के साथ सहयोग करने का अनुरोध किया। उन्होंने मांगों पर किसी निश्चित निर्णय या समय-सीमा की घोषणा नहीं की।
प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ
सोमवार को संसद की ओर मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी। प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने बैरिकेड लगाए और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
इस दौरान सीजेपी ने कुछ प्रदर्शनकारियों के साथ कथित बदसलूकी और हिरासत में लिए जाने के आरोप लगाए। दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने कुछ आरोपों का खंडन किया और कहा कि जिन दावों की चर्चा की जा रही है, वे तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ मामलों में बाद में स्वयं संगठन ने भी अपने पहले किए गए दावों में संशोधन किया।
तीन मांगों के राजनीतिक मायने
सीजेपी की तीनों मांगें अलग-अलग सार्वजनिक मुद्दों से जुड़ी हैं। पहली मांग सोनम वांगचुक से संबंधित है, जो आंदोलन और नागरिक अधिकारों के प्रश्न से जुड़ती है। दूसरी मांग शिक्षा व्यवस्था और नीट-यूजी 2026 विवाद के संदर्भ में राजनीतिक जवाबदेही की मांग करती है। तीसरी मांग उन परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की मांग है, जिनके बारे में संगठन का दावा है कि वे परीक्षा विवाद से प्रभावित हुए।
इन मांगों पर सरकार की आधिकारिक स्वीकृति या निर्णय अभी सामने नहीं आया है। इसलिए इन्हें संगठन की मांगों के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि सरकार द्वारा स्वीकार किए गए प्रस्ताव के रूप में।
व्यापक परिप्रेक्ष्य
नीट-यूजी 2026 परीक्षा को लेकर उठे विवाद ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रक्रिया और पारदर्शिता पर व्यापक बहस को जन्म दिया है। विभिन्न राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों ने अलग-अलग स्तर पर सुधारों की मांग उठाई है। इसी पृष्ठभूमि में सीजेपी का आंदोलन भी राष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बना है।
हालांकि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन और सरकार के बीच संवाद महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष सरकारी निर्णय, जांच एजेंसियों की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही सामने आते हैं।
आगे क्या
फिलहाल यह स्पष्ट है कि सरकार और प्रदर्शनकारी संगठन के बीच संवाद का एक दौर शुरू हुआ है। लेकिन मांगों पर किसी ठोस सरकारी घोषणा का इंतजार है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या बातचीत आगे बढ़ती है, क्या सरकार किसी औपचारिक निर्णय की घोषणा करती है और क्या प्रदर्शन जारी रहता है।
इस पूरे घटनाक्रम में अब तक पुष्टि केवल इतनी है कि प्रतिनिधिमंडल और केंद्रीय मंत्री के बीच मुलाकात हुई, ज्ञापन सौंपा गया और दोनों पक्षों ने सार्वजनिक रूप से बातचीत की पुष्टि की। बाकी मांगों पर अंतिम फैसला सरकार के आगामी कदमों पर निर्भर करेगा।
Asif Khan
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।