बुधवार, 02 September 2026
GOLD ₹0 ▼ 0%
SENSEX 0 ▼ 0%
BITCOIN $0 ▼ 0%
38°C मुजफ्फरनगर
EDITION:
BREAKING
#ShahTimes #Muzaffarnagar #Bijnor #Moradabad #BreakingNews #Politics #Education #Crime #Sports #Business
Book Your Ads With Shah Times
India

₹4 लाख का क्लाउड किचन हुआ फेल, फिर 10 महीने में ₹2 करोड़ का रेवेन्यू, ऐसे बदली पूरी रणनीति

Harish Qureshi 2026-09-02 15:17:30
₹4 लाख का क्लाउड किचन हुआ फेल, फिर 10 महीने में ₹2 करोड़ का रेवेन्यू, ऐसे बदली पूरी रणनीति

बेंगलुरु के कुशल रेड्डी और चाहक जैन का ₹4 लाख का क्लाउड किचन फेल हो गया। इसके बाद दोनों ने फूड ट्रक शुरू किया और रिपोर्ट के मुताबिक 10 महीनों में ₹2 करोड़ रेवेन्यू तक पहुंचे।


बेंगलुरु, कर्नाटक | 2 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris


₹4 लाख लगाए, लेकिन पहला बिजनेस नहीं चला


बिजनेस में पहली कोशिश फेल होना अक्सर कहानी का अंत माना जाता है। लेकिन बेंगलुरु के कुशल रेड्डी और चाहक जैन ने इसे शुरुआत में हुई गलती की तरह लिया और अपना मॉडल ही बदल दिया।


दोनों ने करीब ₹4 लाख लगाकर बेंगलुरु में क्लाउड किचन शुरू किया था। उम्मीद थी कि ऑनलाइन फूड डिलीवरी के जरिए ग्राहकों तक आसानी से पहुंच बनाई जाएगी। लेकिन ऑर्डर पर्याप्त नहीं आए।


डिलीवरी प्लेटफॉर्म की कमीशन फीस, विज्ञापन का खर्च और सीधे ग्राहकों से कम ऑर्डर मिलने की वजह से कारोबार पर दबाव बढ़ता गया। आखिरकार करीब पांच महीने बाद उन्हें क्लाउड किचन बंद करना पड़ा।


असली बदलाव किचन नहीं, बिजनेस मॉडल में आया


पहले कारोबार के बंद होने के बाद कुशल और चाहक ने फूड बिजनेस छोड़ने का फैसला नहीं किया। उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि पहली कोशिश में गलती कहां हुई।


दूसरी बार उन्होंने क्लाउड किचन के बजाय फूड ट्रक मॉडल चुना। दोनों ने बेंगलुरु के जेपी नगर में क्राइड नाम से फ्राइड-फूड और बर्गर ब्रांड शुरू किया।


इस बार उनका फोकस केवल खाना बेचने पर नहीं था। उन्होंने ग्राहक तैयार करने की रणनीति कारोबार शुरू होने से पहले ही शुरू कर दी।


पहला बर्गर बिकने से पहले बन गया ग्राहक बेस


फूड ट्रक तैयार होने के दौरान चाहक जैन ने इंस्टाग्राम पर पूरी प्रक्रिया साझा करनी शुरू की।


ट्रक कहां से आया, उसका निर्माण कैसे हो रहा है, किचन कैसे तैयार किया जा रहा है और नया फूड बिजनेस कैसे शुरू होगा, इन सब चीजों को सोशल मीडिया पर दिखाया गया।


इसका फायदा यह हुआ कि कारोबार शुरू होने से पहले ही लोगों में उसके प्रति दिलचस्पी पैदा हो गई। रिपोर्टों के मुताबिक फूड ट्रक लॉन्च होने से पहले क्राइड के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 5,000 से ज्यादा फॉलोअर्स हो गए थे।


यहां दोनों ने पहली कोशिश से बिल्कुल अलग रास्ता अपनाया।


पहले मॉडल में उन्हें ग्राहकों तक पहुंचने के लिए डिलीवरी प्लेटफॉर्म और पेड एडवरटाइजिंग पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ा था। दूसरी कोशिश में उन्होंने पहले ऑडियंस बनाई और फिर उसके सामने अपना प्रोडक्ट रखा।


सितंबर 2025 में फूड ट्रक की शुरुआत


क्राइड ने सितंबर 2025 में अपना फूड ट्रक शुरू किया। पहले दिन ही 100 से ज्यादा ग्राहक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई।


पहले तीन दिनों में करीब ₹30,000 की बिक्री दर्ज होने की बात कही गई। इसके बाद कारोबार ने रफ्तार पकड़नी शुरू की।


रिपोर्ट के मुताबिक अब फूड ट्रक रोज करीब 350 से 450 ग्राहकों को सर्व करता है और दैनिक बिक्री लगभग ₹1 लाख के आसपास बताई गई है।


हालांकि, इन आंकड़ों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है। इसलिए इन्हें कंपनी के ऑडिटेड वित्तीय नतीजों के बजाय रिपोर्टेड बिजनेस 

आंकड़ों के तौर पर देखना चाहिए।


₹4 लाख से ₹2 करोड़ की कहानी


इस पूरी कहानी का सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला आंकड़ा ₹2 करोड़ है।


सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी और उसके आधार पर प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सितंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच क्राइड ने करीब ₹2 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया।


यानी शुरुआत करीब ₹4 लाख के असफल क्लाउड किचन से हुई और दूसरी कोशिश में कारोबार ने 10 महीनों के भीतर करीब ₹2 करोड़ के रेवेन्यू का दावा हासिल किया।


लेकिन यहां एक जरूरी फर्क समझना होगा।


₹2 करोड़ रेवेन्यू है, मुनाफा नहीं। इसका मतलब यह नहीं कि दोनों ने ₹2 करोड़ की कमाई जेब में रख ली। रेवेन्यू में से कच्चे माल, स्टाफ, किराया, उपकरण, टैक्स, मार्केटिंग, ऑपरेशनल खर्च और दूसरे खर्च निकलते हैं।


यही वजह है कि इस कहानी को “₹4 लाख से ₹2 करोड़ का मुनाफा” कहना गलत होगा।


फूड ट्रक में क्या बेचते हैं?


क्राइड का मेन्यू फ्राइड फूड और बर्गर पर केंद्रित है। इसमें फ्राइड चिकन और पनीर बर्गर के साथ चिकन पॉपकॉर्न, चिकन स्ट्रिप्स और फ्राइज जैसे आइटम शामिल हैं।


उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक बर्गर की कीमत लगभग ₹200 से ₹260 के बीच है।


इस तरह ब्रांड ने मेन्यू को बहुत बड़ा करने के बजाय कुछ खास प्रोडक्ट्स पर फोकस रखा।


फूड बिजनेस में यह रणनीति महत्वपूर्ण है। छोटा और स्पष्ट मेन्यू किचन ऑपरेशन को आसान बनाता है। इन्वेंट्री मैनेजमेंट बेहतर रहता है और ग्राहक को ब्रांड की पहचान समझने में आसानी होती है।


सोशल मीडिया बना बिजनेस का मार्केटिंग इंजन


क्राइड की कहानी में सोशल मीडिया केवल प्रचार का माध्यम नहीं रहा। यह ग्राहक बनाने का जरिया बना।


फूड ट्रक बनने की प्रक्रिया दिखाने से लोगों को कारोबार के पीछे की कहानी पता चली। ग्राहक केवल एक बर्गर खरीदने नहीं आए, बल्कि उस सफर से भी जुड़ गए जिसे उन्होंने ऑनलाइन देखा था।


यही कंटेंट मार्केटिंग का अहम हिस्सा है।


किसी नए ब्रांड को लॉन्च करने से पहले ऑडियंस तैयार करना उसके शुरुआती कारोबार को मजबूत आधार दे सकता है। क्राइड के मामले में रिपोर्टों के मुताबिक यही रणनीति काम करती दिखाई दी।


पहली असफलता ने क्या सिखाया?


कुशल और चाहक की कहानी में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ₹2 करोड़ का आंकड़ा नहीं, बल्कि पहला फेलियर है।


क्लाउड किचन इसलिए नहीं चला क्योंकि केवल ऑनलाइन मौजूद रहना पर्याप्त नहीं था। ग्राहक हासिल करने की लागत ज्यादा थी और प्लेटफॉर्म कमीशन ने मार्जिन पर दबाव बनाया।


रिपोर्टों के मुताबिक उनके पहले क्लाउड किचन में ऑर्डर काफी कम थे। एक विस्तृत सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया कि वहां औसतन केवल तीन ऑर्डर रोज मिलते थे और दैनिक बिक्री करीब ₹1,620 थी। डिलीवरी प्लेटफॉर्म की कमीशन और मार्केटिंग लागत भी कारोबार पर भारी पड़ रही थी।


यही अनुभव दूसरी रणनीति की नींव बना।


दूसरी कोशिश में जोखिम भी बड़ा था


फूड ट्रक शुरू करने के लिए भी दोनों ने पैसा लगाया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक दोनों ने ₹10-₹10 लाख उधार लेकर एक टाटा विंगर कार्गो ट्रक 

खरीदा और उसके बाद ट्रक की फैब्रिकेशन तथा किचन मॉडिफिकेशन पर भी खर्च किया।


इसलिए यह कहना अधूरा होगा कि उन्होंने केवल ₹4 लाख से ₹2 करोड़ तक का सफर तय किया।


असल में पहला ₹4 लाख निवेश असफल हुआ। उसके बाद दूसरी कोशिश के लिए अलग पूंजी जुटाई गई और नया बिजनेस मॉडल बनाया गया।


अब अगला लक्ष्य क्या है?


क्राइड अब केवल एक फूड ट्रक तक सीमित रहने की योजना में नहीं है।


रिपोर्टों के मुताबिक संस्थापक एक बड़े सेंट्रल किचन और भविष्य में फास्ट-कैजुअल रेस्टोरेंट आउटलेट्स की दिशा में बढ़ने की तैयारी कर रहे हैं।


मौजूदा ऑपरेशन में फूड ट्रक के साथ प्रेप किचन और अलग सेंट्रल किचन की व्यवस्था होने की जानकारी भी सामने आई है।


यह विस्तार उनके बिजनेस मॉडल की अगली परीक्षा होगा।


एक फूड ट्रक को सफल बनाना और कई रेस्टोरेंट आउटलेट चलाना दो अलग चुनौतियां हैं। जैसे-जैसे कारोबार बढ़ता है, क्वालिटी कंट्रोल, सप्लाई चेन, स्टाफ, किराया और ऑपरेशनल कॉस्ट का दबाव भी बढ़ता है।


इस कहानी की असली सीख


कुशल रेड्डी और चाहक जैन की कहानी को केवल “फेल हुए और फिर करोड़ों कमाए” वाली मोटिवेशनल कहानी के रूप में देखना आसान है।

लेकिन असली सबक इससे ज्यादा व्यावहारिक है।


पहली गलती के बाद उन्होंने वही मॉडल दोहराया नहीं। उन्होंने समस्या पहचानी, बिजनेस मॉडल बदला, प्रोडक्ट को फोकस किया और लॉन्च से पहले ग्राहक तैयार किए।


सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि उन्होंने अपने पहले फेलियर को डेटा की तरह इस्तेमाल किया।


उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि फूड बिजनेस में सिर्फ अच्छा खाना पर्याप्त नहीं है। ग्राहक तक पहुंच, प्राइसिंग, प्लेटफॉर्म कॉस्ट, ब्रांडिंग, डायरेक्ट ऑडियंस और ऑपरेशन, सभी एक साथ काम करते हैं।


₹2 करोड़ का आंकड़ा अभी रिपोर्टेड है और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है। लेकिन अगर रिपोर्ट किए गए आंकड़े सही हैं, तो यह केस स्टडी बताती है कि एक असफल बिजनेस मॉडल के बाद सही पिवट किस तरह कारोबार की दिशा बदल सकता है।


पहला क्लाउड किचन बंद हुआ। कहानी वहीं खत्म नहीं हुई।


दूसरी बार दोनों ने खाना बेचने से पहले कहानी बेची, ऑडियंस बनाई और फिर अपना फूड ट्रक लॉन्च किया। यही बदलाव उनके बिजनेस सफर का 

सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट नजर आता है।

वीडियो देखें

ADVERTISEMENT
Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

BREAKING NEWS

संबंधित खबरें

80 हजार पाउंड की नौकरी छोड़ी, आइसक्रीम बिजनेस से बदली जिंदगी

2026-08-20 17:45:12

भारतीय सेमीकंडक्टर स्टार्टअप्स ने जुटाए 206 मिलियन डॉलर

2026-08-12 15:37:35

डेयरी फार्म बिज़नेस 2026: जानें लागत, कमाई, सही नस्ल और सरकारी योजनाओं की पूरी जानकारी

2026-06-21 06:18:10

कौन थीं दिशा सालियान? 6 साल बाद CBI जांच क्यों, सुशांत केस से क्या था कनेक्शन?

2026-09-02 16:28:23

एसआईआर पर कपिल सिब्बल का बड़ा आरोप, ‘भाजपा को चुनाव जिताने की कोशिश’, सुप्रीम कोर्ट से दखल की मांग

2026-09-02 16:12:09

राम मंदिर ट्रस्ट में 3 नए ट्रस्टी शामिल, पहले CEO के नाम पर मंथन तेज

2026-09-02 16:00:39

असम में आर्थिक तंगी के चलते पत्नी और 3 बच्चों की हत्या का आरोप, स्कूल शिक्षक गिरफ्तार

2026-09-02 15:49:58

‘राम धन की चोरी कोई माफ नहीं करेगा’, अखिलेश यादव का भाजपा पर तीखा हमला

2026-09-02 15:30:52

TRENDING

ताज़ा ख़बरें
BREAKING NEWS
ADVERTISEMENT

Your Ad Here
TRENDING
आज का ई-पेपर
मुजफ्फरनगर (12 पेज)
बिजनौर (10 पेज)
सहारनपुर (11 पेज)
मुरादाबाद (14 पेज)
Home Video Epaper Reel Menu
Chat With Us
SHAH TIMES
ख़बरें छुपाता नहीं, छापता है
🏠 होम ⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ 📰 ताज़ा खबरें 🇮🇳 देश 🌍 दुनिया 🏛 राजनीति 🚔 क्राइम 📈 बिजनेस 🏏 स्पोर्ट्स 🎓 शिक्षा ❤️ स्वास्थ्य 📰 ई-पेपर