दिशा सालियान की 2020 में हुई मौत के छह साल बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने सीबीआई को एफआईआर दर्ज कर जांच का आदेश दिया है। अदालत ने बिना सबूत किसी को आरोपी मानने से भी रोका है।
मुंबई, महाराष्ट्र | Date | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
दिशा सालियान की मौत का मामला एक बार फिर देश की सुर्खियों में है। 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद 28 वर्षीय दिशा की मौत हुई थी।
अब करीब छह साल बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया है। अदालत ने सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने, दिशा के पिता सतीश सालियान का बयान रिकॉर्ड करने और उनकी मौत से जुड़ी सभी परिस्थितियों की नए सिरे से जांच
करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश इसलिए अहम है क्योंकि पिछले वर्षों में दिशा की मौत को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे। एक तरफ मुंबई पुलिस की जांच में
हत्या का पर्याप्त सबूत नहीं मिलने की बात सामने आई थी, दूसरी तरफ दिशा के पिता ने जांच प्रक्रिया और उनकी बेटी की मौत की परिस्थितियों पर
गंभीर सवाल उठाए।
दिशा सालियान मनोरंजन जगत में काम करने वाली सेलिब्रिटी पीआर मैनेजर थीं। उन्होंने कई कलाकारों और विज्ञापन एजेंसियों के साथ काम किया
था।
उनके करियर में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का नाम भी शामिल रहा। यही वजह है कि उनकी मौत के बाद दिशा का नाम सुशांत सिंह राजपूत की मौत के साथ सार्वजनिक चर्चा में जुड़ गया।
दिशा की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक आवासीय इमारत से गिरने के बाद हुई। वह उस समय 28 वर्ष की थीं।
दिशा सालियान ने सुशांत सिंह राजपूत के साथ मैनेजर के तौर पर काम किया था। दिशा की मौत के केवल छह दिन बाद, 14 जून 2020 को सुशांत
सिंह राजपूत भी मुंबई में मृत पाए गए।
दोनों मौतों के बीच केवल छह दिन का अंतर होने के कारण सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में दोनों घटनाओं को जोड़कर कई तरह के दावे
किए गए।
लेकिन यहां एक अहम फर्क समझना जरूरी है।
दोनों मौतों के बीच समय का अंतर अपने आप में किसी आपराधिक संबंध का सबूत नहीं है।
बॉम्बे हाईकोर्ट का मौजूदा आदेश दिशा सालियान की मौत की परिस्थितियों की जांच से संबंधित है। अदालत ने यह निष्कर्ष नहीं दिया है कि उनकी मौत
का सुशांत सिंह राजपूत की मौत से कोई आपराधिक संबंध था। ऐसा कोई संबंध जांच से सामने आए साक्ष्यों पर ही तय हो सकता है।
दिशा की मौत 8 जून 2020 की रात हुई थी। उपलब्ध पुलिस रिकॉर्ड और अदालत में रखी गई दलीलों के अनुसार वह मलाड स्थित एक इमारत में थीं
और वहां से गिरने के बाद उनकी मौत हुई।
मुंबई पुलिस ने शुरुआत में मामले में एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट यानी एडीआर दर्ज की थी।
बाद की पुलिस जांच में मौत को आत्महत्या से जुड़ा माना गया और हत्या के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिलने की बात सामने आई।
महाराष्ट्र सरकार की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि शुरुआती एडीआर जांच अक्टूबर 2020 में बंद हो गई थी और बाद में 2023 में सोशल
मीडिया पर सामने आए आरोपों के बाद मामले की आगे जांच की गई।
दिशा की मौत के बाद उनके परिवार की ओर से लंबे समय तक मुंबई पुलिस की जांच पर सवाल नहीं उठाए गए थे। लेकिन बाद में दिशा के पिता
सतीश सालियान का रुख बदला।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बेटी की मौत सामान्य आत्महत्या या दुर्घटना नहीं थी। उन्होंने मामले में आपराधिक साजिश, सामूहिक दुष्कर्म और
हत्या के गंभीर आरोप लगाए तथा स्वतंत्र जांच की मांग की।
इन आरोपों में शिवसेना यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे का नाम भी शामिल किया गया। हालांकि आदित्य ठाकरे ने इन आरोपों का विरोध किया और उनके पक्ष की ओर से अदालत में कहा गया कि मामला राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से प्रेरित है।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अदालत ने आदित्य ठाकरे या किसी अन्य व्यक्ति को दिशा सालियान की मौत के मामले में दोषी नहीं ठहराया है।
सतीश सालियान ने अदालत में दावा किया कि पुलिस जांच में गंभीर कमियां थीं और परिवार को जांच से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
उन्होंने सीबीआई से स्वतंत्र जांच कराने और एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
उनकी याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने भी इस बात पर सवाल उठाए कि मामला इतने लंबे समय तक एडीआर के स्तर पर क्यों चलता रहा
और एफआईआर दर्ज कर कानूनी जांच क्यों नहीं की गई।
बॉम्बे हाईकोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान जांच की अवधि और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।
अदालत के सामने यह मुद्दा आया कि एडीआर के जरिए मौत का कारण पता लगाने वाली शुरुआती प्रक्रिया के बाद भी मामले की जांच लंबे समय तक
किस कानूनी आधार पर जारी रही।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने यह सवाल उठाया कि एडीआर जांच को लंबे समय तक जारी रखने का वैधानिक आधार क्या था।
अदालत ने यह भी कहा कि केवल एडीआर की प्रक्रिया किसी व्यक्ति को क्लीन चिट देने का आधार नहीं हो सकती।
यही कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी चिंता सीबीआई जांच के आदेश के पीछे महत्वपूर्ण कारणों में से एक बनी।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सीबीआई को मामले में एफआईआर दर्ज करने और एक वरिष्ठ तथा अनुभवी अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया है।
जांच अधिकारी को दिशा के पिता का बयान दर्ज करना होगा और उनकी मौत से जुड़ी सभी परिस्थितियों की पड़ताल करनी होगी।
मुंबई पुलिस को केस से जुड़े दस्तावेज, रिकॉर्ड और भौतिक साक्ष्य सीबीआई को सौंपने होंगे।
जांच के दौरान उस रात मौजूद लोगों, संभावित गवाहों और पहले की जांच में दर्ज बयानों की दोबारा समीक्षा की जा सकती है।
फॉरेंसिक रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से जुड़े दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं।
नहीं।
यह इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी पहलू है।
हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया है, लेकिन अदालत ने यह नहीं कहा कि दिशा सालियान की हत्या हुई थी।
अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि किसी व्यक्ति को तब तक आरोपी नहीं माना जाना चाहिए, जब तक जांच अधिकारी को उसके खिलाफ पर्याप्त सामग्री से उचित संदेह का आधार न मिले।
इसका मतलब है कि सीबीआई को पहले जांच करनी होगी। जांच के बाद अगर संज्ञेय अपराध सामने आता है तो कानून के मुताबिक चार्जशीट दाखिल
की जा सकती है। अगर अपराध का पर्याप्त आधार नहीं मिलता तो सीबीआई को उचित क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
सतीश सालियान ने अपनी बेटी की मौत को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। इनमें सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के दावे शामिल हैं।
लेकिन ये शिकायतकर्ता के आरोप हैं, न्यायिक रूप से स्थापित तथ्य नहीं।
दूसरी तरफ महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस ने अदालत में पहले की जांच का बचाव किया था। उनका कहना था कि हत्या के आरोप को साबित करने के लिए पर्याप्त सामग्री नहीं मिली थी।
अब सीबीआई को दोनों पक्षों से अलग हटकर उपलब्ध साक्ष्यों की स्वतंत्र जांच करनी होगी।
8 जून 2020: दिशा सालियान की मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद मौत हुई।
जून 2020: मुंबई पुलिस ने मामले में एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट दर्ज की और जांच शुरू की।
14 जून 2020: दिशा की मौत के छह दिन बाद सुशांत सिंह राजपूत मुंबई में मृत पाए गए। दोनों घटनाओं को लेकर सार्वजनिक चर्चा तेज हुई।
2020: पुलिस जांच में हत्या या साजिश के पर्याप्त सबूत नहीं मिलने की बात सामने आई।
अक्टूबर 2020: राज्य के अनुसार शुरुआती एडीआर जांच बंद कर दी गई थी।
2023: सोशल मीडिया पर उठे आरोपों के बाद मामले की आगे जांच किए जाने की जानकारी अदालत में दी गई।
2024-25: दिशा के पिता ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र जांच और एफआईआर की मांग को लेकर कानूनी रास्ता अपनाया।
मार्च 2025: सतीश सालियान ने मुंबई पुलिस को विस्तृत शिकायत देकर अपनी बेटी की मौत को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
अप्रैल 2025: उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका दायर की।
जुलाई 2025: महाराष्ट्र सरकार और पुलिस ने आरोपों का विरोध करते हुए पहले की जांच का हवाला दिया।
नवंबर 2025: हाईकोर्ट में पुलिस जांच की अवधि और दस्तावेजों को लेकर सवाल उठे।
28 अगस्त 2026: दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।
2 सितंबर 2026: बॉम्बे हाईकोर्ट ने सीबीआई को एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच करने का आदेश दिया।
इस मामले में अदालत का सबसे महत्वपूर्ण संदेश जांच की निष्पक्षता और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा है।
हाईकोर्ट ने एक तरफ सीबीआई को नए सिरे से जांच का आदेश दिया, लेकिन दूसरी तरफ यह भी स्पष्ट किया कि जांच के दौरान किसी व्यक्ति को
केवल आरोपों या राजनीतिक दावों के आधार पर आरोपी नहीं माना जा सकता।
अगर जांच में अपराध के पर्याप्त सबूत मिलते हैं तो कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी।
अगर सबूत नहीं मिलते तो मामले को बंद करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
इस तरह हाईकोर्ट का आदेश न तो हत्या का फैसला है और न ही किसी व्यक्ति के खिलाफ दोष सिद्धि। यह एक स्वतंत्र जांच शुरू कराने का
न्यायिक निर्देश है।
दिशा की मौत और सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बीच छह दिन का अंतर रहा। यही वजह है कि दोनों मामले लंबे समय से सार्वजनिक बहस में साथ-
साथ आते रहे हैं।
लेकिन सीबीआई की मौजूदा जांच का कानूनी दायरा दिशा सालियान की मौत की परिस्थितियों से जुड़ा है।
अगर जांच में सुशांत सिंह राजपूत की मौत से संबंधित कोई तथ्य सामने आता है तो वह अलग सवाल होगा। फिलहाल दोनों मौतों के बीच किसी
आपराधिक संबंध को तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं है।
दिशा सालियान केस ने छह वर्षों तक राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का रूप लिया। अब अदालत के आदेश के बाद मामला एक नए जांच चरण में
पहुंच गया है।
सीबीआई के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी कि वह पुराने रिकॉर्ड, फॉरेंसिक सामग्री, गवाहों के बयान और पिता के आरोपों को निष्पक्ष तरीके से
परखे।
इस जांच का परिणाम कई सवालों का जवाब दे सकता है। क्या दिशा की मौत वास्तव में दुर्घटना या आत्महत्या थी? क्या शुरुआती जांच में कोई गंभीर कमी रह गई? क्या किसी अपराध के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं? और अगर अपराध हुआ तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है?
इन सभी सवालों का जवाब राजनीतिक बयानों से नहीं, जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों से मिलेगा।
फिलहाल इतना तय है कि 8 जून 2020 की घटना से शुरू हुआ यह मामला 2 सितंबर 2026 को एक नए कानूनी अध्याय में प्रवेश कर चुका है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सीबीआई को जांच की जिम्मेदारी दे दी है। अब नजर इस बात पर होगी कि छह साल पुराने इस मामले में नई जांच से कौन से तथ्य सामने आते हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।