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डूसू चुनाव 2026: तीसरे राउंड में बदली तस्वीर, अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई आगे

Mohammad Naved • 2026-09-19 12:04:14
डूसू चुनाव 2026: तीसरे राउंड में बदली तस्वीर, अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई आगे

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव की मतगणना में तीसरे राउंड के बाद अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई आगे निकल गई है। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार ने बढ़त बनाई है।

📍 नई दिल्ली
🗓️ 19 सितंबर 2026
✍️ मोहम्मद नावेद


डूसू चुनाव की मतगणना में बदली तस्वीर

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ यानी डूसू चुनाव 2026 की मतगणना शनिवार को जारी है और शुरुआती रुझानों में मुकाबला लगातार बदलता दिख रहा है। तीसरे राउंड के बाद अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई के विजय शंकर मीणा ने एबीवीपी के यश डबास को पीछे छोड़ दिया है। वहीं उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन बढ़त बनाए हुए हैं।

मतगणना दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस स्थित यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम के मल्टीपर्पज हॉल में हो रही है। चार केंद्रीय पदों, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव, के लिए मतों की गिनती की जा रही है। उपलब्ध रुझान अंतिम नतीजे नहीं हैं और आगे के राउंड में स्थिति बदल सकती है।


अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई की बढ़त

तीसरे राउंड के बाद अध्यक्ष पद की दौड़ में विजय शंकर मीणा ने बढ़त हासिल की। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक वह एबीवीपी के यश डबास से 400 से अधिक मतों से आगे चल रहे थे।

मतगणना के पहले राउंड में तस्वीर अलग थी। उस समय एबीवीपी अध्यक्ष और सचिव पद पर आगे चल रही थी, जबकि उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव पदों पर निर्दलीय प्रत्याशी बढ़त में थे। इसके बाद अगले राउंड में अध्यक्ष पद का समीकरण बदला और एनएसयूआई प्रत्याशी आगे निकल गए।

यह बदलाव बताता है कि डूसू चुनाव में शुरुआती रुझानों को अंतिम नतीजे के तौर पर देखना उचित नहीं होगा। अभी मतगणना पूरी नहीं हुई है और सभी केंद्रीय पदों पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार आगे

उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने एबीवीपी के ईशु मौर्य पर बढ़त बनाई हुई है। तीसरे राउंड के बाद उपलब्ध जानकारी के अनुसार दीपांशु शौकीन करीब 2000 मतों से आगे चल रहे थे।

इस पद का मुकाबला भी डूसू चुनाव की मौजूदा तस्वीर में महत्वपूर्ण है। प्रमुख छात्र संगठनों के उम्मीदवारों के अलावा निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी ने मुकाबले को बहुकोणीय बनाया है।


चार केंद्रीय पदों के लिए 20 उम्मीदवार

इस वर्ष डूसू के चार केंद्रीय पदों के लिए कुल 20 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। अध्यक्ष पद के लिए 7 उम्मीदवार, उपाध्यक्ष पद के लिए 5 उम्मीदवार और सचिव तथा संयुक्त सचिव पद के लिए 4-4 उम्मीदवारों ने नामांकन किया था।

अध्यक्ष पद पर एबीवीपी की ओर से यश डबास और एनएसयूआई की ओर से विजय शंकर मीणा प्रमुख प्रत्याशियों में शामिल हैं। एआईएसए और एसएफआई गठबंधन ने भी चारों केंद्रीय पदों पर उम्मीदवार उतारे थे।

उपाध्यक्ष पद पर एबीवीपी के ईशु मौर्य और एनएसयूआई के वीर चतरथ मैदान में थे। वहीं अन्य पदों पर भी प्रमुख छात्र संगठनों और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच मुकाबला रहा।


मतदान प्रतिशत में इजाफा

डूसू चुनाव के लिए शुक्रवार को मतदान हुआ था। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस बार 40.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यह पिछले 3 वर्षों में सबसे अधिक मतदान प्रतिशत बताया गया है। वर्ष 2025 में मतदान प्रतिशत 39.5 रहा था।

इस बार मतदान दिल्ली विश्वविद्यालय के 52 केंद्रों पर 2 चरणों में कराया गया। मतदान के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।

छात्र मुद्दों पर रहा चुनावी फोकस

डूसू चुनाव में इस बार छात्र आवास, कैंपस सुरक्षा, फीस, परिवहन, बुनियादी सुविधाओं और विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े मुद्दे चर्चा में रहे। चुनाव से पहले दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी इमारत गिरने की घटना ने छात्र आवास और सुरक्षा को लेकर बहस को भी प्रभावित किया।

प्रमुख छात्र संगठनों ने अपने-अपने घोषणापत्रों में छात्र कल्याण से जुड़े मुद्दे उठाए। एबीवीपी ने छात्र आवास, छात्राओं के लिए हॉस्टल, स्टूडेंट हाउसिंग सेल और फायर सेफ्टी ऑडिट जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी। एनएसयूआई ने भी हॉस्टल, सस्ती परिवहन सुविधा, लाइब्रेरी, कैंटीन और कैंपस इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रस्ताव सामने रखे।


 प्रचार के दौरान विवाद भी सामने आए

डूसू चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में छात्र संगठनों के बीच विवाद और कथित झड़पों की खबरें सामने आई थीं। विभिन्न घटनाओं को लेकर संबंधित पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। इन मामलों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने भी चुनाव प्रक्रिया और कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर सख्त रुख अपनाया।

अदालत ने चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद विजय जुलूस निकालने पर रोक लगाई है। यह रोक सड़कों के साथ-साथ विश्वविद्यालय परिसरों और हॉस्टल क्षेत्रों पर भी लागू है। अदालत ने चुनाव प्रचार में नियमों के उल्लंघन और वाहनों के काफिले से जुड़े मामलों पर भी सवाल उठाए हैं।


कॉलेज स्तर के नतीजों में एबीवीपी की मौजूदगी

डूसू के केंद्रीय पैनल की मतगणना से अलग दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में छात्रसंघ चुनावों के नतीजे भी सामने आए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार एबीवीपी ने कई कॉलेजों में प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की है।

इन कॉलेज स्तरीय नतीजों को डूसू केंद्रीय पैनल के परिणाम से अलग समझना जरूरी है। कॉलेज यूनियन के नतीजे पूरे विश्वविद्यालय के केंद्रीय छात्रसंघ के अंतिम नतीजे तय नहीं करते।


अब किस बात पर रहेगी नजर

अब सबसे अहम सवाल मतगणना के बाकी राउंड और अंतिम परिणाम को लेकर है। अध्यक्ष पद पर तीसरे राउंड के बाद एनएसयूआई ने बढ़त बनाई है, जबकि उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। सचिव और संयुक्त सचिव पदों की अंतिम तस्वीर भी पूरी मतगणना के बाद साफ होगी।

डूसू चुनाव में रुझानों का तेजी से बदलना इस बात को रेखांकित करता है कि शुरुआती आंकड़ों से अंतिम परिणाम का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा। प्रत्येक राउंड के बाद उम्मीदवारों के बीच मतों का अंतर बदल सकता है।


डूसू चुनाव का व्यापक संदर्भ

दिल्ली विश्वविद्यालय का छात्रसंघ चुनाव देश के प्रमुख विश्वविद्यालयी छात्र चुनावों में गिना जाता है। इसमें एबीवीपी, एनएसयूआई, एआईएसए और एसएफआई जैसे छात्र संगठन सक्रिय भूमिका निभाते हैं। इसलिए डूसू के परिणामों को छात्र राजनीति के संदर्भ में व्यापक दिलचस्पी के साथ देखा जाता है।

हालांकि विश्वविद्यालयी चुनाव के परिणामों को सीधे राष्ट्रीय या विधानसभा राजनीति के जनादेश के रूप में देखना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा। डूसू का चुनाव विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच प्रतिनिधित्व और कैंपस से जुड़े मुद्दों पर आधारित होता है।

फिलहाल मतगणना जारी है। तीसरे राउंड के बाद अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई और उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार की बढ़त सामने आई है। अंतिम नतीजे घोषित होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि चारों केंद्रीय पदों पर किसे छात्रों का अंतिम समर्थन मिला।

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Mohammad Naved

Mohammad Naved

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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