दिल्ली दंगा मामला: अंकित शर्मा हत्या केस में ताहिर हुसैन समेत 5 को उम्रकैद
Asif Khan
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2026-07-31 20:27:36
अंकित शर्मा हत्या केस में ताहिर हुसैन को उम्रकैद
दिल्ली दंगा केस में कोर्ट का बड़ा फैसला, पांच दोषियों को सज़ा
मौत की सज़ा नहीं, उम्रकैद, अदालत ने क्या कहा?
उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या मामले में अदालत ने ताहिर हुसैन और चार अन्य दोषियों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई। अदालत ने अपराध को बेहद क्रूर माना, लेकिन इसे "रेयरेस्ट ऑफ रेयर" श्रेणी में नहीं रखा।
New Delhi 📰 31 July 2026 ✍️ Asif Khan
अंकित शर्मा हत्या केस: अदालत का फैसला, छह साल पुराने दंगा मामले में नया अध्याय
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 के दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़े सबसे चर्चित मुकदमों में शुक्रवार को महत्वपूर्ण कानूनी फैसला सामने आया। दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य दोषियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई। अभियोजन पक्ष ने इस मामले में मृत्युदंड की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उसे स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने क्या कहा
सज़ा सुनाते समय अदालत ने हत्या की क्रूरता पर गंभीर टिप्पणी की और कहा कि अपराध बेहद भयावह था। इसके बावजूद अदालत ने उपलब्ध कानूनी मानकों और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तय सिद्धांतों के आधार पर यह माना कि मामला मृत्युदंड देने वाली "रेयरेस्ट ऑफ रेयर" श्रेणी में नहीं आता। इसी आधार पर दोषियों को आजीवन कारावास की सज़ा दी गई।
मामला क्या था
यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ा है। उस दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा लापता हो गए थे। बाद में उनका शव एक नाले से बरामद हुआ। जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि हिंसा के दौरान उनकी हत्या की गई। इसके बाद पुलिस ने कई आरोपियों के खिलाफ हत्या, दंगा और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।
अभियोजन का पक्ष
अभियोजन ने अदालत में दलील दी कि हत्या पूर्व नियोजित और अत्यंत क्रूर थी। इसी आधार पर अभियोजन ने दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की। अभियोजन ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शी गवाहों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य दस्तावेजों का हवाला दिया।
बचाव पक्ष की दलील
बचाव पक्ष ने अदालत से नरमी बरतने की अपील की। ताहिर हुसैन ने भी सज़ा के बाद संकेत दिया कि वह फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे। इसका अर्थ है कि यह मामला आगे अपीलीय न्यायिक प्रक्रिया से भी गुजरेगा।
2020 दिल्ली दंगों की पृष्ठभूमि
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में व्यापक हिंसा हुई थी। इस हिंसा में अनेक लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। कई आपराधिक मामलों की जांच अलग-अलग स्तर पर हुई। अंकित शर्मा हत्या मामला उन सबसे चर्चित मामलों में शामिल रहा जिनकी सुनवाई कई वर्षों तक चली।
फैसले का व्यापक महत्व
यह फैसला केवल एक आपराधिक मुकदमे तक सीमित नहीं है। यह उन मामलों में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिनमें लंबे समय तक जांच, गवाहों और अदालत की प्रक्रिया चली। न्यायिक व्यवस्था के लिए यह फैसला उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े प्रमुख मामलों में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट है कि अंतिम कानूनी स्थिति उच्च न्यायालय और आवश्यकता पड़ने पर सर्वोच्च न्यायालय में अपील के बाद ही तय होगी।
आगे क्या
अब दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील का संवैधानिक अधिकार है। यदि अपील दायर होती है तो साक्ष्यों, कानून और निचली अदालत के फैसले की दोबारा न्यायिक समीक्षा होगी। इसलिए इस मामले की कानूनी यात्रा अभी समाप्त नहीं हुई है।
सम्पादकीय दृष्टिकोण
अंकित शर्मा हत्या मामले का फैसला छह वर्ष पुराने एक संवेदनशील मुकदमे में महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव है। अदालत ने अपराध की गंभीरता स्वीकार करते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई, लेकिन मृत्युदंड देने से इनकार किया। आगे की न्यायिक प्रक्रिया इस मामले की अंतिम कानूनी दिशा तय करेगी।
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Asif Khan
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।