सुप्रीम कोर्ट ने पैलेट गन पर क्या कहा? जानिए पूरा मामला
जंतर-मंतर प्रदर्शन पर बड़ा सवाल, केंद्र से सुप्रीम कोर्ट ने मांगा रिकॉर्ड
जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के कथित इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और पेश करने को कहा। अदालत ने घायल छात्रों के उपचार को भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। मामला पुलिस बल के इस्तेमाल और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन से जुड़ा है।
नई दिल्ली
30 जुलाई 2026
Asif Khan
देश की सर्वोच्च अदालत में गुरुवार को जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि इस मामले से जुड़े रैपिड एक्शन फोर्स के एम्युनिशन रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं और आवश्यक होने पर अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं। इसी सुनवाई के दौरान घायल छात्रों के इलाज को लेकर भी अदालत ने स्पष्ट किया कि उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
यह मामला केवल एक प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में यह बड़ा सवाल है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बल कितनी शक्ति का प्रयोग कर सकते हैं और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छात्र घायल हुए। अदालत के सामने यह भी कहा गया कि घायलों को समय पर पर्याप्त चिकित्सा सहायता नहीं मिली।
केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पुलिस और सुरक्षा बल स्थापित मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी के अनुसार कार्य करते हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि भीड़ नियंत्रण के लिए बल प्रयोग परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
अदालत ने इस स्तर पर पैलेट गन के उपयोग को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया, लेकिन रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश देकर स्पष्ट किया कि मामले की न्यायिक समीक्षा पूरी गंभीरता से होगी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह संकेत दिया कि पैलेट गन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश देना इस चरण में उचित नहीं होगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि ऐसे हथियारों का इस्तेमाल केवल असाधारण परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए और प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच आवश्यक है।
अदालत ने केंद्र सरकार से संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा ताकि बाद की सुनवाई में तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जा सके।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने घायल छात्रों के उपचार को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति कानून-व्यवस्था की कार्रवाई के दौरान घायल होता है, तो उसके इलाज में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।
यह निर्देश केवल इस मामले तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों के लिए भी एक महत्वपूर्ण न्यायिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
पैलेट गन को भीड़ नियंत्रण के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले गैर-घातक हथियारों की श्रेणी में रखा जाता है। हालांकि मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इनके उपयोग से गंभीर आंखों और शरीर की चोटें हो सकती हैं।
दूसरी ओर सुरक्षा एजेंसियों का तर्क है कि हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई बार सीमित बल प्रयोग आवश्यक हो जाता है और पैलेट गन कुछ परिस्थितियों में अन्य विकल्पों की तुलना में कम घातक मानी जाती है।
यही कारण है कि इस विषय पर लंबे समय से सार्वजनिक और कानूनी बहस जारी है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, तो पैलेट गन का इस्तेमाल उचित नहीं ठहराया जा सकता। उनका आग्रह है कि पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
वहीं सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का पक्ष है कि अदालत के समक्ष सभी तथ्य रखे जाएंगे और कार्रवाई स्थापित नियमों तथा एसओपी के अनुरूप की गई।
फिलहाल अदालत ने किसी भी पक्ष के दावों को अंतिम रूप से स्वीकार या खारिज नहीं किया है।
यह मामला केवल जंतर-मंतर तक सीमित नहीं है। इसका असर भविष्य में भीड़ नियंत्रण की नीति, पुलिस प्रशिक्षण, एसओपी की समीक्षा और नागरिक अधिकारों से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है।
यदि अदालत आगे विस्तृत दिशानिर्देश जारी करती है, तो देशभर में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की कार्यप्रणाली में बदलाव देखने को मिल सकता है।
सुप्रीम कोर्ट पैलेट गन मामले की सुनवाई अभी जारी है और अदालत ने अंतिम फैसला नहीं दिया है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत ने रिकॉर्ड सुरक्षित रखने, तथ्यों की निष्पक्ष जांच और घायल छात्रों के इलाज को प्राथमिकता देने पर जोर दिया है।
आने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि अदालत इस मामले में कौन-से कानूनी मानदंड तय करती है और क्या मौजूदा एसओपी में किसी बदलाव की आवश्यकता महसूस की जाती है। फिलहाल तथ्यों की न्यायिक जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।