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दिल्ली SIR में 35 लाख से अधिक गणना प्रपत्र डिजिटाइज, प्रक्रिया तेज

Shahana 2026-07-19 08:18:47
दिल्ली SIR में 35 लाख से अधिक गणना प्रपत्र डिजिटाइज, प्रक्रिया तेज

दिल्ली SIR में 35 लाख प्रपत्र डिजिटाइज, अब आगे क्या होगा?

मतदाता सूची अपडेट में बड़ी प्रगति, 24% रिकॉर्ड डिजिटल हुए


Location:-  New Delhi, India

Date:-  19 July 2026

Byline:-  Shahana


दिल्ली SIR अभियान ने पकड़ी रफ्तार, चुनाव आयोग का नया फोकस

दिल्ली में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान 35 लाख से अधिक गणना प्रपत्रों का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है। यह मतदाता सूची को अद्यतन और अधिक सटीक बनाने की प्रक्रिया का अहम चरण है। अब निर्वाचन अधिकारी फॉर्म वितरण से अधिक डेटा अपलोड और सत्यापन पर ध्यान दे रहे हैं।

दिल्ली में SIR अभियान ने पकड़ी रफ्तार

दिल्ली में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR अभियान ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ताज़ा स्थिति रिपोर्ट के अनुसार शनिवार तक 35,07,758 गणना प्रपत्रों का डिजिटलीकरण पूरा किया जा चुका है। यह राष्ट्रीय राजधानी के कुल 1,45,10,298 पंजीकृत मतदाताओं का लगभग 24.17 प्रतिशत है। यह प्रगति इसलिए भी उल्लेखनीय मानी जा रही है क्योंकि कुछ दिन पहले तक डिजिटाइज किए गए प्रपत्रों की संख्या 30,49,330 थी। यानी कम समय में लाखों नए प्रपत्र डिजिटल रिकॉर्ड का हिस्सा बने हैं।

विशेष गहन पुनरीक्षण क्या है

विशेष गहन पुनरीक्षण या SIR निर्वाचन आयोग की वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से मतदाता सूची को अद्यतन, सटीक और त्रुटिरहित बनाया जाता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल हो और अपात्र अथवा दोहराए गए नामों की पहचान की जा सके। इस प्रक्रिया के दौरान बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित करते हैं, मतदाताओं से उन्हें भरवाते हैं और बाद में इन्हें डिजिटल सिस्टम में अपलोड किया जाता है।

अब क्यों बदला अधिकारियों का फोकस

अभियान के शुरुआती चरण में प्राथमिकता अधिक से अधिक मतदाताओं तक गणना प्रपत्र पहुंचाने की थी। अब जबकि अधिकांश वितरण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, निर्वाचन अधिकारी डिजिटलीकरण, डेटा एंट्री और सत्यापन पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।

डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने के बाद प्रत्येक प्रविष्टि का तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर परीक्षण किया जाता है। इसी आधार पर संशोधित मतदाता सूची तैयार होती है।

डिजिटलीकरण क्यों महत्वपूर्ण है

मतदाता सूची केवल चुनाव कराने का दस्तावेज नहीं होती। यही सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बुनियाद है। यदि रिकॉर्ड अद्यतन नहीं होंगे तो पात्र मतदाता मतदान से वंचित हो सकते हैं या सूची में त्रुटियां बनी रह सकती हैं।

डिजिटलीकरण से रिकॉर्ड का सत्यापन तेज होता है। डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान आसान होती है और भविष्य में संशोधन की प्रक्रिया भी अधिक व्यवस्थित बनती है।

क्या 24 प्रतिशत पर्याप्त है

35 लाख से अधिक प्रपत्रों का डिजिटलीकरण एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि पूरा अभियान समाप्त हो गया है। कुल मतदाता संख्या की तुलना में अभी भी बड़ी संख्या में प्रपत्रों का डिजिटल प्रोसेस पूरा होना बाकी है।

इसी कारण निर्वाचन आयोग ने कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR कार्यक्रम की समय-सीमा में संशोधन भी किया है ताकि अधिक से अधिक मतदाता प्रक्रिया में शामिल हो सकें।

राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा

मतदाता सूची का पुनरीक्षण हमेशा सार्वजनिक और राजनीतिक बहस का विषय रहता है। विभिन्न राजनीतिक दल यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि कोई पात्र मतदाता सूची से बाहर रह जाए।

दूसरी ओर निर्वाचन आयोग लगातार यह कहता रहा है कि पूरी प्रक्रिया कानून के निर्धारित प्रावधानों और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था के तहत संचालित की जा रही है। आयोग का उद्देश्य केवल मतदाता सूची की शुद्धता बढ़ाना है।

चुनौतियां भी कम नहीं

दिल्ली जैसे महानगर में करोड़ों मतदाताओं का डेटा एकत्र करना और उसे डिजिटल स्वरूप देना आसान कार्य नहीं है। लगातार आबादी का स्थानांतरण, नए मतदाताओं का पंजीकरण, मृत मतदाताओं के रिकॉर्ड का अद्यतन और तकनीकी सत्यापन इस प्रक्रिया को जटिल बनाते हैं।

इसके अलावा फील्ड स्तर पर बूथ लेवल अधिकारियों पर कार्यभार भी बढ़ता है। निर्वाचन आयोग ने इसी अतिरिक्त जिम्मेदारी को देखते हुए BLO और पर्यवेक्षकों के लिए विशेष मानदेय की भी घोषणा की है।

आगे क्या होगा

अगले चरण में डिजिटाइज किए गए प्रपत्रों का सत्यापन होगा। इसके बाद प्रारूप मतदाता सूची तैयार की जाएगी। यदि किसी मतदाता को अपने विवरण में त्रुटि दिखाई देती है या नाम सूची में शामिल नहीं होता है तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलेगा।

निर्वाचन आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य अधिक विश्वसनीय, अद्यतन और समावेशी मतदाता सूची तैयार करना है।

 

दिल्ली में SIR के तहत 35 लाख से अधिक गणना प्रपत्रों का डिजिटलीकरण इस व्यापक निर्वाचन अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हालांकि अभी काफी कार्य शेष है, लेकिन वितरण से डिजिटल प्रोसेसिंग की ओर बढ़ता फोकस संकेत देता है कि मतदाता सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अब अगले निर्णायक चरण में प्रवेश कर रही है। आने वाले दिनों में सत्यापन और दावों की प्रक्रिया इस अभियान की सफलता तय करेगी।

 

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Shahana

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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